रणवीर सिंह से आपकी दोस्ती पर सबकी नजरे हैं। कहां से हुई इस दोस्ती की शुरुआत?
रणवीर से मेरी पहचान सात-आठ साल पुरानी है। तब हम ऐक्टर नहीं थे। मैं डायरेक्टर बनना चाहता था और वह ग्रेजुएट हो जाने के बाद ऐक्टिंग में आने की तैयारी कर रहा था। पार्टियों में मिलते थे। फिल्मी सर्किल छोटा सा है। बहुत सारे दोस्त कॉमन थे। हम दोनों में एक बात समान थी कि हमें नाचना बहुत अच्छा लगता था।
1970-80 के दौर के गानों पर। हम दोनों का ही फेवरेट गाना था, धिना धिन ना... माई नेम इज लखन। जब मिलते थे तो वह गाना जरूर बजाते और नाचते थे। तब नहीं पता था कि छह-सात साल बाद उसी 1970-80 के दौर की एक फिल्म बनेगी और हम उसमें साथ काम करेंगे।
हालांकि उस जान-पहचान के दिनों को दोस्ती नहीं कह सकते, लेकिन हां एक-दूसरे को लेकर सकारात्मक सोच थी। जब ‘गुंडे’ का हमें साथ में नरेशन दिया गया और तय हुआ कि साथ काम करेंगे, तब बात बढ़ी। काम करते-करते दोस्ती भी परवान चढ़ी।
रणवीर में आपको क्या ऐसी बातें दिखी कि यह दोस्ती गहरी हो गई?
यह तो बता नहीं सकता। बस नजदीक रहते रहते लगाव गहरा हो जाता है। हम लोग एक-दूसरे के साथ बहुत कंफर्टेबल महसूस करते हैं। वैसे कोई भी अपनी दोस्ती को डिफाइन नहीं कर सकता कि वह क्यों किसी का दोस्त है। मैं बहुत प्राइवेट पर्सन हूं और अपनी लाइफ या दोस्तों पर ज्यादा बात नहीं करता।
डर लगता है कि कहीं इस दोस्ती को किसी की नजर न लग जाए। कई लोगों को लगता है कि हम ‘गुंडे’ के प्रमोशन के लिए दिखावा कर रहे हैं, लेकिन मैं कहता हूं कि किसी में इतनी ताकत नहीं है कि दिखावे की इतनी जबर्दस्त ऐक्टिंग कर सके। कुछ करिश्मे बस हो जाते हैं।