प्रियंका चोपड़ा के बाद बरेली ने बॉलीवुड को एक और एक्टर दिया है। 17 बरस के पारस अरोड़ा। हाल में बारहवीं की परीक्षा देने वाले पारस जल्द ही फिल्म ‘रज्जो’ में कंगना रनौत के हीरो बने दिखेंगे। इससे पहले ‘वीर शिवाजी’ के किशोर रूप के लिए वे पहचाने जाते थे। उनसे बातचीत के अंश्ा...
बरेली से लेकर बॉलीवुड का सफर अभी तक कैसा रहा?
भगवान के आशीर्वाद से अभी तक सब अच्छा रहा। छोटे-छोटे कदमों से धीरे-धीरे बढ़ रहा हूं। मार्च 2007 में बरेली से मैं मुंबई आया था। वहां मुझे लोग मेरे डांस के कारण जानते थे। यहां पर भी डांस प्रतियोगिताओं में आया।
डैड के साथ। लेकिन मुझे और डैड को यहां एडजस्ट करने में समस्याएं आ रही थीं। हम कभी अकेले नहीं रहे थे। ऐसे में कुछ समय बाद मैं डैड के साथ वापस लौट गया कि बड़ा होने पर आऊंगा।
लेकिन बरेली पहुंचने पर मुझे फिर से मुंबई से कॉल आने लगीं। तब अंततः मैंने यहीं आने और बसने का फैसला लिया। यहां आने पर चाइल्ड आर्टिस्ट के रूप में पहली फिल्म मिली, लेट्स डांस।
फिर मुझे प्रसिद्धी देने वाला टीवी शो मिला, ‘वीर शिवाजी’। अब हीरो के रूप में फिल्म आ रही है, ‘रज्जो’।
रज्जो में आप कैसे आए...?
फिल्म के राइटर-डायरेक्टर विश्वास पाटिल ने मुझे ‘वीर शिवाजी’ में देखा था। मैं उन्हें उनकी कहानी के हिसाब से सही लगा और उन्होंने मुझे बुलाया।
‘रज्जो’ एकदम डिफरेंट है। सेक्स वर्कर की कहानी...! कोई हिचक थी फिल्म के लिए हां कहने में?
हां, कैरेक्टर तो बिल्कुल ही अलग था। इस फिल्म से पहले मैंने जो शो किए थे, वे या तो पौराणिक थे या ऐतिहासिक। किसी किरदार को हटकर देखने का यह मेरे लिए पहला मौका था।
टीवी से बढ़कर मुझे फिल्म में काम करना था, इस बात से मैं उत्साहित था और हर हाल में यह करना चाहता था।
कंगना के साथ काम करने का अनुभव कैसा रहा?
मैं एक्साइटेड भी था और नर्वस भी था। लेकिन उन्होंने कभी मुझे यह एहसास नहीं होने दिया कि मैं उनसे कहीं कम अनुभवी हूं। वह नेशनल अवार्ड विजेता एक्ट्रेस हैं। हर सीन को शूट करने से पहले वह मेरे साथ सीन डिस्कस करती थीं।
कंगना के साथ सबसे मुश्किल सीन कौन सा था?
उनके साथ जो पहला सीन था, वही मेरे लिए सबसे कठिन था। हम पहले कभी मिले नहीं थे और पहले ही सीन में मुझे उन्हें धक्का देना था। मैं बहुत नर्वस हो गया था।
फिल्म में आप कंगना से प्रेम करते हैं, यह भूमिका का एक पक्ष है। वास्तव में आपका रोल क्या है?
फिल्म में मेरा नाम है चंदू। महाराष्ट्रियन ब्राह्मण लड़का हूं, जिसके घर में परंपरावादी संस्कार हैं। पढ़ाई-लिखाई और संगीत का माहौल है। पिता प्रोफेसर हैं और मैं बहुत टेलेंटेड हूं।
अच्छा क्रिकेटर भी हूं। एक दिन क्रिकेट मैच जीतने के बाद दोस्तों के साथ कोठे पर पहुंच जाता हूं। रज्जो मुस्लिम लड़की है। रज्जो को देखते ही मुझे उससे प्यार हो जाता है।
असल में यह प्यार उसके नाचने-गाने की प्रतिभा से ज्यादा होता है। कहानी जैसे-जैसे आगे बढ़ती है जिंदगी में मुश्किलें आने लगती हैं।