सेंसर बोर्ड पर हाल ही में हिंदी फिल्मकारों ने कई सवाल उठाए हैं। अनुराग कश्यप और मुकेश भट्ट जैसे फिल्मकारों के मुताबिक सेंसर बोर्ड की ज़रूरत से ज़्यादा सक्रियता फिल्मकारों की रचनात्मकता पर विपरीत प्रभाव डाल रही है।
लेकिन अभिनेता सैफ अली खान इन बातों से इत्तेफाक नहीं रखते। ब्रिटेन में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए आयोजित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेने आए सैफ अली खान ने कहा, "सेंसर ने लोगों को अच्छी फिल्में बनाने से नहीं रोका है। हमारा ध्यान अच्छी फिल्में बनाने पर होना चाहिए। मैं इस मुद्दे को बहुत तरज़ीह नहीं देता।”
सेंसर बोर्ड के मौजूदा अध्यक्ष पहलाज निहलानी के बारे में वो कहते हैं, "मैं उनके साथ कई फिल्में कर चुका हूं। उन्हें मेरी शुभकामनाएं।" इन सब बातों के अलावा सैफ ने सेंसर बोर्ड में अपनी मां शर्मिला टैगोर के अध्यक्षकाल में पक्षपात की बात को एक सिरे से नकार दिया।
उनसे उनकी फिल्म ओमकारा को सेंसर बोर्ड से मिली हरी झंडी के बारे में सवाल पूछा गया था। फिल्म को हरी झंडी तब मिली थी जब शर्मिला सेंसर बोर्ड की अध्यक्ष थीं। जानिए सैफ ने अपनी मां के बचाव में क्या कहा।
मेरे होने मात्र पर नहीं मिला फिल्म को सार्टिफिकेट
यह पूछे जाने पर कि कई लोगों का आरोप है कि सैफ की फिल्म 'ओमकारा' को गाली गलौज होने के बावजूद इस वजह से सेंसर बोर्ड की हरी झंडी मिल गई थी क्योंकि उस वक्त शर्मिला इसकी अध्यक्ष थीं।
इस पर सैफ ने कहा, "मेरी मां सेंसर बोर्ड की जिम्मेदार अध्यक्ष रही हैं और अपने कार्यकाल में अपने काम को बेहतर तरीके से अंजाम दिया है। मैं किसी फिल्म का हिस्सा हूं, महज़ इसलिए फिल्म को सर्टीफाइड नहीं किया गया।
उन्हें लगा सिनेमा दर्शकों तक पहुंचना चाहिए, तो उसे सर्टिफिकेट दिया।" लंदन से अपने लगाव को भी अभिनेता सैफ ने कुछ यूं स्पष्ट किया। ब्रिटेन से अपने संबंध के बारे में वो बताते हैं कि लंदन में उन्होंने अच्छा खासा वक़्त बिताया है और ये विश्व के सबसे रोमांटिक शहरों में से एक है।
सैफ ने बताया कि उन्हें लंदन के पब बहुत पसंद हैं। उन्होंने लंदन में घर क्यों नहीं लिया? इसके जवाब में सैफ बोले, "मेरे पास इतने पैसे नहीं हैं?"