अपनी चुलबुली अदाओं से दर्शकों को लुभाने वाली जया भादुड़ी या जया बच्चन स्वभाव से संजीदा और गंभीर थीं। उन्होंने वह किरदार निभाएं जिनसे आमतौर पर पारंपरिक हिंदी नायिकाएं बचती या डरती रहती हैं। अमिताभ के साथ उनकी शादी की कहानी भी कोई कम फिल्मी नहीं है।
'महानगर' से शुरुआत
जया ख्यात पत्रकार तरुण कुमार भादुड़ी की तीन पुत्रियों में सबसे बड़ी हैं। हायर सेकंडरी पास करने के बाद जया ने पुणे के फिल्म इंस्टीट्यूट में प्रवेश लिया था। इससे पहले ही वे सत्यजीत राय की फिल्म 'महानगर' में काम कर चुकी थीं। फिल्म निर्माता-निर्देशक तपन सिन्हा, तरुण कुमार के अच्छे दोस्तों में थे। उनकी फिल्म 'क्षुधित पाषाण' की जब भोपाल में शूटिंग हुई थी, तब सारी व्यवस्था तरुण कुमार ने की थी।
डैनी बने बैचमेट
जब जया बच्चन फिल्म इंस्टीट्यूट में पहुंची तब शत्रुघन सिन्हा उनके सीनियर और डैनी उनके साथ में थे। पहली टर्न में ही उन्हें मेरिट स्कॉलरशिप मिल गई। पहली छात्रवृत्ति जया को और दूसरी डैनी को। डैनी और जया की अच्छी दोस्ती हो गयी थी। दोनों एक ही तरह की फिल्में करना चाहते थे।
बासु को बोल दिया ना
जया इंस्टीट्यूट में पढ़ रही थीं तभी बासु चटर्जी अपनी फिल्म में काम करने के लिए उनसे बात करने आए थे। चटर्जी से जया ने कहा था कि कोर्स पूरा करने से पहले कोई भी छात्र फिल्म में काम नहीं कर सकता, ऐसा नियम है। तब चटर्जी ने जया से कहा था कि उनके जैसी कलाकार के लिए इंस्टीट्यूट की पढ़ाई का कोई महत्व नहीं है। छोड़ दो कोर्स। लेकिन जया ने ऐसा नहीं किया था। बासु चटर्जी ने भी उनकी प्रतीक्षा नहीं की थी।
अमिताभ से पहली मुलाकात
जया बच्चन जब पुणे के इसी संस्थान में पढ़ाई कर रही थीं तो उसी दौरान अमिताभ बच्चन अपनी पहली फिल्म 'सात हिंदुस्तानी' के लिए आए। जया बच्चन उन्हें पहचानती थीं। जया बच्चन की सहेलियां अमिताभ को लंबू-लंबू कहकर चिढ़ा रही थीं लेकिन जया ने उन्हें संजीदगी से लिया। उनके मन में उस समय अमिताभ बच्चन की छवि, हरिवंशराय बच्चन के संस्कारी और सादगी पसंद बेटे की थी।
"लंबू" पर हुईं फिदा
ऋषिकेश मुखर्जी ने अपनी फिल्म 'गुड्डी' के लिए पहले जया भादुड़ी के साथ अमिताभ बच्चन को कॉस्ट किया था। बाद में अमिताभ बच्चन को इस फिल्म से निकाल दिया गया। फिल्म इंडस्ट्री के जानकार मानते हैं कि अमिताभ के लिए एक जया के मन में एक तरह का प्रेम या सहानुभूति इसी घटना के बाद हुयी थी।
चुपके से रचा ली शादी
1973 में अमिताभ बच्चन और जया साथ-साथ 'अभिमान' फिल्म में नजर आए। इसी फिल्म के दौरान दोनों ने शादी करने का फैसला ले लिया। वह इस फिल्म के बाद छुट्टी मनाने के लिए विदेश जाना चाहते थे। हरिवंशराय बच्चन ने साफ कह दिया कि यदि वह जया के साथ छुट्टियां बिताना चाहते हैं तो उन्हें पहले उनसे शादी करनी होगी। एक बेहद सादे समारोह में जया और अमिताभ की शादी हो गयी।
'शोले' के दौरान बनीं मां
शादी के बाद भी जया फिल्में करती रहीं। 'शोले' फिल्म के दौरान जया मां बनने वाली थीं। इस फिल्म के रिलीज होने के बाद जया ने श्वेता को जन्म दिया। मां बनने के बाद जया कुछ समय फिल्मों से दूर रहीं। अभिषेक के होने के बाद जया धीरे-धीरे करके फिल्मों से दूर होती गयीं। फिल्मों से दूर रहने का फैसला बच्चन परिवार का सामूहिक फैसला था।
17 साल रहीं फिल्मों से दूर
1981 में जया बच्चन ने अमिताभ और रेखा के साथ सिललिसा फिल्म की। इस फिल्म के बाद जया ने फिल्मों दूरी बना ली। इस फिल्म के रिलीज होने के 17 साल बाद वह 'हजार चौरासी की मां' फिल्म में नजर आयीं। यह एक तरह से उनकी दूसरी फिल्मी पारी थी। इसके बाद जया ने 'फिजा', 'कभी खुशी कभी गम', 'कोई मेरे दिल से पूछे', 'द्रोण' और 'लागा चुनरी में दाग' जैसी फिल्में कीं।
चुनकर ही कीं फिल्में
अपने चालीस साल के कॅरियर में जया ने लगभग पचास फिल्में कीं। वह 1971 से लेकर 1981 तक सबसे ज्यादा सक्रिय रहीं। जया ऑफबीट फिल्म बनाने वाले निर्देशकों की पंसदीदा नायिका थीं। 'परिचय', 'शोर', 'कोशिश', 'अनामिका', 'कोरा कागज', 'मिली', 'चुपके चुपके' जैसी फिल्मों में जया ने दिखाया कि वह अलग तरह की अभिनेत्री हैं।