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दर्दभरे गानों के बादशाह थे आदेश, रुला देती है इनकी कहानी

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कैंसर का बेइंतिहा दर्द झेलने के बाद संगीतकार आदेश श्रीवास्तव की मौत हो गई है। आदेश श्रीवास्तव ने बॉलीवुड को कई सुपरहिट गाने दिए। लेकिन उनके दर्द वाले गानों की धुन दिल में उतर जाती है। ऐसा लगता है मानो दर्द के गानों में आदेश अपने दर्द को ही बयां कर रहे हैं।
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4 सितंबर 1966 को जबलपुर में जन्मे आदेश को उनका पहला ब्रेक 1993 में फिल्म कन्यादान से मिला। 1994 में 'आओ प्यार करें' फिल्म के संगीत से उन्होंने बतौर संगीतकार फिल्म जगत में कदम रखा। जल्द ही आदेश ने एक युवा और योग्य संगीतकार और गायक के तौर पर अपनी पहचान बनाई। बहुमुखी प्रतिभा के धनी होने के चलते जल्द ही उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर काम करने अवसर मिल गया।

फिर उन्होंने बॉलीवुड के साथ-साथ हॉलीवुड हस्तियों के साथ भी गाने की शुरुआत की। मशहूर हॉलीवुड और पॉप गायक-गायिकाओं के साथ कई दफा स्टेज शेयर भी किया है। शकीरा, एकॉन समेत कई हस्तियों के साथ गाने गए। बीच में वे मशहूर टीवी शो 'सा रे गा मा पा' में एक जज के तौर पर भी नजर आए। लेकिन बाद में उन्होंने ऐसे शो में जाना बंद कर दिया। उनके मुताबिक इन टीवी शो में पारदर्शिता नहीं होती।
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लेकिन उन्हें असली पहचान साल 2000 में आई फिल्म 'रिफ्यूजी' से मिली। इस फिल्म में संगीत देने के लिए उन्हें आइफा अवॉर्ड मिला। इसके बाद 'रहना है तेरे दिल में (2001)' 'कभी खुशी कभी गम (2001)', 'बागबान (2003)' और 'राजनीति (2010) ' में उनका तैयार किया गया संगीत बेहद लोकप्रिय हुआ।
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जब कार बेचकर कराया था इलाज

साल 2010 में आदेश को कैंसर की बीमारी का पता चला तो अचानक से आदेश बिल्कुल अकेले पड़। दुर्भाग्य से उन दिनों आदेश के पास उतने पैसे भी न थे। तब इलाज के लिए उन्होंने अपनी महंगी कार बेच दी।

असल में आदेश ड्राइविंग के शौकीन थे। वह अक्सर अलग-अलग गाड़ियां ड्राइव करते हुए दिखते थे। उन्होंने हमर और बैंटले ड्राइव करते हुए अपनी फोटो भी फेसबुक पर शेयर की हैं। इसी तरह के हालत इस बार फिर बन गए थे। जब उन्हें एक-एक दिन में 12-12 लाख की इंजेक्‍शन लगानी पड़ रही थी।

दअरसल वह कुछ समय पहले भी अमेरिका से अपना इलाज कराकर लौटे थे। यहां आकर फिर से काम की शुरुआत की सोच रहे थे, लेकिन 10 दिन बाद ही फिर से बीमार पड़ गए। पिछले एक महीने से अस्पताल ही उनका घर बना हुआ था।

छोटे शहर से की थी शुरुआत

आदेश श्रीवास्तव ने छोटे शहर से अपना सफर शुरू किया था। उनका जन्म मध्यप्रदेश का जबलपुर शहर में हुआ था। उनके पिता रेलवे में सुपरिटेंडेंट और मां एक कॉलेज में लेक्चरर थीं। संगीत में रुचि होने के चलते आदेश यही से संगीत की दुनिया में कदम रख दिया था। उन्हें स्कूल-कॉलेज में जब कभी संगीत प्रदर्शन और सीखने का कोई मौका मिलता झट से वहां पहुंच जाते।

गाने की झुकाव होने की वजह से जतिन ललित की बहन अभिनेत्री विजेता पंडित उनकी जीवनसंगीनी बनी। इनके अवितेश और अनिवेश नाम के दो बच्चे भी हैं। लेकिन उनका गाने का कैरियर अभी पूरी तफ्तार भी नहीं पकड़ा था कि उनकी जिंदगी में ठहराव आ गया।

साल 2010 में पहली बार कैंसर का पता लगने के बाद आदेश ने कहा था कि एकदम से बीमार पड़ना बहुत कष्ट भरा है। जिन लोगों के साथ मैंने बरसों काम किया उनके ठंडे रुख ने मुझे इस बीमारी से ज्यादा तकलीफ पहुंचाई है। जब मैं बीमार हुआ तो कोई मुझसे मिलने नहीं आया।

आगे की स्लाइड में देखिए-सुनिए आदेश के पांच चुनिंदा गाने।

आदेश की पहचान बन गया था ये गाना


फिल्म 'राजनीति' का गीत- मोरा पिया मोसे बोलत नाही...

दर्द की इंतिहा को पार कर जाता है ये गाना


बाबुल फिल्म का गाना 'बेबसी दर्द का ये आलम'

प्यार-दर्द के बीच का ये अनोखा नगमा


फिल्म बागबान की चली-चली फिर चली चली

प्यार रामांस के भी बादशाह आदेश


कभी-कभी गम का से शावा-शावा

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लोगों की जुबान पर काफी दिनों चढ़ा रहा ये गीत


मेजर साब फिल्म का सोना-सोना
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