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अनुष्का ने खोली बॉलीवुड की असलियत, हीरोइनों संग होता है ये सब!

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अनुष्का शर्मा ने हाल ही में अनुपमा चोपड़ा को जो इंटरव्यू दिया है उसने काफी हलचल मचा रखी है। उसमें अनुष्का ने न सिर्फ ब्यॉयफ्रेंड विराट कोहली के बारे में बात की है बल्कि बॉलीवुड जगत के अंदर का सच अपने नजरिए बाहर निकाला है।
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मुताबिक यूट्यूब चैनल 'फिल्म कंपैनियन' को दिए गए इस इंटरव्यू में अनुष्का शर्मा ने बॉलीवुड में फैले लिंग भेदभाव और लोगों के दोमुए रवैये पर खुल कर बोला है।

अनुष्का को फिल्म जगत में सात साल हो गए हैं और इस बीच उन्हें कई बार ऐसे रवैये से गुजरना पड़ा। अनुष्का ने कहा कि इस इंडस्ट्री में एक लड़की से उम्मीद की जाती है कि वे दिखने में सुंदर हो और फिल्म में उसकी पर्सनैलिटी ऐसी जरूर हो जो किसी भी लड़के को उससे प्यार करने पर मजबूर कर दे।
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वो कहती हैं कि फिल्मों में दो औरतें तभी साथ आती हैं जब उसमें कोई लड़का शामिल हो जैसे कि लव ट्राएंगल। भारत में यह स्थिति हमारे समाज की असलियत दर्शाती है।

हीरो को मिलती है हीरोइन से बेहतर सुविधाएं

अनुष्का ने यह भी कहा कि यहां आदमी तो बूढ़े हो कर भी काम कर सकते हैं, हीरो बन सकते हैं लेकिन औरतों के लिए जवां और हसीन दिखना जरूरी है।

यही फिल्मों में भी दिखाया जाता हैृ, हालांकि कुछ फिल्में अपवाद हैं। उनका मानना है कि क्या लड़की के नखरे औऱ उसकी खूबसूरती के अलावा फिल्म में उसकी कोई अहमियत नहीं?

अनुष्का ने एक राज ऐसा भी खोला जो हम दूर से बैठे बैठे देख नहीं सकते। उन्होंने बताया कि यहां हर चीज में साफ साफ भेदभाव देखा जा सकता है। पैसे से लेकर सुविधाएं देने तक में।

उनका कहना था कि अगर आप फिल्म के आउटडोर शूट के लिए गए हैं तो हीरोइन को पहले से ही पता होता है कि उसे हीरो से कम अच्छा रूम मिलेगा। लेकिन ऐसा क्यों हैं? क्या एक होटल में दो अच्छे रूम नहीं हो सकते?

हीरो हीरोइन का नहीं होता एक जैसा औदा

उन्होंने बोला,''अगर मैं कोई ऐसी फिल्म करने जा रही हूं जिसमें मेरा रोल लीड हीरो से ज्यादा लंबा या अहम होगा तो मैं जानती हूं कि कोई अच्छा हीरो उस रोल के लिए तैयार नहीं होने वाला।''

उन्होंने मुताबिक पता नहीं क्यों लेकिन ऐसा हमेशा होता है कि लड़कों को ज्यादा अहमियत दी जाती है। शायद ऐसा सोसाइटी में ही बस चुका है। अगर कोई हीरो हीरोइन समान औदे के हैं तो भी हीरो को एक फिल्म के लिए ज्यादा पैसे दिए जाएंगे क्योंकि वह 'आदमी' है।

'हीरोइनों को बेवकूफ समझता है बॉलीवुड'

अनुष्का ने बताया कि उनके माता पिता ने उन्हें और उनके भाई को हमेशा एख दर्जा दिया। उन्हें असामनता तब झेलनी पड़ी जब वे हीरोइन बन गईं।

उनका कहना है कि फिल्म इंडस्ट्री में लोग उस औरत को पसंद नहीं करते जो हिम्मत रखती है या किसी चीज के खिलाफ बोलने का दम दिखाती है। अपने मन की बात खुल कर बोलने वाली हीरोइन एक एक्टीविस्ट हो जाती है।

यहां हीरोइनों को बेवकूफ समझा जाता है और अगर वे डायरेक्टर को कोई सुझाव देने लगें तो उन्हें तरह तरह के नामों से बुलाया जाने लगता है।
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'पैसे के मामले में भी पीछे रह जाती हैं हीरोइनें'

फिल्म जगत में एक नए हीरो और हीरोइन की भले ही एक ही वक्त पर एंट्री हुई हो लेकिन हीरो को हीरोइन से ज्यादा पैसे दिए जाते हैं। शायद यह मान ही लिया गया है कि आदमियों को घर चलाने के लिए ज्यादा रकम की जरूरत होती है।

अनुष्का ने साफ किया,'' मैं लालच में आ कर ये नहीं कह रहीं बल्कि इसलिए कि मैं चाहती हूं कि मेरी (हीरोइन) भी उतनी ही इज्जत की जानी चाहिए। आखिर हर कोई इज्जत पाना चाहता है और अगर आप मुझे कम पैसे देते हैं तो यह दर्शाता है कि आप मेरी कद्र नहीं करते।''
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