वसंत विहार गैंगरेप के आरोपियों ने पीड़ित पैरा-मेडिकल की छात्रा को मृत समझकर बस से फेंका था। मुख्य आरोपी रामसिंह ने बस में मौजूद अपने साथियों से कहा था, ‘लगता है मर गई है और अब इसे बस से नीचे फेंक दो।’
मामले की पुलिस जांच में ये खुलासा हुआ है। पुलिस ने अपनी जांच रिपोर्ट में यह भी जोड़ा है कि मुख्य आरोपी राम सिंह और अक्षय ठाकुर ने पीड़िता से दो बार दुष्कर्म किया।
दक्षिण जिला पुलिस अधिकारियों ने यह भी दावा किया है कि आरोपियों ने पहले छात्रा के दोस्त को बस से नीचे फेंका था और इसके बाद छात्रा को।
पुलिस द्वारा तैयार की जा रही रिपोर्ट में ये बात भी सामने आई है कि आरोपियों ने दोनों पीड़ितों के कपड़े इसलिए उतार दिए थे कि अगर जिंदा रह गए तो सर्दी से मर जाएंगे।
युवक के कपडे़ इसलिए उतार दिए थे कि अगर युवक बच गया तो वह पुलिस को जल्दी शिकायत नहीं कर पाएगा। आरोपियों ने दोनों को बस के अगले दरवाजे से फेंका था। जब छात्रा को फेंका गया तो वह पायदान पर अटक गई थी।
आरोपी ने बस को इस तरह रोका था कि अगर वह बस चलाए तो दोनों बस के पिछले पहिए के नीचे आ जाएं। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, आरोपी जब युवक से ज्यादा मारपीट करने लगे तो वह बस की सीट के नीचे घुस गया था और कुछ समय के लिए उसने अपनी सांस रोक ली थी। इससे उनको लगा कि युवक की हालत मरने जैसी हो गई है।
दूसरी तरफ, पुलिस ने छात्रा को सफदरजंग अस्पताल पहुंचाने वाले पीसीआर कर्मियों को भी गवाह बनाया है। ये ही वही पुलिसकर्मी हैं जिन्होंने छात्रा को पहली बार घायलावस्था में देखा था। ऐसे में इनकी गवाही भी अहम मानी जा रही है।
कड़ी सजा से बच सकता है नाबालिग आरोपी
दिल्ली गैंगरेप मामले में गुरुवार को चार्जशीट पेश की जा सकती है। दिल्ली पुलिस ने मामले में चार्जशीट तैयार करने में कड़ी मशक्कत की है। संभावना है कि गैंगरेप के सभी आरोपियों को फांसी दिए जाने की मांग कर सकती है।
हालांकि गैंगरेप में शामिल नाबालिग अरोपी को लेकर संशय की स्थिति है। बताया जा रहा है कि नाबालिग होने की आड़ में वह सख्त सजा से बच सकता है।
जबकि पुलिस के सूत्रों का कहना है कि ये आरोपी पीड़िता के बलात्कार और टॉर्चर में सबसे आगे था फिर भी उसे सिर्फ 2 साल के लिए बाल सुधार गृह में रहने की सजा मिल सकती है।
आरोपी का दावा है कि उसकी उम्र है 17 साल 9 महीना है। वो 18 साल से कम है और बलात्कार या कत्ल के मामलों में किसी नाबालिग को अधिकतम 3 साल की सजा हो सकती है।
अगर उसकी उम्र 17 साल से अधिक और 18 से कम है तो उसे अधिकतम 2 साल तक बाल सुधार गृह भेजा जा सकता है। नाबालिग को वैसे भी जेल नहीं भेजा जा सकता।
वहीं, पीड़ित के पिता ने गैंगरेप के अपराध में बालिग और नाबालिग का भेद मिटाने की अपील की। उन्होंने कहा कि बलात्कारी सिर्फ बलात्कारी है और उसे सख्त सजा दी जानी चाहिए।