स्थानीय ट्रायल कोर्ट ने शुक्रवार को 2002 में हुए गुजरात दंगों में 68 अरोपियों को सबूतों के अभाव में बरी कर दिया। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीके पुजारा ने कहा कि गवाहों के बयानों का सबूतों से मिलान नहीं हो पा रहा है। अदालत में 190 गवाह अपने बयान से पलट गए थे।
बनासकांठा जिले के देवदर तहसील के सेशन गांव में 2 बच्चों समेत 14 लोग मारे गए थे। मामले में 2012 में आरोपपत्र दाखिल किए थे जबकि 12 पूरक आरोपपत्र बाद में दाखिल किए गए। अभियोजन पक्ष ने अदालत में कहा कि चश्मदीद गवाहों ने 14 लोगों की मौत में आरोपियों को शामिल होते देखा है। लेकिन बचाव पक्ष ने कहा कि गवाह पहचान परेड के दौरान अभियुक्त की पहचान नहीं कर सका था।
पुलिस के अनुसार 5000 लोगों की भीड़ ने तलवारों और डंडों के साथ 2 मार्च 2002 को गांव पर हमला किया था। गांव में बलोच मुसलिम समुदाय के करीब 200 लोग रहते थे। भीड़ ने दो लड़कियों समेत 14 लोगों को मार दिया था। पुलिस फायरिंग में भीड़ में शामिल दो लोग भी मारे गए थे।