एक दिन चित्रगुप्त ब्रम्हाजी के पास एक रिक्वेस्ट ले कर आए कि प्रभु जी ये करवाचौथ के सातों जन्म वही पति स्कीम बंद कर दी जाए.
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ब्रम्हाजी ने पुछा - क्यों क्या हुआ ???
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चित्रगुप्त - प्रभु जी ट्रेक रखना कठिन होता है |
औरत वही पति बार बार माँगती है और आदमी हमेशा दुसरे जोड़ीदार की डिमांड करता रहता है. मैनेज करना कठिन होता जा रहा है !
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ब्रम्हाजी : परंतु यह स्कीम बंद नहीं की जा सकती.
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तब महामुनि नारदजी ने उपाय दिया कि मृत्यु लोक में चाहर नाम के एक मजाकिया विचारक रहते हैं उनसे सलाह ली जाए.
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चाहर को समस्या बताई गई और जो समाधान चाहर ने बताया उसने चमत्कारी रूप से महिलाओं की डिमांड एकदम समाप्त कर दी.
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चाहर ने सुझाया : जो भी पत्नी सातों जनम वही पति डिमांड करे
उसे दे दो..........
पर शर्त ये रहेगी कि अगर पति वही चाहिए,
तो सास भी वही मिलेगी.
और लो पत्नी से पंगा
पति और पत्नी मेँ लडाई के कारण बातचीत बंद थी...
सुबह पति को जल्दी जाना था,उसने रात को पेपर पर लिखा...
"मुझे सुबह 5 बजे उठा देना,जरूरी काम है"
और पेपर पत्नी के तकिये के नीचे रख दिया है
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सुबह 8 बजे जब उठा तो देखा उसके ऊपर बहुत सारे पेपर पडे थे.
और सब पर लिखा था..
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"उठ जाओ 5 बज गये"
"प्लीज. उठ जाओ,
वर्ना लेट हो जाओगे"।।
और लो पत्नी से पंगा॥
अपने दुख खुद उठाओ
पति प्रवचन सुनकर घर आया और
पत्नी को गोद में उठा लिया।
पत्नी- क्या गुरूजी ने रोमांस करने
के लिए कहा है?
पति - नहीं पगली, उन्होंने
तो कहा है कि अपने दु:ख खुद
उठाओ!!!