फिल्म‘फटा पोस्टर निकला हीरो’ भले ही बॉक्स ऑफिस पर कमाल नहींकर सकी,लेकिनशाहिद के काम को सराहा गया।वह अब ‘आर...राजकुमार’के रूप में टिकट खिड़की परहाजिर हैं। निर्देशक प्रभुदेवा की इस फिल्म में वह प्यारऔर मार दोनों से दर्शकों कोरिझाने की कोशिश कर रहे हैं।शाहिद से बातचीत के अंश...
2013खत्महोने की तरफ बढ़ रहा है। कैसारहा यह साल?
कामकाम काम और सिर्फ काम। पिछलेसाल नवंबर से लेकर अभी तक मैंकेवल या तो अपनी फिल्मों कीशूटिंग कर रहा हूं या फिर उन्हेंप्रमोट कर रहा हूं। आपने ‘फटापोस्टर निकला हीरो’ देखी। अब‘आर...राजकुमार’का प्रमोशन चल रहा है। उधरकश्मीर में ‘हैदर’ (निर्देशकःविशाल भारद्वाज)कीशूटिंग भी चालू है। बीते एकसाल से मैंने कोई छुट्टी तकनहीं ली है।
इसकामतलब है कि आपने अपनी पुरानीनीति बदली है?हां,पहलेमैं कम काम करता था और सोचताथा कि इसका अच्छा नतीजा निकलेगा।लेकिन अब मुझे लगता है कि सबसेजरूरी है कि सिर्फ काम करतेरहिए। यह मत सोचिए कि नतीजाक्या निकलेगा। पहले मैं मूडीथा,परंतुअब अपने आप पर कंट्रोल करनासीख रहा हूं। मुझे यह भी समझआया है कि ज्यादा काम पाने केलिए आपको लोगों के बीच जानापड़ेगा। बैठे रहेंगे तो कोईआपके पास नहीं आएगा।आमराय है कि आप घमंडी हैं...!मैंनेइस बात को भी समझा है। सच यहहै कि मैं अपने आप में रिजर्वरहता हूं। परंतु फिल्म इंडस्ट्रीने मुझे सिखाया है कि आप ऐसेरहेंगे तो आपके बारे में गलतधारणाएं बन जाएंगी। मैं लोगोंकी इस राय को भी बदलने की कोशिशकर रहा हूं। पहले के मुकाबलेमैं अब ज्यादा लोगों से मिलताहूं। बात करता हूं।खबरथी कि आपके पिताजी (पंकजकपूर)आपकेलिए लड़की ढूंढ रहे हैं!नहींयार...डैडगोवा में शूटिंग कर रहे थे...मैंकश्मीर में शूटिंग कर रहा था।पता नहीं कैसे रिपोर्ट आ गईकि वो मेरे लिए पंजाब में लड़कीढूंढ रहे हैं। डैड इसलिए पंजाबजाते हैं कि हमारे परिवार केकुछ सदस्य और रिश्तेदार वहांपर हैं। उनके जाने का यह मतलबतो नहीं कि वो मेरे लिए लड़कीढूंढ रहे हैं!क्याआप पिता की पसंद की लड़की सेशादी करेंगे?बिल्कुलनहीं...।अरे,पापाको थोड़े न उस लड़की के साथरहना है। पापा भी इस बात कोजानते हैं। जब उन्होंने खुदअपने लिए लड़की चुनी तो मेरेलिए क्यों चुनेंगे...?‘आर...राजकुमार’में आपका क्या रोल है?फिल्मऐक्शन-रोमांटिककहानी है। मैं इसमें ‘आर...राजकुमार’हूं। फिल्म में मेरा रोल यातो प्यार प्यार प्यार करताहै या फिर मार मार मार...।यह अनोखा किरदार है। जब सड़कपर होता है तो पूरी तरह मवालीरहता है। लेकिन जब प्यार करताहै तो बहुत ही सीधा-संवेदनशीलहोता है। वह प्यार के लिए कुछभी कर सकता है। एक बात और हैकि जब मार-पीटहोती है तो वह अव्वल रहता है,मगरजब लड़की सामने आ जाती है तोउसे समझ नहीं आता कि क्या करे।सोनाक्षीके साथ यह आपकी पहली फिल्म है।कैसा रहा उनके साथ काम करना?इसफिल्म से पहले हमारी मुलाकाततक नहीं हुई थी। सबसे पहले हमफ्लाइट में मिले,जबगुजरात जा रहे था। हमने कच्छमें फिल्म के गाने ‘साड़ी काफॉल’ के साथ शूटिंग शुरू कीथी। यह गाना हम दोनों का फेवरेटहै। सोनाक्षी के साथ काम करनेमें सचमुच बहुत मजा आया। सचकहूं तो मैंने बहुत दिनों केबाद ऐसी हीरोइन के संग कामकिया,जिसेकंप्लीट कह सकता हूं। जो अच्छीऐक्टिंग करती है,अच्छाडांस करती है।निर्देशकप्रभु देवा ने सलमान खान औरअक्षय कुमार को उस समय सहारादिया था जब उनकी लोकप्रियतागिर रही थी। वे स्टार मेकरमाने जाते हैं। उम्मीद करेंकि आपका कैरियर ग्राफ भी अबऊपर उठेगा?प्रभुसर के साथ काम करके मैंने बहुतकुछ सीखा है। उनकी फिल्मोंका स्टाइल बिल्कुल अलग है।वे जनता के लिए फिल्म बनातेहैं और जनता उन्हें पसंद करतीहै। जहां तक सलमान और अक्षयकी बात है,वेऐसे स्टार्स हैं जो एक फिल्मसे नहीं बने हैं। मैं मानताहूं कि असली सितारा वही होताहै,जिसेउसके खराब दौर में भी जनतादेखना चाहती है।प्रभुदेवा की फिल्म में काम करकेआपने सीखा और क्या पाया?मैंनेपहली बार उनकी कोई फिल्म कीहै। आज मैं कैरियर में उस मुकामपर हूं जहां अपने डायरेक्टरके लिए काम करता हूं। वह डायरेक्टरही है जो फिल्म की कल्पना करताहै। ऐक्टर को उसमें देखता है।अगर आप डायरेक्टर को संतुष्टनहीं कर सकते तो फिर क्या फायदा।भले ही वह फिल्म ब्लॉकबस्टरहो। मैं डायरेक्टर की उम्मीदोंपर खरा उतर सकूं तो मुझे फिल्मके फ्लॉप होने का भी गम नहींहोता।