आपको याद होगा, कुछ दशक पहले एक फिल्म बनी थी `गरम हवा’। बलराज साहनी की उसमें मुख्य भूमिका थी। जहां कहीं फिल्म का प्रदर्शन हुआ वह फिल्म खूब सराही गई।
उत्तर प्रदेश फिल्म पत्रकार संघ ने भी उसे पुरस्कृत किया, मात्र फिल्म को ही नहीं, बल्कि उसकी अहम किरदार बदर बेगम को भी। बदर बेगम व्यावसायिक अभिनेत्री नहीं थीं। उन्होंने मात्र शौकिया उसमें अभिनय किया था।
बेगम चूंकि जानी-मानी ऐक्ट्रेस नहीं थीं, इससे उनको खोज निकालना मुश्किल था। निर्माताओं से सिर्फ इतनी जानकारी मिली कि वह आगरा के बालूगंज मुहल्ले में रहती हैं। चिट्ठी-पत्री के माध्यम से उनको पाना असंभव ही था, इससे उनको ढूंढ़ने का काम सौंपना पड़ा आगरा स्थित अपने एक पत्रकार बंधु शिवकुमार सुमन को।
घंटों की अनवरत मेहनत के बाद उनको कामयाबी मिल ही गई। हमारी ओर से एक औपचारिक आमंत्रण पत्र बेगम को दे दिया गया और वह समारोह में शामिल होने के लिए तैयार हो गईं।
वह समय पर वह लखनऊ आ भी गई थीं लेकिन किन्हीं कारणों से समारोह-स्थल पर पहुंचने में उन्हें कुछ विलंब हो गया। दर्शक जब प्रेक्षागृह से निकल रहे थे, तब उनका आगमन हुआ। समारोह में पुरस्कार-विजेता अमिताभ बच्चन भी थे।
बदर बेगम को देखते ही वह मुझसे कह बैठे थे "अरे इनको तो शायद मैं `गरम हवा’ में देख चुका हूं। वही है न यह?" और मेरे हामी भरते ही वह पहुंच गए थे उनके पास।
हाथ जोड़ते हुए बोले "यह मेरी खुशकिस्मती है जो आपका न्याज़ हासिल करने का मौका मुझे मिल रहा है। क्या गजब की एक्टिंग की थी आपने `गरम हवा’ में!’
बदर बेगम मुझसे पूछती ही रह गई थीं, `कौन है यह खूबसूरत नौजवान जो इतने अपनेपन के साथ मुझसे बातचीत कर रहा था?’ मैं क्या बताता कि वह अमिताभ थे।