सिलेमुख बैंड ने एक ऑडियो गाने के जरिए स्त्री व लड़कियों की वेदना को उभारा है। गाने में बोल और संगीत दोनों ही मार्मिक हैं। इसे लिखा और गाया आशुतोष प्रकाश सिंह ने, संगीत और प्रमुख गिटार वादक आदित्य डांगी हैं। वेंकट कार्तिक और प्रतीक सती ने भी गाने में प्रमुख भूमिका निभाई है।
इस गाने में दिखता है कि कैसे पिछले कुछ दशकों से समाज में महिलाओं की उपेक्षा की जा रही है। लेकिन समाज इसे विधि का विधान समझकर अपना यह रवैया जारी रखे हुए है। इसीलिए सिलेमुख ने इस गाने को अर्जुन समेत पांचों पांडवों की पत्नी द्रौपदी से जोड़ा है। जिन्हें पांडवों के जुआ हारने पर भरे समाज में बेइज्जत होने पर मजबूर किया जाता है।
गाने में जिक्र भले ही द्रौपदी और कान्हा का किया गया है लेकिन इसे आज के वक्त से भी जोड़ कर देखा जा सकता है। जिस तरह कान्हा द्रौपदी के चीर हरण को रोकने पहुंचते हैं, वैसे ही आज के समय में भी जरूरत है कि लोग महिलाओं के प्रति हो रहे अन्याय को रोकने आग आएं, गाना यही बताता है।
लेकिन गाने में आज की द्रौपदी को मजबूत बताया गया है। इसे देश की सभी महिलाओं और लड़कियों को समर्पित किया है। सिलेमुख बैंड को आशुतोष प्रकाश सिंह ने 2011 में शुरू किया था। इसके बाद लोग उनसे जुड़ते गए। बैंड अब तक चार गाने, 'रामायण', 'पाप की मुक्ति', 'सूरदास' और 'वीर द्रौपदी' बना चुका है। इससे पहले बैंड का गाना रामायण खूब पसंद किया गया था।
यहां सुनिए पूरा गाना