हाल ही में 'चश्मेबद्दर' फिल्म का रीमेक बनाने वाले डेविड धवन 'रासकल्स' को अपनी सबसे बुरी फिल्म बताते हैं। डेविड धवन ने कहा कि वह आगे से वल्गर कॉमेडी कभी नहीं बनाएंगे। अब डेविड धवन की ईच्छा ऐसी फिल्म बनाने की है जिसे दर्शक देखें तो रोने लगे।
डेविड एक इमोशनल सिनेमा रचना चाहते हैं लेकिन इसके लिए वह 80 के दौर में नहीं लौटेंगे। वह आज के दौर की ही कोई भावुक कहानी पर्दे पर पेश करेंगे। डेविड धवन ने इन दिनों बन रही फिल्मों पर अमल उजाला से लंबी बातचीत की। पेश हैं बातचीत के कुछ अंश,
'चश्मेबद्दूर' के रीमेक का ख्याल अचानक कैसे आया?
इस फिल्म को बनाने के अधिकार वायकॉम पिक्चर्स के पास थे। वह मुझसे कई बार इस फिल्म का रीमेक बनाने के लिए कह रहे थे। मुझे बार-बार यह लगता था कि वह समय बीत गया है जिस दौर में 'चश्मेबद्दूर' बनायी गयी थी।
फिर मैने महसूस किया कि यदि इस फिल्म की थीम को आज की जनरेशन को ध्यान में रखकर बनायी जायी तो फिल्म चल सकती हैं। फिर मेरी साजिद-वाजिद से बात हुई तो उन्होंने इसके डायलॉग लिखे। डायलॉग देखने के बाद मुझे यह फिल्म बिल्कुल नयी सी लगी।
पुरानी फिल्म से कितनी अलग है आपकी चश्मेबद्दूर?
फिल्म का प्लाट तो वही है लेकिन दर्शक महसूस करेंगे कि प्लाट के अलावा सारा कुछ नया है। हमने नए तरीके से सीन रखे हैं। आज की जनरेशन के हिसाब से चुटकुले और मुहावरे गढ़े हैं। मेरी यह फिल्म पुरानी फिल्म से बिल्कुल अलग है।
पुरानी 'चश्मेबद्दूर' के फिल्म मेकर के साथ कोई अनबन हुई है क्या?
संई परांजपे से लेकर फारुख शेख और दीप्ती नवल सभी मेरे मित्र हैं। वह अपनी फिल्म को फिर से रिलीज करना चाहते हैं तो इसमें कोई बुरायी नहीं। वैसी उनकी फिल्म बड़े शहरों के कुछ खास मल्टीप्लेक्सों में ही रिलीज हो रही है। मेरे ऊपर इसका कोई फर्क नहीं पड़ता।
काफी समय बाद नए कलाकारों के साथ फिल्म बनायी है?
इस फिल्म में मुझे शरारत दिखानी थी। ऐसी शरारत जो कॉलेज गोइंग लड़कों पर ही शूट करे। यदि मैं इस फिल्म में पुराने कलाकार लेता तो संभव है कि यह सबकुछ बनावटी लगता। यदि आप कमीनापन दिखाना चाहते हो तो उसे दिखाने में कंजूसी नहीं करनी चाहिए।
आपकी आखिरी फिल्म 'रासकल्स' की बड़ी आलोचना हुयी?
मैं कान पकड़कर कहता हूं 'रासकल्स' फिल्म बनाना मेरी गलती थी। मैने कभी अश्लील या द्घिअर्थी कॉमेडी फिल्म नहीं बनायी है। उस फिल्म में मैने एक प्रयोग किया था। वह लोगों को रास नहीं आया। मेरी कोई भी फिल्म उठाकर देख लीजिए वह एक फैमिली इंटरटेनर होती हैं। अब आगे से आपको डेविड धवन से यह शिकायत नहीं होगी।
किस तरह की फिल्में बनाना चाहते थे?
मैं 40 से ज्यादा फिल्में बना चुका हूं। कॉमेडी का कोई ऐसा एंगल नहीं रहा जो मैने बनाया न हो। अब मेरी ईच्छा ऐसी कॉमेडी फिल्म बनाने की है जिसमें कॉमेडी के साथ खूब गहरा इमोशन भी हो। मैं चाहता हूं कि दर्शक रोते हुए सिनेमाहॉल से निकले।
क्या 80 के दशक का ड्रामा रचना चाहते हैं?
इंडस्ट्री में यह एक खराब मान्यता है कि 80 के दशक को दिखाकर ही इमोशन पैदा किया जा सकता है। लोग थ्री इडियट्स जैसी फिल्में भूल जाते हैं। उस फिल्म में रोमांस भी था और इमोशन भी। मैं खुद कई जगह पर रोया। मैं ऐसी ही फिल्म बनाना चाहता हूं।
आमतौर पर फिल्मकार अपने बेटे को खुद ही लांच करते हैं, आपने ऐसा नहीं किया?
'स्टूडेंट्स ऑफ द ईयर' से वरूण की शानदार लॉचिंग हुई है। कोई भी कलाकार ऐसी ही ओपनिंग चाहता है। मैं जैसी फिल्में बना रहा था उसमें वरूण के लायक रोल नहीं था। आने वाले समय में यदि स्क्रिप्ट में वरूण के लिए कुछ गुजाइंश होगी तो हम उसे जरूर लेंगे।