पश्चिम के सिनेमा में भारतीय चेहरे के रूप में खुद को स्थापित करने वाली तनिष्ठा चटर्जी बॉलीवुड फिल्मों में समय-समय पर नजर आती हैं। इस सप्ताह वह फिल्म चौरंगा में एक बेपरवाह रंगीन मिजाज दलित महिला के रोल में दिखेंगी। इस फिल्म समेत सेंसर और सिनेमा से जुड़े विषयों पर तनिष्ठा चटर्जी से बातचीत की रवि बुले ने।
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-सेंसर बोर्ड से इन दिनों बहुत लोग नाराज है। आप भी नाराज हैं कि एंग्री इंडियन गॉडेसेस में आपके कई दृश्यों पर कैंची चली थी। चौरंगा के भी कुछेक सीन के साथ यही हुआ!
- नाराजगी नहीं बल्कि मेरा तर्क है कि जब देश हर दिशा में तरक्की कर रहा है तो सेंसर भी अपनी सोच को तरक्कीपसंद बनाए। सरकार से, सेंसर बोर्ड से मेरा केवल निवेदन है कि तरक्की की सोच खुली रहने दें। रचनात्मक चीजों में काट-छांट, प्रतिबंध ठीक नहीं। उदार लोकतंत्र में जब हम हर धर्म, हर भाषा को साथ लेकर चलते हैं, वहां यह सोच कर सेंसर करना कि किसी खास व्यक्ति या वर्ग को बुरा लग जाएगा, इससे फिल्म को नुकसान होता है। सेंसर करना आपका काम नहीं है, आपको केवल प्रमाणपत्र देना है।
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फिर सीन करने का क्या मतलब?
-आपने यह भी कहा कि सेंसर के रवैये के कारण आप ऐसे सीन नहीं करेंगी जिन पर कैंची चल जाए! - मैंने कहा है कि अब मैं स्क्रिप्ट में ही यह देखूंगी कि क्या कटने वाला है, अतः उसे शूट नहीं करूंगी। अगर शूट होकर भी सीन फिल्म में नहीं रहे तो किरदार लड़खड़ा जाता है। फिर सीन करने का क्या मतलब?
-एंग्री इंडियन गॉडेसेस में तो आप मेहमान कलाकार जैसी भी नहीं रह गईं! - अब मैं क्या कर सकती हूं? लेकिन शुक्र है कि चौरंगा में ऐसा नहीं हुआ। इसमें थोड़ा ही किरदार कटा है।
-चौरंगा में आपके किरदार की खूबियां क्या है? - यहां धनिया बहुत सशक्तिशाली महिला है। वह ज्यादा कुछ सोचती नहीं, जिंदगी को हर दिन एक-एक करके जीती है। उसे सपनों और खयालों से कुछ लेना-देना नहीं। उसे अपने बेटों से प्यार है। उन्हें पढ़ाना-बढ़ाना चाहती है। लेकिन वह मां होने के साथ रंगीन मिजाज औरत भी है और गांव के जमींदार के साथ उसके संबंध हैं। परंतु वह दुष्चरित्र नहीं है क्योंकि वह बाकि किसी को छूट नहीं लेने देती। उसके किरदार में आप काफी लेयर्स देखेंगे।
'मैं ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स करती रही हूं'
-अक्सर आप नॉन ग्लैमरस किरदारों में दिखी हैं। चौरंगा में दलित रूप में हैं। इंडस्ट्री के लेखकों के लिए ग्लैमर की परिभाषा अलग है। क्या आपको लगता है कि आप उसमें मिस फिट हैं? - मैंने हमेशा अलग-अलग रोल चुने हैं। ग्रेट इंडियन सर्कस और चौरंगा मैंने की तो पार्च्ड में भी अलग रोल किया। एंग्री इंडियन गॉडेसेस का किरदार सोशल एक्टिविस्ट का था। गौर हरी दास्तान में मैं जर्नलिस्ट थी। आईलवएनवाई में अमेरिका में बसी लड़की का रोल किया। बॉम्बे समर के लिए मुझे न्यूयॉर्फ फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट एक्ट्रेस का अवार्ड मिला, उसमें मैं शहरी-कारपोरेट दुनिया की लड़की हूं।
-कॉमर्शियल बॉलीवुड फिल्मों में आप कम दिखी हैं। क्यों? - मैं ज्यादातर अंतरराष्ट्रीय प्रोजेक्ट्स करती रही हूं। अतः बॉलीवुड में ज्यादा काम नहीं कर सकी और कोई बड़ा ढंग का ऑफर भी मुझे मिला नहीं। कई डायरेक्टर हैं जिनके साथ काम करना चाहूंगी। अनुराग कश्यप, संजय लीला भंसाली, राजू हिरानी, विशाल भारद्वाज, दिबाकर बनर्जी, शुजित सरकार।
-आप इन्हें एप्रोच करेंगी या इंतजार? -मैं एप्रोच नहीं कर पाती। यही मेरी कमजोरी है। ये सब मुझे जानते हैं। मेरा काम देखा है। तारीफ भी करते हैं। मुझे लगता है कि जब मेरे लायक रोल होगा तो वे बुला लेंगे।
-क्रिकेटर ब्रेट ली के साथ आपकी अन-इंडियन (2015) ऑस्ट्रेलिया-न्यूजीलैंड में रिलीज हुई। कैसी प्रतिक्रियाएं मिली और ली के साथ कैसा अनुभव रहा? - फिल्म को ऑस्ट्रेलिया में काफी सराहना मिली। ली शानदान इंसान हैं और बहुत नेचुरल हैं। यह स्क्रीन पर दिख जाता है। उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। फिल्म भी अच्छी बनी है। अब यह यूके-फ्रांस में रिलीज होगी। फिर अमेरिका-कनाडा में। इसमें मुझे बहुत ही स्ट्रांग और ग्लैमरस रोल मिला है।
-नए बरस में आपकी और कौन सी फिल्में आएंगी? - पार्च्ड और आईलैंड सिटी ये दो हिंदी फिल्में हैं। आईलैंड सिटी को वेनिस फिल्म फेस्टिवल में बेस्ट डेब्यू डायरेक्टर (रुचिका ओबेराय) अवार्ड मिला है। एक बड़ी हॉलीवुड फिल्म है, लायन। इसमें निकोल किडमैन हैं।