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जानिए रिलीज के पहले क्या कुछ हुआ 'पीके' के साथ?

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‘पीके’ के बारे में लोग जान पाते, इससे पहले ही एक पोस्टर में आमिर खान हाथ में रेडियो थामे लगभग न्यूड नजर आए। विवादों का एक गुबार उठा और वह छा गए। मीडिया ने आमिर खान के इस न्यूड अवतार को हाथों-हाथ लिया। बौद्धिक जनों ने नाक-भौं सिकोड़े। आमिर ने सिर्फ इतना कहा,"अगर दो-तीन साल पहले मुझसे ऐसा करने को कहा जाता, तो मैं मना कर देता।" आमिर के हाथ में दिखा रेडियो बजता रहा। अब कई महीने बाद लोगों को समझ में आ रहा है कि पोस्टर का वार अचूक था।
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फिल्म के पीछे क्या है?

हर इंटरव्यू में ये सवाल पूछा जाता है और हर बार आमिर यही जवाब देते हैं, "दिल की आवाज पर मैं फिल्में चुनता हूं। जो कहानी मुझे संतुष्ट करती है, मैं उसे चुनता हूं। जब एक बार फिल्म चुन लेता हूं, तो ये मेरी जिम्मेदारी बन जाती है कि फिल्म बॉक्स ऑफिस पर भी अच्छा काम करे। मैं फिल्म कभी ये सोचकर नहीं चुनता कि यह बॉक्स ऑफिस पर कमाल कर पाएगी या नहीं।"

यह अलग बात है कि 15 करोड़ की उनकी फिल्म ′तारे जमीं पर′ ने बहुत महंगी ′धूम-2′ से ज्यादा बिजनेस किया था। यहां यह भी याद रखने की बात है कि 100 करोड़ का क्लब आमिर खान के बिना पूरा नहीं होता।
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पोस्टर इसलिए आए विवाद में

फिल्म पूरी होने से पहले न्यूड वाली बात चली तो प्रोड्यूसर और निर्देशक की तरफ बात आई-′′न्यूड सीन फिल्म की मांग है। फिल्म का जरूरी हिस्सा है। यह सिर्फ सनसनी के लिए नहीं है।′′ कई हफ्ते इसी पर सवाल-जवाब में निकल गए। अब पोस्टर बहुत पीछे छूट गया है। सबकी जुबान पर है-′′पीके हो क्या? ′′

'पीके′ में जुनैद

हाल ही में एक फिल्म आई थी-′तलाश′। दर्शकों की नजर में आमिर की लगभग पिटी हुई फिल्म। इसके बाद की फिल्म ′पीके′ में आमिर अपने बेटे जुनैद के साथ नजर आए। क्या यह प्रचार पाने की कोई तरकीब थी? आमिर तो कहते हैं-"जुनैद जूनियर असिस्टेंट्स की टीम में था। उसे कोई स्पेशल ट्रीटमेंट नहीं मिला। वह फिल्म की टीम के साथ ही रहा और उन्हीं के साथ उसने समय बिताया।" अब फिल्म पंडित मानते हैं कि जुनैद की मौजूदगी एक फार्मूला थी, जिसे आमिर ने ईजाद किया।
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पलक क्यों नहीं झपकाता ′पीके′?

पहले तो कहा गया कि ′पीके′ एलियन है। कभी भूत-प्रेत की बात उड़ी। फिर कहा गया कि इस किरदार के कई एक्सप्रेशन हैं। अब पता चला है कि ′पीके′ इस फिल्म में पलक नहीं झपकाता। कुछ दिन पहले यह राज खुला है आमिर की तरफ से-"ये आइडिया स्क्रिप्ट में नहीं था। इसे हमने शूटिंग करते वक्त जोड़ा। इसके लिए मैंने फिल्म में ग्रीन लेंस पहने हैं। ये मेरे करियर का सबसे मुश्किल रोल है।"

2014 के बाद 2017 क्यों?

लोगों ने पूछा तो आमिर ने कहा है कि 2017 से पहले फिल्मों में नहीं। तीन साल का लंबा गैप? सवाल यह नहीं है। सवाल यह है कि इस बीच आमिर क्या करेंगे। ‘सत्यमेव जयते’ में तो अब नहीं दिखेंगे। बच्चों की क्लास में नजर आएंगे? फिल्मी तड़क-भड़क से दूर किसी गांव की ओर निकल जाएंगे? क्योंकि आमिर को पता है कि हर बार ′पीके′ को नया होना पड़ेगा। दर्शकों का यह मनोविज्ञान है, जिसे आमिर सबसे ज्यादा समझते हैं शायद! शायद ′पीके′ की साइकोलॉजी भी यही है।
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