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क्या नाम है गांधी की आत्मकथा काः रणबीर

Sat, 05 Oct 2013 03:37 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई
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रणबीर कपूर गांधी जी के बारे में कुछ अलग राय ही रखते हैं। उन्होंने यह कह कर सनसनी फैला दी थी कि गांधीजी जिस ढंग से सिर्फ अपने दिल की सुनते और करते थे, उसे फिल्मी परिभाषा में ‘बेशरमी’ ही कहा जा सकता है।
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आप आत्मकथाएं पढ़ने के शौकीन हैं। क्या आपने गांधीजी की आत्मकथा पढ़ी है?

नहीं, मैंने गांधीजी की आत्मकथा नहीं पढ़ी है। उनके बारे में तो हम बचपन से ही बातें सुनते और सीखते आ रहे हैं। हमें उनके सिद्धांत और मूल्य पता हैं। हमें मालूम है कि कैसे उन्होंने अपनी जिंदगी जी थी। वैसे क्या नाम है गांधीजी की आत्मकथा का...?

सत्य के प्रयोग (माई एक्सपेरिमेंट्स विद ट्रुथ)।

ठीक हैं मैं खरीद कर पढ़ूंगा...।

इन दिनों अभिनेता जिस तरह से फिल्मों का धुआंधार प्रचार करते हैं, क्या आपको लगता है कि उससे उन्हें फायदा होता है?

सच तो यह है कि हम सब ऐक्टर अंदर से बहुत इनसिक्योर (असुरक्षित) हो गए हैं। हमें लगता है कि शाहरुख खान यह कर रहा है तो हमें भी करना पड़ता है। फिल्म आती है तो हम जगह-जगह जाकर खुद को बेचते हैं। प्रोड्यूसर कहता है कि अगर नहीं जाओगे तो कोई फिल्म देखने नहीं आएगा।
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ईमादारी से कहूं तो मैं इतना बड़ा स्टार बनना चाहता हूं कि मुझे यह सब करना ही न पड़े। ऐक्टर एक-दूसरे की देखा देखी एक महीने फिल्म का इतना प्रचार करते हैं कि लगता है हमारी चार फिल्में आ रही हैं।

फिल्मी दुनिया का माहौल देख कर लगता है कि सभी को सिर्फ अपनी चिंता है?

सच है। पूरी दुनिया स्वार्थी हो गई है। प्रतिस्पर्द्धा बढ़ गई है। कोई किसी के लिए अपना समर्थन नहीं दिखाता है। सिर्फ फिल्मी दुनिया में ही ऐसा नहीं है। आप राजनीति या समाज में देखें, पूरी नई जनरेशन ऐसी ही है। बहुत सेल्फिश है। वह केवल इतना देखती है कि हम कैसे जी रहे हैं। हमारा किसी काम से क्या भला होगा। अब यह जिंदगी है, प्रकृति है। इसे कोई बदल नहीं सकता।

आपका काम और पर्सनल लाइफ दोनों ही चर्चा में हैं।

देखिए ‘बेशरम’ को लेकर मैं उत्साहित और नर्वस दोनों हूं। जहां तक मेरी पर्सनल लाइफ का सवाल है तो लोग पूछते हैं और मैं कहता हूं कि इसके बारे में मैं बात नहीं करना चाहता।

मैं तो इतना चाहता हूं कि लोग मेरी फिल्म देखें और उनके बारे में बात करें। पर्सनल सवाल परेशान करते हैं। ऐसा लगता है कि जिंदगी एक रियलिटी शो बन गई है। अब जितना बन पड़ता है, पर्सनल लाइफ को मैं प्रोटेक्ट करता हूं।

‘बेशरम’ टाइटल की काफी चर्चा है। फिल्म के प्रोमो में भी कहीं आप खेत में पेशाब करते दिख रहे हैं, कहीं छाती के बाल की बात कर रहे हैं।

मैंने इससे पहले कभी बहुत लाउड या वल्गर कैरेक्टर प्ले नहीं किए। लेकिन ‘बेशरम’ का कैरेक्टर ऐसा ही है। दिलफेंक है। नाचने-गाने से उसे फुर्सत नहीं है।

लेकिन हम उसे ऐसा ‘बेशरम’ नहीं दिखा रहे हैं कि वह कपड़े उतार कर किसी का अपमान कर रहा है। यहां बेशरम का मतलब है कि वह सुनता सबकी है, करता दिल की है।

अपनी को-स्टार पल्लवी शारदा के बारे में क्या कहेंगे?

यह उनकी मेनस्ट्रीम ऐक्ट्रेस के रूप में पहली फिल्म है। वह ऑस्ट्रेलिया से हैं। ट्रेंड डांसर हैं। उन्होंने बहुत अच्छा काम किया है। उन्हें मौके मिलेंगे तो वह आगे भी अच्छा काम कर सकती हैं।
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