आम आदमी पार्टी (आप) की दिल्ली के बाद सबसे मजबूत पंजाब इकाई में बगावती सुर तेज हो गए हैं। पार्टी के पंजाब के तीन सांसदों ने केंद्रीय नेतृत्व से नाराजगी जाहिर की है।
सांसदों का कहना है कि पर्यवेक्षकों की नियुक्ति के बारे में पार्टी आला नेतृत्व ने उन्हें विश्वास में नहीं लिया। दूसरी तरफ पार्टी ने सभी सांसदों से पिछले एक साल के दौरान किये गए कामों पर रिपोर्ट मांगी है।
पटियाला से सांसद धर्मवीर गांधी ने बताया कि मंगलवार को प्रदेश पर्यवेक्षक व वरिष्ठ नेता संजय सिंह को एक एसएमएस मिला। पार्टी संयोजक अरविंद केजरीवाल की तरफ से भेजे गए संदेश में सिंह ने तीन बिंदुओं पर रिपोर्ट मांगी है।
पहला, जनता के हित में संसद में कितने सवाल उठाये। दूसरा, अपने संसदीय क्षेत्र में पार्टी के विस्तार के लिए क्या किया और अपने संसदीय क्षेत्र में कौन से कराए गए। गांधी ने बताया कि पांच दिनों केभीतर रिपोर्ट देनी है। इसके लिए हमारे पास पर्याप्त समय है।
पंजाब के तीन आप सांसदों ने की बैठक
खास बात यह कि पार्टी ने सांसदों की रिपोर्ट तब मांगी है, जब एक दिन पहले सोमवार को तीन सांसदों धर्मवीर गांधी, साधु सिंह व हरिंदर सिंह खालसा ने एक बैठक की।
गांधी के पटियाला स्थित आवास पर बुलाई गई बैठक में सांसदों में पार्टी नेतृत्व के कामकाज से नाराजगी जाहिर की गई थी।
गांधी का कहना है कि पंजाब की 13 संसदीय सीटों पर पर्यवेक्षकों की नियुक्ति बगैर सांसदों को विश्वास में नहीं लिया गया। वहीं, दूसरी सियासी नियुक्तियों में भी मनमानी हुई है। गांधी का सवाल है कि स्वराज की बात करने वाली पार्टी के भीतर स्वराज कहां है।
आप ने मांगा सांसदों से कामकाज का ब्योरा
इससे पहले सोमवार को फतेहगढ़ साहिब के सांसद हरिंदर सिंह खालसा की तरफ से प्रदेश अनुशासनात्मक समिति के मुखिया दलजीत सिंह को भेजे गए मेल में आरोप लगाया है कि प्रदेश पर्यवेक्षक संजय सिंह और संयोजक सुच्चे सिंह पार्टी का बर्बाद कर रहे हैं। दोनों नेता खुद को पार्टी के संविधान और राज्य यूनिट की पूरी तरह उपेक्षा कर रहे हैं।
इस बारे में संजय सिंह का कहना है कि पंजाब के मसलों को प्रभावी तरीके से उठाने के लिए मजबूत संगठन की जरूरत है। इस दिशा में बड़े स्तर पर काम चल रहा है। नौ विधान सभाओं व एक लोक सभा को मिलाकर एक जोन बनाया जाएगा।
इसी संदर्भ से सांसदों से उनके कामों का लेखा-जोखा मांगा गया है। जहां तक किसी की नाराजगी का सवाल है तो मीडिया में बात करने की जगह इसे पार्टी फोरम पर उसे उठाया जा सकता है। पार्टी उनको संतुष्ट करेगी।