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एक नहीं कई बार प्यार में हारे दिलीप कुमार

Wed, 11 Dec 2013 12:15 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला मुंबई
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दिलीप कुमार एक अभिनेता के रूप में जितने सफल रहे एक प्रेमी के रूप में वह वैसे नहीं दिखे। बड़ी अजीब हैं मोहब्बत की उनकी कहानियां।
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दिलीप कुमार ने जब फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा, वे दिन आज की तरह नहीं थे। तब न आज जैसे सेक्स स्कैंडल होते थे और न खुल्लम खुल्ला प्यार। उन दिनों पुरानी परंपराओं का निर्वाह, परिवारिक मूल्य और रिश्तों की गरिमा का पूरा खयाल रखा जाता था। यही कारण है कि दर्जन भर से ज्यादा हीरोइनों के साथ काम करते हुए भी दिलीप कुमार ने उनके साथ दोस्ती का ही निर्वाह किया।

मीना कुमार और नर्गिस उनकी अच्छी दोस्त थीं। जबकि वैजयंती माला और वहीदा रहमान के साथ उनके संबंध सामान्य थे। लेकिन दो हीरोइनों के वे जरूर इतने नजदीक आए कि रिश्तों ने प्यार का नाम ले लिया। ये हीरोइनें थीः कामिनी कौशल और मधुबाला।
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मधुबाला के साथ दिलीप कुमार के प्यार की कहानी ‘मुगल-ए-आजम’ के दिनों में में शीर्ष पर थी, परंतु इससे करीब एक दशक पहले यह ट्रेजिक हीरो कामिनी कौशल के प्यार में गिरफ्तार हुआ था। 1948 और 1950 के बीच इन दोनों ने चार फिल्मों (शहीद, नदिया के पार, शबनम और आरजू) में काम किया था। फिल्मों के प्रणय दृश्य इस बात के गवाह हैं कि उनके मन में क्या चल रहा था। असल में यह वे दिन थे, जब दिलीप कुमार और कामिनी कौशल दोनों ही फिल्मों में अपने आप को जमाने की कोशिशें कर रहे थे।

कामिनी कौशल से भी हुई मोहब्बत

फिल्म इतिहास के जानकार बताते हैं कि फिल्मों में आईं कामिनी कौशल एक विवाहिता थीं। उनका वास्तविक नाम उमा कश्यप था। वे लाहौर की रहने वाली थीं। उनके पिता को अंग्रेजों ने रायबहादुर खिताब से नवाजा था। कामिनी कौशल की बड़ी बहन की असामयिक मौत हो गई थी और अपनी भतीजियों के भविष्य की खातिर उन्होंने अपने जीजा ब्रह्मस्वरूप सूद से विवाह किया था। सूद मुंबई में रहते थे।

उन्होंने कामिनी को फिल्मों में काम करने की इजाजत दे रखी थी, लेकिन किसी दूसरे मर्द से प्यार करने की इजाजत कैसे देते? जब बात बढ़ी तो दिलीप कुमार और कामिनी कौशल ने एक-दूसरे से दूर हो जाने का फैसला किया और वर्षों तक ऐसे किसी कार्यक्रम का हिस्सा नहीं बने जहां उनमें से कोई एक भी हो।
कामिनी कौशल की तरह दिलीप कुमार का दूसरा प्यार भी परवान नहीं चढ़ सका।

पहले तो मधुबाला के पिता पठान अताउल्लाह खान बीच में आए। मगर उसके बाद एक ऐसी घटना हुई जिसने दोनों की राहें जुदा कर दी। मधुबाला चाइल्ड आर्टिस्ट थीं। वह अपने दस भाई-बहनों की परवरिश के लिए फिल्मों में आठ साल की उम्र से काम कर रही थीं।

1951 से 1960 तक दिलीप कुमार और मधुबाला ने चार फिल्मों में साथ काम किया। ये थीः तराना, संगदिल, अमर और मुगल-ए-आजम। एक पांचवीं फिल्म भी थी, जो दोनों का प्यार टूटने का कारण बनी। यह फिल्म थी, बीआर चोपड़ा की ‘नया दौर’। इस फिल्म में बाद में वैजयंतीमाला आईं।

मधुबाला से चला लंबा प्यार

असल में मधुबाला और दिलीप कुमार के प्यार की भनक अताउल्लाह खान को थी। वे अपनी बेटी को दिलीप कुमार के साथ आउटडोर शूटिंग पर नहीं भेजा चाहते थे। जब बीआर चोपड़ा ने अताउल्लाह खान को बताया कि ‘नया दौर’ की शूटिंग भोपाल (मध्यप्रदेश) के नजदीक बुधनी में होगी तो वे अड़ गए कि इसे मुंबई में ही शूट किया जाए। बात बढ़ गई। फिल्म का कुछ हिस्सा शूट हो चुका था।

चोपड़ा ने मधुबाला को हटा कर वैजयंतीमाला को फिल्म में ले लिया और नुकसान की भरपाई के लिए कोर्ट में मधुबाला और उनके पिता के खिलाफ केस कर दिया। दिलीप कुमार ने न्याय लड़ाई में चोपड़ा का साथ दिया। लेकिन इस बात से उनका प्यार दूर चला गया।
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हालांकि केस खत्म होने के बाद वर्षों तक दिलीप कुमार ने मधुबाला को मनाने की कोशिश की परंतु वह नहीं मानीं। जब 1966 में दिलीप कुमार ने सायरा बानो से विवाह किया तो सारी अटकलों को विराम मिल गया। नाराज मधुबाला ने भी किशोर कुमार से शादी कर ली।

रोचक बात यह है कि एक समय दिलीप कुमार और मधुबाला में सुलह कराने की कोशिश करने वालों में किशोर कुमार भी शामिल थे!
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