टूजी मामले की जांच कर रही संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) ने अपनी जांच रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और वित्त मंत्री पी चिदंबरम को क्लीन चिट दे दी है, जबकि पूर्व दूरसंचार मंत्री ए राजा को दोषी करार दिया है।
लंबे समय से विवाद में रही जांच रिपोर्ट को बहुमत से पारित किया गया। रिपोर्ट के पक्ष में 16 और विपक्ष में 11 वोट पड़े।
रिपोर्ट में प्रधानमंत्री और वित्त मंत्री को क्लीन चिट देने के साथ ही सरकारी खजाने को 1.76 लाख करोड़ रुपए की चपत लगने संबंधी सीएजी के आंकड़े पर भी उंगली उठाई गई है।
भाजपा, लेफ्ट समेत विपक्षी दल अब रिपोर्ट में अपना लिखित में ऐतराज दर्ज कराएंगे। भाजपा व डीएमके समेत विपक्षी दल ए राजा को अपना पक्ष रखने का मौका देने के लिए समिति के सामने गवाही के लिए बुलाने की मांग करते रहे हैं।
अब रिपोर्ट अक्तूबर में लोकसभा स्पीकर को सौंप दी जाएगी। खास बात यह है कि टूजी मामले की जेपीसी जांच कराने के लिए संसद के एक मानसून सत्र को हंगामे की भेंट चढ़ाने वाली भाजपा संख्या बल के मामले में कमजोर पड़ गई।
जांच रिपोर्ट के खिलाफ रही जदयू भी मतदान से गैरहाजिर रही। दूसरी ओर सरकार ने समिति में राज्यसभा से दो सदस्य भेजकर संख्या बल पहले ही अपने पक्ष में कर लिया था।
सरकार सपा और बसपा को साथ लेने में सफल रही। सरकार ने अपने पक्ष में आंकड़े जुटाने के बाद ही जेपीसी की बैठक बुलाई।
बहरहाल, 30 सदस्यों वाली जेपीसी की शुक्रवार की बैठक में सपा और बसपा ने सरकार का समर्थन किया ,जबकि जदयू के दो सदस्यों ने गैरहाजिर रहकर सरकार की मदद की।
जबकि ये तीनों ही दल टूजी घोटाले को लेकर सरकार पर आरोप लगाती रही हैं। एनसीपी भी सरकार के साथ थी। दूसरी ओर भाजपा, माकपा, भाकपा, बीजेडी, डीएमके व अन्नाद्रमुक ने रिपोर्ट के खिलाफ वोट दिया।