फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सुपरडुपर फ्लॉप हुई 'फितूर', कैटरीना का द एंड?

विज्ञापन
विज्ञापन
70 करोड़ के बजट वाली फिल्म ने पहले वीकेंड में जुटाए मात्र 13 करोड़
विज्ञापन

बीते शुक्रवार को 70 करोड़ की फितूर ने मात्र साढ़े तीन करोड़ का बिजनेस किया तभी तय हो गया कि फिल्म संकट में है। दिल्ली/यूपी में इसमें पहले दिन एक करोड़ भी नहीं कमाए। पहले सप्ताहांत के बाद ट्रेड के जानकारों ने मान लिया कि कैटरीना कैफ की इस फिल्म से उम्मीद बेकार है। कभी नंबर वन कही गई इस बार्बी डॉल का जादू खत्म हो चुका है।

पिछले दस साल में इतना बड़ा खतरा कैटरीना कैफ पर नहीं आया। उनका करियर संकट में है। फितूर ने उनके लिए वही किया, जो पिछले साल बॉम्बे वेलवेट ने उनके ब्रेक-अप-पूर्व बॉयफ्रेंड रणबीर कपूर के लिए किया था। ट्रेलर रिलीज होते ही साफ हो गया था कि फितूर औंधे मुंह गिरेगी।
विज्ञापन


इसके लिए निर्देशक और लीड कास्ट जिम्मेदार है। फितूर में सबसे बड़ा नाम था, कैटरीना। अतः नाकामी का सबसे ज्यादा खामियाजा भी उन्हें उठाना पड़ेगा। 70 करोड़ के बजट वाली फिल्म ने पहले वीकेंड में मात्र 13 करोड़ रुपये कमाए। यह निर्माता यूटीवी के जेब में मूंगफली के दाने पहुंचने जैसा है।

छह बहनों, एक भाई और मां की जिम्मेदारी है सिर पर

छह बहनों, एक भाई और मां के परिवार को संभालने वाली 32 साल की कैटरीना के लिए फितूर की विफलता से उबरना आसान नहीं होगा क्योंकि अब उनके पास रणबीर का सहारा नहीं है। उनका करियर बनाने वाले सलमान खान कब तक अपनी संवेदनाओं से उनके करियर में सांस फूंकेंगे?

कैटरीना के शुरुआती जोड़ीदार अक्षय कुमार निर्माता के रूप में आगे बढ़ चुके हैं। वह अब सिर्फ मुनाफा देखते हैं। शाहरुख खुद संकट में हैं। आमिर दो बरस में एक फिल्म करते हैं। नए लड़कों के साथ कैटरीना की जोड़ी नहीं चलेगी, यह फितूर से जाहिर है।

वास्तव में कैटरीना का करिअर हमेशा नायकों के सहारे रहा है। उनके पास एक भी ऐसी फिल्म नहीं है, जो हम सिर्फ उनके नाम से देखें। निर्माता-निर्देशकों और सितारों ने उन्हें बॉर्बी गुड़िया की तरह पर्दे पर दिखाने के लिए इस्तेमाल किया।

उनकी सफल फिल्में वे हैं, जिनमें हीरो सफल हैं। खुद कैटरीना मौके भुनाने में नाकाम रहीं और कभी ऐक्टिंग प्रतिभा नहीं दिखा सकीं। हिंदी बोलना उन्हें आया नहीं। केवल अग्निपथ का चिकनी चमेली आइटम डांस है, जिसमें वह कुछ चमक बिखेरती हैं।

लग सकता है एक और करारा झटका

2009 में रणबीर कपूर से प्रेम के बाद उनकी चर्चा निजी जिंदगी तक सिमटती चली गई। 2016 में उनकी दो फिल्में और कतार में हैं। जो बन रहीं हैं। रणबीर के साथ जग्गा जासूस जहां संकट में है, वहीं बार बार देखो के निर्माता फितूर की नाकामी के बाद काफी कुछ सोचने पर मजबूर होंगे क्योंकि कैटरीना के साथ इसमें सिद्धार्थ मल्होत्रा हैं।

जिनकी चर्चा आलिया भट्ट के प्रेमी के अलावा नहीं होती। इधर, कैटरीना भीतर से कितनी असुरक्षित महसूस कर रही हैं, यह उनके पिछले दिनों दिए बयान से पता चलता है।

उन्होंने कहा था कि अच्छा है प्रियंका चोपड़ा और दीपिका पादुकोण हॉलीवुड जा रही हैं। उनकी जगह डायरेक्टर मुझे लेंगे। क्या वाकई ऐसा होगा? हर दिन प्रतिभाशाली नई नायिकाएं आ रही हैं। कैटरीना सिर्फ अपने दिल को तसल्ली दे रही हैं। पर समस्या ये कि इतने करोड़ रुपये का घाटा कैसे बर्दाश्त कर पाएंगे। अगली स्लाइड में जानिए, कितने करोड़ का घाटा लगेगा।
 

यूटीवी का दम न निकल जाए!

फितूर के खस्ता हाल के बाद ट्रेड के जानकार मान रहे हैं कि यह निर्माताओं को 40 करोड़ रुपये से ज्यादा का घाटा देगी। जानकारों की मानें तो 70 करोड़ के बजट वाली इस फिल्म के देश-विदेश के थियेटरों में खराब प्रदर्शन से तय है कि सैलेटाइट अधिकार से निर्माताओं को कुछ खास नहीं मिलेगा।

इसका संगीत भी नहीं चला। उल्लेखनीय है कि फिल्म को समीक्षकों और दर्शकों ने समान रूप से खारिज किया है। जानकार इस खबर से भी चकित हैं कि छोटे बजट की रॉक ऑन और काय पो चे डायरेक्ट करने वाले अभिषेक को फितूर के लिए 10 करोड़ फीस दी गई।

वैसे निर्माता/वितरक यूटीवी के लिए पिछले कुछ महीनों में यह बॉक्स ऑफिस पर पांचवां झटका है। फितूर से पहले उसकी फैंटम, कट्टी बट्टी, तमाशा और साला खड़ूस लाइन से फ्लॉप रही हैं।
विज्ञापन

कौन है इस महाफ्लॉप का जिम्‍मेदार

फितूर की फ्लॉप होने की कैटरीना को आशंका थी। यही वजह है कि रिलीज पूर्व एक मीडिया इंटरव्यू में उन्होंने संकेत दे दिए थे कि डायरेक्टर ने फिल्म में गड़बड़ियां की हैं।
उन्होंने कहा, ‘स्क्रिप्ट में ऐसी बातें थीं जिनसे मुझे काफी स्ट्रगल करना पड़ा। मैं बार-बार अभिषेक कपूर से कहती रही कि हमें किताब (चार्ल्स डिकेंस का उपन्यासः ग्रेट एक्सपेशंस, जिस पर फिल्म आधारित है) की लाइन पर चलना चाहिए। उन्होंने कई चीजें बदल दी थीं। एक खास बात तो यह थी कि किताब में आपको साफ पता होता है कि लड़का लड़की से क्यों प्यार करता है। वहां प्यार बहुत मासूम और पाक-साफ है।’

अभिषेक की फिल्म में हीरो लगातार हीरोइन के शारीरिक आकर्षण में बंधा है। जबकि हीरोइन अपनी मां के कहने पर कहीं और शादी करने को तैयार है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें