महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में अपने सांसदों की उपस्थिति सुनिश्चित कराने के लिए भाजपा नेतृत्व का एक भी दांव सफल नहीं हो रहा है। इसकी ताजा बानगी रविवार को हुई सांसदों की कार्यशाला थी, जिससे 71 सांसद नदारद रहे।
एक सांसद के अनुसार इतनी बड़ी संख्या में सांसदों की अनुपस्थिति का पता तब चला जब खुद संसदीय कार्यमंत्री वेंकैया नायडू ने कार्यक्रम शुरू होने से पहले सांसदों की हाजिरी के लिए एक-एक सांसद का नाम पुकारा।
इतनी बड़ी संख्या में सांसदों की अनुपस्थिति से खिन्न नायडू ने कहा कि ऐसे सांसदों को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी नहीं दी जा सकती।
माना जा रहा है कि मंगलवार की संसदीय दल की बैठक में इन सांसदों को या तो अपनी अनुपस्थिति का कारण बताना होगा, या हमेशा की तरह इन्हें चेतावनी दी जाएगी।
लोकसभा के 60 और राज्यसभा के 11 सांसद शामिल
उल्लेखनीय है कि इससे पहले अनुपस्थित रहने वाले सांसदों को संसदीय दल की बैठक में खड़े हो कर अपनी अनुपस्थिति का कारण बताना पड़ा था।
इससे पहले पीएम नरेंद्र मोदी ने नाराजगी जताते हुए कहा था कि बैठक में देर से आने वाले सांसदों के लिए बैठक स्थल का दरवाजा बंद कर दिया जाएगा। इस कार्यशाला से लोकसभा के 60 तो राज्यसभा के 11 सांसद गायब रहे।
गायब रहने वाले सांसदों में शत्रुघ्न सिन्हा, परेश रावल, हेमा मालिनी, मनोज तिवारी, रमेश बैस, रोशन लाल जांगड़े, रणविजय सिंह, नंद कुमार साय भी शामिल थे।
उल्लेखनीय है कि यह कार्यशाला सोमवार से शुरू हुए बजट सत्र में सांसदों को सरकार की रणनीति समझाने के लिए आयोजित की गई थी। चूंकि यह पहले से तय था कि कार्यशाला को खुद पीएम संबोधित करेंगे, इसलिए सांसदों की अनुपस्थिति को नेतृत्व ने बेहद गंभीरता से लिया है।