फिल्म तलवार में अपने असरदार अभिनय के लिए वाहवाही बटोर रहे अभिनेता सोहम शाह अपनी अगली फिल्म के लिए कहानी ढूंढ़ रहे हैं। उन्हें विश्वास है कि आम लोगों के पास बॉलीवुड के स्थापित लेखकों से बेहतर कहानियां हैं। उनका मानना है कि यह फिल्म इडस्ट्री में बाहरी लोगों की भागीदारी बढ़ाने की आवश्यकता है। वह बताते हैं कि बाहरी होने के चलते बीते आठ सालों में उन्हें बहुत पापड़ बेलने पड़े हैं। पेश है उनसे बातचीत के प्रमुख अंश...
-आपकी पहली फिल्म बाबर छह साल पहले आई थी, तब से अब तक बस तीन फिल्में ही क्यों?
-बॉलीवुड इंडस्ट्री में बाहरी लोगों को बहुत पापड़ बेलने पड़ते हैं, मुझे बेलने पड़े। ऊपर से जब आपकी पहली ही फिल्म फ्लॉप हो जाए तो दरवाजे बंद हो जाते हैं। लेकिन मैंने हार नहीं मानी। बाबर की गलतियों से सीखा और संघर्ष जारी रखा। उसी दौरान मेरी मुलाकात आनंद गांधी से हुई। उन्होंने मुझे शिप ऑफ थिसियस की कहानी सुनाई। यह फिल्म बहुत कामयाब हुई। इसी की वजह से तलवार मिली।
-तलवार आपको कैसे मिली? आप खुद काम मांगने गए थे या फिल्म मेकर आपके पास आए थे?
-तलवार के कास्टिंग डायरेक्टर हनी त्रेहान को शिप ऑफ थिसियस में मेरा काम अच्छा लगा था। उन्होंने दो साल पहले एक अन्य फिल्म के लिए मेरा ऑडिशन लिया था। लेकिन कुछ कारणों से वह फिल्म मुझे नहीं मिली। तलवार के लिए हनी ने ही मुझसे संपर्क किया। मेघना गुलजार, विशाल भारद्वाज, इरफान खान सबने मेरी शिप ऑफ थिसियस देखी थी। इसलिए मेरा कोई ऑडिशन भी नहीं हुआ।
-तलवार में आपके काम की सराहना हो रही है। अब आपके मौका है कि मुख्य धारा की फिल्में करने का। ऐसे में नये लोगों की कहानी क्यों ढूंढ़ रहे हैं?
-मैं सब तरह की फिल्मों के लिए तैयार हूं। मौका मिलने पर मुख्य धारा की फिल्में जरूर करना चाहूंगा। लेकिन मुझे लगता है अब फिल्मों में स्टार व अन्य चीजों का महत्व कम होता जा रहा है, कहानी प्रधान होती जा रही है। और असली कहानी लोगों के बीच छुपी है। मुझे असल जिंदगियों से जुड़ी कहानियां आकर्षित करती हैं। फिर इंडस्ट्री में नये लोगों की भागीदारी बहुत जरूरी है।
-आप कैसी कहानी ढूंढ़ रहे हैं, आपका अभियान क्या है?
-हम जादू ढूंढ़ रहे हैं। जिसे पढ़ने-सुनने-देखने के बाद जादू का अहसास हो। इसके लिए हमने एक ऑनलाइन अभियान शुरू किया है, 'द रिसाइकिलवाला स्टोरी सर्च 2015'। यह 15 अक्तूबर से शुरू हो गया है। इसके तहत हम देशभर के आम लेखकों से उनकी कहानी मांग रहे हैं। कहानी छोटी-बड़ी, दस पृष्ठ या एक पृष्ठ की भी हो सकती है। 15 नवंबर तक प्राप्त हुई कहानियों को हमारी लेखक ज्यूरी जांचेगी। उसमें जितनी कहानियां हमें पसंद आएंगी, उनके लेखकों के साथ मिलकर हम उन फिल्म की स्क्रिप्ट विकसित करेंगे। इसके पूरे खर्च का निर्वहन हमारी कंपनी करेगी और कहानी लेखक को हम फिल्म में क्रेडिट देंगे। कहानियां हमें भेजने के लिए लेखकों को द रिसाइकिलवाला के फेसबुक पेज और हमारी वेबसाइट द रिसाइकिलवालाफिल्म डॉट कॉम से जुड़ना होगा।
-इस तरह अभियान में हमेशा आइडिया चोरी होने का डर रहता है, लोग आइडिया देने से कतराते हैं। अभी तक आपको कितनी कहानियां मिलीं?
-हमने अपनी नियम-शर्तों में सबकुछ साफ कर दिया है। हमारी लेखक ज्यूरी जिन कहानियों को चुनेगी हम बस उन्हीं पर काम करेंगे। बाकी लोग अपनी कहानियों को अन्य जहगों पर लेजाने के लिए स्वतंत्र हैं। फिलहाल हमें बड़ी संख्या में कहानियां मिल रही हैं। हम दिल्ली-मुंबई कई कॉलेजों में भी गए। छात्रों के पास काफी शानदार कहानियां हैं। इसको लेकर छात्र काफी उत्साह दिखा रहे हैं।
-आपके कैरियर का फोकस क्या है? आप अभिनय भी करना चाहते हैं, प्रोडक्शन भी करना चाहते हैं।
मैं तो बस अभिनय करना चाहता हूं। प्रोडक्शन में मैं बस इसलिए आया क्योंकि लोग अच्छी कहानियों पर पैसे लगाने को तैयार नहीं थे। आज बॉलीवुड में टिके रहने के लिए बहुत जरूरी है, आपके पास पैसा हो। इसलिए प्रोडक्शन से पहले मैंने रियल स्टेट समेत कई तरह के व्यवसाय किए। लेकिन मेरा पूरा फोकस अभिनय पर है।