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और अधूरी ही रह गई नूतन की ये ख्वाहिश...

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कहते हैं ‘जहां चाह, वहां राह’, लेकिन किसी-किसी की चाह के लिए राह बनते-बनते रह जाती है। ऐसी ही चाहत थी मशहूर अभिनेत्री नूतन की, जो अधूरी ही रह गई। नूतन दिलीप कुमार के साथ काम करना चाहती थीं। इसके लिए बस एक ऐसे निर्माता की जरूरत थी, जो दिलीप कुमार के साथ नूतन की जोड़ी बना दे।
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ये जरूरत निर्माता अनिल विश्वास ने पूरी कर दी। फिल्म का नाम रखा गया 'शिकवा'। विश्वास 'शिकवा' के साथ-साथ 'शिकस्त' के नाम से एक और फिल्म बना रहे थे, जिसमें हीरोइन ली गईं नूतन की दूर के रिश्ते की बहन नलिनी जयवंत।

खैर, नूतन के लिए दो गीत भी लता की आवाज में रिकॉर्ड हो गए। अब इसे समय का फेर कह लीजिए कि ‘शिकस्त’ तो बनती गई और ‘शिकवा’ अटक गई। नतीजा, ‘शिकवा’ अटकने से नूतन का दिल टूट गया और चाहत पूरी होते होते रह गई।
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फिर एक बार बना मौका

आगे चलकर समय ने फिर पलटी मारी। के.आसिफ ‘अनारकली’ फिल्म बना रहे थे, जिसके लिए उन्होंने नूतन का नाम पहले ही फाइनल कर रखा था। आसिफ साहब ने ‘अनारकली’ में नूतन के लिए छह गीत भी तैयार करवा लिए। इस फिल्म में बतौर हीरो दिलीप कुमार का नाम तय हुआ, तो लगा कि नूतन की चाहत इस बार पूरी होकर ही रहेगी।

इससे पहले कि फिल्म की शूटिंग शुरू होती नूतन ने अनारकली बनने से मना कर दिया। आसिफ साहब की समझ से परे था यह इनकार। तमाम कोशिशों के बावजूद नूतन नहीं मानीं। मजबूरन के.आसिफ ने मधुबाला को अनारकली का रोल दे दिया, साथ ही फिल्म का नाम बदलकर ‘मुगल-ए-आजम’ कर दिया।

भारतीय सिनेमा के इतिहास का सुनहरा पन्ना! आज की पीढ़ी ही नहीं, उस दौर के दर्शक भी मधुबाला और दिलीप कुमार को ‘मुगल-ए-आजम’ से जुदा करके नहीं देख पाएंगे। फिल्म ही नहीं उसके गाने ‘प्यार किया तो डरना क्या’, ‘मोहब्बत की झूठी कहानी पे रोए’ और ‘मोहे पनघट पे नंदलाल छेड़ गयो रे’ की यादें भी सदाबहार हैं।

अब सोचने वाली बात ये है कि अनारकली के रूप में सबसे पहली पसंद नूतन थीं और वह खुद भी दिलीप कुमार के साथ काम करना चाहती थीं, तो आखिर ऐसा क्या हुआ कि नूतन ने अपने चहेते हीरो की अनारकली बनने से इनकार किया।

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