बंता : कहां से आ रहे हो, संता भाई...?
संता : मत पूछ यार, अपनी सास का अंतिम संस्कार करके आ रहा हूं...
बंता : लेकिन तेरे चेहरे पर ये खरोंचें कैसे आईं...?
संता : क्योंकि उन्हें जलाने से पहले मुझे उनके साथ भयंकर लड़ाई लड़नी पड़ी...
संता सिंह की शादी
संता सिंह शादी के बाद पहली बार ससुराल गया तो हड़कंप मच गया, और चारों ओर से सभी रिश्तेदार और पड़ोसी खातिर-तवज्जो में जुट गए...
अच्छे से अच्छा और पौष्टिक खाना खिलाने के मकसद से उसकी सास रोज़ाना पालक, मेथी, बथुआ, मूली, घीया, तोरई आदि हरी सब्ज़ियां पकाकर उसे खिलाती रहीं...
पांचवें-छठे दिन औपचारिकतावश सास ने खाना बनाने से पहले संता से पूछा, "कहिए, कुंवर साहब, आज क्या खाना पसंद करेंगे...?"
संता ने आदर के साथ कहा, "मां जी, आप नाहक ही तकलीफ करती हैं... आप मुझे खेत का रास्ता बता दें, मैं खुद ही चर आऊंगा..."
नहीं, तीन ही काफी हैं...
भागती-भागती नौकरानी घर में घुसी, और संता से कहा - साहब, जल्दी आइए, पड़ोस की तीन औरतों का आपकी सास से झगड़ा हो गया है, और वे माताजी को बुरी तरह पीट रही हैं...
संता दौड़कर घर की बाल्कनी में गया, और घटना का जायज़ा लेने लगा...
नौकरानी: साहब, क्या हुआ, आप मदद करने नहीं जाएंगे...?
संता: नहीं, तीन ही काफी हैं...