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आम आदमी से नहीं मिल पाते हमः अमिताभ

Fri, 06 Sep 2013 06:40 PM IST
हरि मृदुल/मुंबई ब्यूरो
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लीजिए, एक बार फिर से बिग बी आपको करोड़पति बनाने आ गए हैं। सोनी चैनल पर 6 सितंबर से शुरू होने जा रहे इस चर्चित गेम शो को तीन दिन यानी शुक्रवार से रविवार रात साढ़े आठ बजे देखा जा सकेगा।
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यह केबीसी के पिछले सीजन से इस मामले में अलग है कि इस बार पुरस्कार की राशि बढ़ाकर सात करोड़ कर दी गई है। अमिताभ बच्चन से अमर उजाला की एक विशेष बातचीत

सन् 2000 में जब आप इस गेम शो से जुड़े थे, क्या आपने सोचा था कि यह इतना पॉपुलर होगा। जब आप तेरह साल पीछे मुड़ कर देखते हैं, तो क्या अनुभूति होती है?

मुझे याद है कि सन् 2000 में मुझे सिर्फ तीन महीने के लिए ही अनुबंधित किया गया था। वाकई तब इतनी बड़ी यात्रा के बारे में कल्पना भी नहीं की थी। मेरे लिए भी यह एक नया क्षेत्र था, लेकिन ऊपरवाले की दया से सफलता हासिल हो गई। इस शो में कई रोमांचक पड़ाव आए। तब यह शो स्टार चैनल के पास था। अब मैं इस सातवें सीजन को प्रस्तुत कर बहुत खुश हूं।

आप एक एंकर के तौर पर इतनी लंबी पारी खेल चुके हैं। आपके लिए टीवी आसान है या बड़े परदे का अभिनय?

सच कहूं, तो मुझे टीवी कठिन लगता है। एक एंकर के तौर पर बहुत कुछ अपनी ओर से डालना पड़ता है। जब कि एक एक्टर दूसरों का लिखा संवाद पढ़ता है। निर्देशक के हिसाब से चलता है और दूसरे एक्टरों की भी उसे मदद मिलती है।
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केबीसी ने लोगों को करोड़पति तो बनाया ही है, दर्शकों के ज्ञान में भी वृद्धि की है। क्या इस शो से जुडऩे के बाद आप भी बौद्धिक रूप से समृद्ध हुए हैं?

निश्चित रूप से। केबीसी से जुडऩे के बाद मेरे ज्ञान में भी बहुत बढ़ोत्तरी हुई है। हम एक्टर वैसे भी ज्यादा बौद्धिक नहीं होते हैं। हमें इतना समय भी नहीं मिलता है, लेकिन इस शो ने मुझे ज्यादा विवेकवान बनाया है।

क्या आपका उन विनर्स से संपर्क है, जो पिछले सीजंस में जीते हैं?

हां, लगभग सारे ही विनर्स मुझ से यदाकदा बातचीत करते रहते हैं। भई, वे सभी केबीसी परिवार के सदस्य हैं। उन्हें कैसे छोड़ा जा सकता है।

ऐसा सुना गया है कि शो में प्रतिभागी बने कई मजबूर लोगों को आप खुद भी मदद करते हैं?

हां, जब पता चलता है कि अमुक की पारिवारिक हालत ठीक नहीं है और उसे रुपयों की सख्त जरूरत है। गलत जवाब देने की वजह से वह जल्दी आउट हो चुका है। ऐसी स्थिति में मैं जितना बन पड़ता है, खुद भी मदद कर देता हूं। मैं नहीं चाहता कि इस तरह के योगदान को प्रचारित किया जाए।

क्या आप केबीसी में पूछे जाने सवालों के बारे में कभी कोई सुझाव देते हैं?

नहीं, मैं इस तरह की दखलंदाजी नहीं करता। हां, शूटिंग के दौरान माहौल ठीक रहे, इसके लिए अपनी ओर से जरूर कोशिश करता हूं।

खुद आपके लिए इस खेल की सबसे बड़ी उपलब्धि क्या है?

आम आदमी से मिलना। हम एक्टर आम आदमी से नहीं मिल पाते हैं। आप आदमी से मिलने का सौभाग्य सिर्फ नेताओं को ही प्राप्त होता है। मैं जब 1984 में चुनाव लड़ा था, तब हर वर्ग के लोगों से मुलाकात होती थी। उनके सुख-दुख की जानकारी मिलती थी। जब मैंने राजनीति छोड़ दी, उसके बाद इस तरह के मौके नहीं मिले। इधर केबीसी ने मुझे लगातार यह मौका दिया है।
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