आज जब होली की बात चलती है, तो बरबस ही शोमैन राज कपूर के आर. के. स्टूडियो की होली का नाम सबकी जुबां पर आ जाता है। एक जमाना था जब होली के दिन फिल्मी जगत के सभी छोटे-बडे कलाकार आर. के स्टूडियो में जमा होकर होली पर धमाल मचाते हुए रंगों से सराबोर मस्ती में डूब जाते थे। शंकर जयकिशन साज बजाते थे तो राज कपूर खुद ही कोर्डियन लेकर बजाने लगते थे। बैजयंती माला सहित अन्य अभिनेत्रियां डांस करती थी।
उस समय आर. के. स्टूडियो में एक छोटे से तालाब में रंग घोला जाता था और इसमें लोगों को डुबो कर जमकर मस्ती की जाती थी। राजकपूर इस बात का पूरा ख्याल रखते थे कि होली की रंग में किसी तरह का भंग न पडे और खासतौर से महिलाओं के साथ होली के नाम पर छेड़खानी न की जाए। खूब धमाल और भांग की घुटाई होती थी लेकिन शिष्टता भी कायम रहती थी।
उस वक्त को याद करते हुए प्रख्यात गीतकार पद्मभूषण गोपालदास नीरज कहते हैं कि लगता था सितारे जमीन पर उतर आए हैं। स्टूडियो में सभी के लिए हर प्रकार का इंतजाम रहता था। पद्मिनी, बैजयंती माला, नरगिस, जीनत अमान सहित संजीव कुमार, मनोज कुमार कहां तक नाम गिनाए जाएं।
नीरज कहते हैं कि उनके संबंध राजकपूर के पिता पृथ्वीराज कपूर से भी बहुत अच्छे थे, इसलिए पूरा कपूर परिवार ही सम्मान करता है। आरके की होली के लिए आमंत्रण मिलना किसी के लिए भी बड़ी बात होती थी। स्टूडियो में ही बड़ा सा टैंक बनाया जाता था, जिसमें सभी को डुबकी लगवाना अनिवार्य बात मानी जाती थी।
मौजूदा दौर में बिग बी अमिताभ बच्चन के बंगले प्रतीक्षा पर मनाई जाने वाली होली ने राजकपूर की होली की जगह ले ली है। हालांकि फिल्मी जगत की कुछ नामी गिरामी हस्तियों का कहना है कि आर. के. की होली में जहां रिश्तों का अपनापन और पूरे फिल्म जगत की मस्ती होती थी वहीं, अब प्रतीक्षा की होली मीडिया कवरेज के लिए अघिक और रिश्तों के लिए कम जानी जाती है।