शंघाई के बाद हालिया रिलीज चक्रव्यूह में अपने अभिनय के लिए जमकर तारीफें बटोर रहे अभय देओल के लिए समीक्षकों से ज्यादा दर्शकों की पसंद नापसंद ज्यादा मायने रखती है। अभय मानते हैं कि कई बदलावों के बाद भी नाचना-गाना और रोमांस ही हिंदी फिल्मों की मेनस्ट्रीम है। अभय देओल से हुई बातचीत के प्रमुख अंश...
आपकी हालिया रिलीज फिल्म चक्रव्यूह की तारीफ फिल्म क्रिटिक्स जमकर कर रहे हैं
अभयः मैं क्रिटिक्स द्वारा दिए गए स्टार्स पर विश्वास नहीं करता हूं। मुङो ऑडियंस की तारीफ चाहिए क्योंकि मैं अभिनय दर्शकों के लिए करता हूं। वैसे दर्शकों का अब तक जो भी रिस्पांस आया है, मैं उससे खुश हूं। आकंडों के बारे में तो बाद में पता चलता रहेगा।
क्या वजह रही थी जो आप इस फिल्म से जुड़े
अभयः मैंने अखबार और टीवी चैनल पर नक्सलवाद के बारे में काफी कुछ देख सुन लिया था। मेरे भीतर एक जबर्दस्त जिज्ञासा आ गयी थी जिसने मुङो इस फिल्म से तुरंत जुड़ने के लिए मजबूर किर दिया।
इसके साथ ही अपने फिल्म कैरियर में भी मैंने इस बात का पूरा ध्यान रखा कि मैं ऐसी फिल्मों का हिस्सा बनूं जो समाज को एक मैसेज दे सकें। मुझे लगता है कि हर इंसान को अपना यह कर्तव्य समझना चाहिए। अपने काम के जरिए उसे समाज को एक अच्छा संदेश देना चाहिए।
क्या आपको लगता है कि इस फिल्म में नक्सलवाद की सच्ची तस्वीर पेश की गयी है
अभयः नक्सलवाद के बारे में एक सच नहीं है। हर पक्ष का अपना एक अलग सत्य है। देश की सुरक्षाबल का अलग सच है तो नक्सल का अलग सच है और फिल्म में इन दोनों सचों को दिखाने का प्रयास किया गया है। जहां तक सोच की बात है तो फिल्म की शूटिंग के दौरान मैंने पाया कि कोई भी चीज पूरी तरह से सही या गलत नहीं होती है।
इस फिल्म में आप पहली बार एक्शन करते नजर आएं हैं, शूटिंग के लिहाज से कितना मुश्किल रहा।
अभयः सच कहूं तो इस फिल्म की शूटिंग मेरे लिए बहुत ही आसान साबित हुई है क्योंकि पहली बार मेरी फिल्म के निर्माता निर्देशक ने मुङो फिल्म के शूटिंग के दौरान यह आकर नहीं कहा कि और दो दिन की शूटिंग के पैसे बचे हैं या ये नहीं कहा कि निर्माता ने अब और ज्यादा पैसे लगाने से इंकार कर रहा है।
मेरे लिए इस फिल्म की शूटिंग बहुत ही आसान रही हैं हां शारीरिक तौर पर जरूर थका देने वाला था क्योंकि इस फिल्म में मैं ट्रक से छलांग लगाते हुए, सायकलिंग करते, गोली चलाते नजर आया हूं लेकिन मैंने इन सबको बहुत इंज्वॉय किया इसलिए यह सब करते हुए मुङो परेशानी नहीं हुई।
आप डांस से भी खुद को दूर ही रखते हैं लेकिन इस फिल्म में आप जमकर नाचते नजर आ रहे है
अभयः सच कहूं तो मेनस्ट्रीम सिनेमा की डिमांड नाच गाना और रोमांस है। अगर मैं ऐसी किसी फिल्म को हां करता हूं तो मुङो नाच गाना करने के लिए भी तैयार रहना होगा। वैसे अजरुन के साथ जिस नाच गाने की बात आप कर रही हैं। उसके लिए मैंने दस दिन का टाइम लिया। खूब प्रैक्टिस की उसके बाद ही उस गाने की शूटिंग हुई।
आपको क्या लगता है आपकी कौन सी यूएसपी थी जिसे निर्देशक और दर्शकों ने नोटिस किया।
अभयः अलग तरह की फिल्मों से मेरा जुड़ना। मैंने अलग राह चुनी क्योंकि मैं इस बात को अच्छी तरह से जानता था कि लोग मेरे काम को तभी पसंद करेंगे अगर वह अलग होगा। मैं ऐसे लोगों को अपने प्रशंसक वर्ग में जोड़ना चाहता था। जिनकी अपनी सोच होती है क्योंकि ऐसे लोग अगर आप से एक बार जुड़ जाते हैं तो लंबे समय तक आपके साथ रहते हैं। इसके साथ ही मैंने सही समय पर खुद को कमर्शियल सिनेमा से भी जोड़ लिया तभी मैं टिका हुआ हूं।
आपकी आनेवाली फिल्में कौन कौन सी है, इनमें आपका रोल कैसा है
अभयः रॉक द शादी और रांझा मेरी आनेवाली फिल्में हैं। मैं जिस तरह के किरदार कर रहा हूं। मैं उनसे खुश हूं और लोग मेरे पास वैसे किरदार लेकर भी आ रहे हैं लेकि एक के बाद एक सीरियस किरदार करने के बाद अब मैं बोर हो गया हूं। मैं अब रोमांटिक फिल्म करना चाहता हूं।