'बालिका वधु' में चार साल से सुमित्रा का किरदार निभाने वाली स्मिता बंसल बीच में लंबे ब्रेक पर चली गई थीं लेकिन अब स्मिता ने आनंदी की सास सुमित्रा के रूप में दोबारा वापसी की है। स्मिता वापिस आकर बेहद खुश हैं। अमर उजाला की स्मिता से खास बातचीत हुई। आइए जानें क्या कहती हैं स्मिता।
आपको 'बालिका वधु' में वापस आकर कैसा लग रहा है?
बहुत अच्छा लग रहा है, ऐसा महसूस ही नहीं हो रहा मैं कभी गई भी थी। लग रहा है कि घर वापस आ गई हूं।
दर्शक आपको मिस कर रहे थे, क्या कारण था जो आप अचानक शो से दूर हो गई थीं?
ये जानकर बहुत अच्छा लगता है कि लोग आपको मिस कर रहे हैं।
दरसअल मैं प्रेगनेंट थी और मेरी डिलीवरी होने वाली थी, शो को कंटीन्यू करना मेरे लिए थोड़ा सा मुश्किल था। लेकिन ब्रेक के दौरान मुझे जो भी मिलता था यही पूछता था कि आप वापिस कब आ रही हैं। मैं शायद और एक महीना ब्रेक लेती लेकिन लोगों ने इतना अच्छा रिस्पॉन्स दिया तो मैं पहले ही शो में आ गई।
शो में वापिस आकर आपको दर्शकों का कैसा रिस्पॉन्स मिल रहा है?
बहुत अच्छा। सब बहुत खुश हैं। जो लोग मुझे जानते हैं वो तो फोन करके और मैसेज करके बधाईयां देते हैं लेकिन जो रास्ते में आते-जाते मिलते हैं वो भी वापसी पर खूब बधाईयां दे रहे हैं।
मुझे लगता है कि आप खुद नहीं जान पाते कि लोग आपके कैरेक्टर को कितना पसंद करते हैं। जब मैंने शो से ब्रेक लिया तब मैंने रियलाइज किया कि सुमित्रा को वाकई लोग बहुत पसंद करते हैं और वे उसे वापिस शो में देखना चाहते हैं।
आपका 'बालिका वधु' के साथ अब तक का सफर कैसा रहा?
बहुत बढ़िया। मुझे लगता था कि कोई शो लंबा चलता है तो उसमें बोरियत आने लगती है, लेकिन इस शो ने अपनी फ्रेशनेस को बरकरार रखा हुआ है, इसमें काम करते हुए बिल्कुल भी ऐसा नहीं लगता कि इतना टाइम हो गया इसे, इसे चार साल बीत चुके हैं। इसे करते हुए ना हम बोर हुए और ना ही ऑडियंस बोर हुई।
आपको कहीं ऐसा लगता है ये शो बाकी से डिफरेंट है या आपको कुछ ज्यादा इस शो में सीखने को मिला?
ऐसा नहीं है कि हम बहुत कुछ सीखाने-पढ़ाने के लिए ये शो बना रहे हैं, लेकिन प्रोग्रेसिव फैमिली, प्रोग्रेसिव लोग दिखाए है, सारे कैरेक्टर्स काफी स्ट्रॉन्ग है, इसमें सबकुछ नैचुरल है। शायद इसीलिए लोग इसे बहुत पसंद करते हैं। लोग अपने आपको इससे कनेक्ट करके देखते होंगे। आनंदी एक बदलाव ला रही है, लोगों को बदलाव पसंद आ रहा है। सास-बहु ड्रामा से बिल्कुल अलग है ये।
अभी कुछ समय पहले इस शो ने अपनी 1000 कड़ियां पूरी की हैं, क्या आपको लगता है ये आगे भी बहुत बढ़ेगा?
कोई शो तभी तक चलता है जब तक दर्शक उसे पसंद कर रहे हैं। जब लोग बोर होना शुरू कर दें तो शो को बंद हो जाना चाहिए। पॉजिटिव रिस्पॉन्स आता है तो शो चलना चाहिए। अभी तक तो अच्छा ही सुनने को मिल रहा है।
आनंदी की शादी होने वाली है, आनंदी चली जाएगी शादी करके तो आपका रोल कितना अहम रह जाएगा?
ये तो राइटर्स के हाथ में है। आनंदी की शादी के बाद आनंदी की इस फैमिली को कैसे प्रजेंट किया जाएगा ये तो देखने वाली बात होगी।
अभी धारावाहिकों में लीप आने का ट्रेंड चल रहा है तो क्या इस शो में भी लीप आने की उम्मीद है?
अभी दो बार पहले ही लीप ले चुके हैं और आनंदी के अभी तो बच्चे भी नहीं है तो फिर मुझे नहीं लगता कि अभी शो में लीप ली जाएगी।
आप राजस्थान से हैं और ये शो भी राजस्थान की पृष्टभूमि पर आधारित है कितना आसान था ये कैरेक्टर करना और क्या कुछ मुश्किलें आई आपके सामने?
जहां तक कैरेक्टर को समझने का सवाल था तो वो मेरे लिए काफी आसान था। मेरी रीयल लाइफ में ऐसे कैरेक्टर्स देखें हैं। कल्चर को एडैप्ट करना भी मेरे लिए मुश्किल नहीं था। लेकिन असल बात होती है राइटर को आर्टिस्ट से कैसा किरदार चाहिए।
सुमित्रा का कैरेक्टर आपसे कितना सिमिलर है?
सुमित्रा काफी चुप रहने वाली महिला है, जबकि मैं ऐसी नहीं हूं। सुमित्रा अपनी बात को स्पष्ट तौर पर नहीं कह पाती, जो उसके दिल में चल रहा है उसे वो दिल में ही रखती है जबकि मेरे साथ ऐसा नहीं है। मैं हमेशा ये सुनिश्चित करती हूं कि सबको पता हो कि मुझे क्या अच्छा लगता है क्या नहीं। सिमिलैरिटी की बात करें तो सुमित्रा एक ज्वॉइंट फैमिली के साथ रहती है, वहीं मैं भी ज्वॉइंट फैमिली के साथ रहती हूं। मैं कोशिश करती हूं कि सब खुश रहें।
आपको क्या लगता है ज्वॉइंट फैमिली में रहना बहुत मुश्किल होता है?
नहीं, ज्वॉइंट फैमिली में रहना बहुत आसान होता है। इससे लाइफ बहुत आसान हो जाती है। मैं शूटिंग में आराम से इसीलिए आ जाती हूं क्योंकि मुझे पता है घर में मेरी बेटियों की देखभाल के लिए सब हैं। लेकिन मैं अकेले रहती हूं तो मैं अपनी बेटी को अकेली नहीं छोड़ पाती। हर चीज के अपने फायदे-नुकसान हैं। लेकिन ज्वॉइंट फैमिली के फायदे अधिक हैं।
आप अपने परिवार और शूटिंग को कैसे मैनेज करती हैं?
मुझे घर पर कुछ खास काम नहीं करना पड़ता। और मैं अपनी मदर इन लॉ के काम में इंटरफेयर नहीं करती, वो मुझे कुछ नहीं कहती। तो मेरे लिए मैनेज करना आसान होता है। हालांकि मुझे अपनी 3 महीने की बच्ची को छोड़कर शूटिंग पर आना थोड़ा मुश्किल होता है लेकिन सबकुछ मैनेज तो करना पड़ता है। लेकिन मेरे दिमाग में स्ट्रेस नहीं है कि मेरे बेटियां अकेली है।
आपको क्या लगता है बतौर आर्टिस्ट फिल्मों में किसी चरित्र को ज्यादा स्पेस मिलता है या स्मॉल स्क्रीन पर?
ये तो डिपेंड करता है कि आपका कैरेक्टर कैसा है। टीवी का कैरेक्टर हर राज घर तक आते हैं तो उनसे दर्शक ज्यादा जुड़ जाते हैं। लेकिन फिल्म कुछ घंटों में ही खत्म हो जाती है। टीवी आपके घर में 24 घंटे मौजूद है जबकि न्यू फिल्मों के लिए आपको थियेटर जाना पड़ता है। कनेक्टिविटी तो लोगों को टीवी कैरेक्टर से ज्यादा होती है। अब बुजुर्ग महिलाएं मुझे एक आर्टिस्ट के तौर पर कम लेकिन अपनी बेटी की तरह ज्यादा प्यार करती हैं। टीवी कलाकारों के साथ स्टारडम वाला क्रेज ज्यादा नहीं होता।
आप रीयल लाइफ में किस तरह के शोज देखना पसंद करती हैं?
मैं टीवी से ज्यादा बुक्स पढ़ना पसंद करती हूं। मुझे टीवी देखने का वक्त भी नहीं मिलता क्योंकि मेरी एक 9 साल की बेटी भी है। मेरे घर में किड्स के शोज चलते रहते हैं जिन्हें देखना मैं बहुत पसंद करती हूं।
क्या आप अपने आपको भी टीवी पर देखती हैं?
नहीं, मुझे सबके सामने अपने शोज देखने में मुझे थोड़ा एम्बैरेसिंग लगता है। मैं अपने अंदर कोई ना कोई कमी निकालती रहती हूं। हां, अकेली होती हूं तो कभी-कभी अपने शोज भी देख लेती हूं।
एक्टिंग के अलावा और क्या-क्या पसंद हैं आपको?
मुझे बुक्स पढ़ने का बहुत शौक है, मुझे डांस करने का बहुत शौक हैं। मैं शुरू से ही कथक डांसर हूं। मुझे गाने सुनना बहुत पसंद है।
आपके बच्चों को आपको टीवी पर देखकर क्या रिएक्शन होता है?
मेरी बड़ी बेटी को मुझे टीवी पर देखना बहुत पसंद है। वो 'बालिका वधु' को बहुत पसंद नहीं करती क्योंकि मैं आनंदी को बहुत प्यार करती हूं जो कि उसे अच्छा नहीं लगता। वो मुझे यहां तक कहती है कि आप मुझे लाडो कहा करो, आनंदी को लाडो मत कहा करो। इसके अलावा मेरे एड शोज और अन्य शोज बहुत पसंद है। उसका मेरे साथ शूटिंग पर भी आने का बहुत मन होता है।
'बालिका वधु' के अलावा और क्या-क्या कर रही हैं आप?
फिलहाल तो मैं यही शो कर रही हूं क्योंकि मुझे अपनी 3 महीने की बेटी को भी वक्त देना होता है। मैं पूरा कंसन्ट्रेट 'बालिका वधु' और अपनी फैमिली पर कर रही हूं।