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व्यापम घोटाले का आरोपी डॉक्टर गिरफ्तार

Sat, 30 Aug 2014 11:20 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, इलाहाबाद
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मध्य प्रदेश के चर्चित व्यवसायिक परीक्षा मंडल (व्यापम) की मेडिकल प्रवेश परीक्षा के घोटाले के आरोपी डॉ. ज्ञानेंद्र को शुक्रवार की रात नैनी एडीए कालोनी में धर दबोचा गया। चार लाख रुपये में सॉल्वर उपलब्ध करा कई अयोग्य अभ्यर्थियों का चयन कराने के आरोपी ज्ञानेंद्र पर एमपी के ग्वालियर जोन के आईजी ने 15 हजार रुपये का इनाम घोषित कर रखा था। उसे एमपी एसटीएफ, एसआईटी ने मुट्ठीगंज थाने की पुलिस और क्राइम ब्रांच के सहयोग से पकड़ा। ट्रांजिट रिमांड बनवाकर उसे शनिवार को ही एमपी पुलिस साथ ले गई।
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खुद को सरकारी डॉक्टर बताने वाले ज्ञानेंद्र ने ग्वालियर से 2006 में एमबीबीएस की डिग्री हासिल की थी और कुछ समय वहीं प्रैक्टिस की। पुलिस के मुताबिक यूपी में चयन होने के बाद से वह साल भर से मिर्जापुर में तैनात था। इस मामले में एमपी के पूर्व शिक्षा मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा, पूर्व डीआईजी शिवहरे, सीएसपी यशपाल सिंह यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है। घोटाले के मास्टर माइंड दो डॉक्टर दीपक यादव और जगदीश की भी गिरफ्तारी हो चुकी है। ज्ञानेंद्र हाथ नहीं आया था। इसलिए उस पर इनाम घोषित किया गया था।

एसएसपी दीपक कुमार ने शनिवार को प्रेस के सामने ज्ञानेंद्र को पेश किया। उसे पकड़ने वाली टीम के इंस्पेक्टर मनोज रघुवंशी, एसआई अजय सिंह, चौकी प्रभारी गऊघाट संतोष तिवारी और एसआईटी के एसआई समीर पाटीदार को पांच हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है। एसएसपी के मुताबिक इनाम घोषित होने के बाद वह मिर्जापुर से भाग आया था। वह नैनी के एडीए कालोनी के समीप स्थित अक्षयवट अस्पताल के समीप रहता था।
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एक और साथी की भी तलाश
एमपी पुलिस की जांच में सामने आया है कि ज्ञानेंद्र के एक और साथी की भी व्यापम में पैठ थी। दोनों यूपी से सॉल्वर का प्रबंध करते थे। उसके  साथी के भी इलाहाबाद में ही छिपे होने की बात पुलिस को पता चली है। उसकी तलाश में दबिश दी गई लेकिन वह हाथ नहीं आया।

छह लोग पहले भी पकड़े जा चुके हैं
व्यापम घोटाले के तार इलाहाबाद से जुड़े रहे हैं। मोती लाल नेहरू मेडिकल कॉलेज के तीन छात्रों को एमपी एसटीएफ ने अप्रैल में पकड़ा था। जून में एसटीएफ ने बघाड़ा से तीन मेडिकल छात्रों को भी पकड़ ले गई थी।
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