अमर उजाला ने हज करने मक्का गए मोहम्मद शहनवाज से बात की और वहां मची भगदड़ के बारे में जाना। पढ़िए मोहम्मद शहनवाज की जुबानी-
जब मिना में हादसा हुआ तो उस वक्त मैं अपने टेंट में अपना कुछ सामान रखने गया था। हादसे से अंजान सड़कों पर उमड़ा हजयात्रियों हुजूम मिना के ओर पैदल ही कूच कर रहा था। हुजूम में साथी अजीमुद्दीन के साथ मैं भी शामिल था।
तभी अचानक पुलिस ने रूट डायवर्ट कर दिया। आजमीन अभी कुछ समझ पाते कि सड़कों पर सायरन के साथ इधर-उधर एंबुलेंस दौड़ने लगी। तब जाकर हादसे की जानकारी हो सकी। पूरा माहौल अफरातफरी जैसा था।
मुजदल्फा के मैदान में रात गुजारने के बाद अब मिना में शैतान को कंकड़ मारने की बारी थी। इसके लिए मैंने साथी अजीमुद्दीन के साथ बाद नमाज-ए-फज्र मुजदल्फा छोड़ दिया। पहले मेट्रो से जाने का इरादा था। लेकिन भीड़ देखकर जाने की हिम्मत नहीं जुटा पाया। हालांकि पैदल जाने वालों की तादात मेट्रो से भी अधिक थी।
सड़कों पर आजीमनों का हुजूम था। हर तरफ हजयात्री नजर आ रहे थे। आजमीन जोशखरोश के साथ आगे बढ़ रहे थे कि अचानक पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया। रास्ता बदलकर आजीमन रवाना किए जाने लगे। कुछ समझ में नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है। इस बीच इधर से उधर एंबुलेंस दौड़ने लगी। मन किसी अनहोनी की आशंका होने लगी। कुछ ही पल में मिना में भगदड़ की जानकारी हो गई।