बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव, भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह, झारखंड के मुख्यमंत्री, भाजपा के सांसद वरुण गांधी, कांग्रेसी नेता मोहम्मद अजहरुद्दीन और दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल तेजिंदर खन्ना।
इतने बड़े-बड़े नाम और सभी एक शख्स की वजह से हैरान-परेशान। यह शख्स ज्यादातर खुद को हाई कोर्ट का जज बताता था। लेकिन कभी-कभी ऐसा भी हुआ कि इसने नेता या नौकरशाह बनकर इन सभी से कोई न कोई मदद मांगी हो।
लेकिन मनोज कुमार झा की किस्मत इस हफ्ते की शुरुआत तक ही चल सकी, जब उसे दिल्ली पुलिस ने वजीरपुर से गिरफ्तार किया गया।
34 वर्षीय यह नकलची बिहार के मधुबनी जिले का रहने वाला है, लेकिन इसकी स्कूलिंग और कॉलेज की शिक्षा झारखंड के बोकारो में हुई।
करीब पांच महीने पहले झा ने जस्टिस नरेंद्र नाथ तिवारी बनकर लालू को फोन किया। उसने उन्हें मधुबनी के एसपी को हत्या की कोशिश के एक मामले में अपने जानकार की मदद करने को कहा। यह व्यक्ति कोई और नहीं, बल्कि खुद झा था।
इसी काम के लिए उन्होंने जस्टिस एमएस तिवारी बनकर झारखंड के मुख्यमंत्री को कॉल की और उन्हें बिहार के सीएम नीतीश कुमार को फोन कर यह मामला सेटल करने के लिए कहा।
कम से कम एक बार वह कामयाब रहा। जस्टिस मिश्रा बनकर झा ने दरभंगा के कमिश्नर (आईएएस अधिकारी) को कॉल किया और मधुबनी के एसएचओ का ट्रांसफर करवा दिया।