कानपुर में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय (सीएसए) के रिटायर्ड प्रोफेसर की बेटी की संदिग्ध परिस्थितियों में जलने से मौत हो गई। मौके के हालात हत्या की ओर संकेत कर रहे हैं। बेटी रविवार देर रात रावतपुर ऑफीसर्स कालोनी के सूनसान खंडहरनुमा शौचालय में नग्न हालत में गंभीर रूप से जली हुई पाई गई थी।
ऐसी आशंका है कि उसे दुष्कर्म या दुष्कर्म के प्रयास के बाद जिंदा जला दिया गया। पुलिस पहली नजर में इसे आत्महत्या मान रही है, मगर कई ऐसे तथ्य हैं जो आत्महत्या की थ्योरी को खारिज कर रहे हैं। मसलन, मृत युवती के अंडर गारमेंट घटनास्थल पर पाए गए, युवती नग्न स्थिति में थी।
पता चला है कि इतनी बड़ी घटना में पुलिस ने भारी चूक की और रेप की पुष्टि के लिए स्लाइड ही नहीं बनवाई। आईजी ने इस पर कड़ी नाराजगी जताते हुए छानबीन की बात कही है। उधर पोस्टमार्टम में जलने से मौत की पुष्टि हुई है।
यह भी पुष्टि हुई है कि युवती को जिंदा जलाया गया। युवती के पिता का कहना है कि बेटी एसएससी की परीक्षा देने शनिवार को मेरठ गई थी। तब से उसका पता नहीं चल रहा था। यह सब कैसे हुआ, वह खुद हैरान हैं।
लड़की की हालात देख दंग रह गए
जानकारी के मुताबिक मृदला राठी उर्फ डॉली (22) सीएसए के रिटायर्ड प्रोफेसर अजीत सिंह राठी के दो बच्चों में बड़ी बेटी थी। इकलौता बेटा विदेश में नौकरी करता है। पहले यह परिवार रावतपुर ऑफिसर्स कॉलोनी में ही रहता था। मई से यह लोग विकास नगर में किराए के मकान में रह रहे हैं।
बकौल अजीत सिंह राठी सुबह उन्हें हैलट के ईएमओ डॉ. विनय कटियार का फोन आया कि आपकी बेटी 90 प्रतिशत से ज्यादा जली हालत में अस्पताल लाई गई है। पहले तो विश्वास ही नहीं हुआ। बाद में पहुंचा तो हालात देख दंग रह गया। बेटी से कुछ पूछ भी नहीं पाया और उसकी मौत हो गई।
मृदुला एसडी कॉलेज से एमए अंतिम वर्ष की छात्रा थी। पिता ने बताया कि उन्होंने भी बेटी के साथ मेरठ जाने के लिए एसी स्लीपर कोच का रिजर्वेशन करा लिया था। पर बेटी अकेले ही जाने की जिद पर अड़ी रही। वह अकेले परीक्षा देने गई। मेरठ में उनका पैतृक गांव भी है।
बेटी के रविवार रात तक न लौटने से पूरा परिवार चिंतित था। इधर-उधर फोन कर तलाश भी कर रहे थे। पिता का कहना है कि बेटी को नींद में चलने की बीमारी थी। तीन साल से डॉ. शशांक माथुर का इलाज चल रहा था। इसी वजह से उसे कहीं अकेले जाने नहीं देते थे। पर इस बार बेटी की जिद के आगे उनकी एक नहीं चली।
शरीर पर नहीं था एक भी कपड़ा
उधर, फोरेंसिक टीम सुसाइड से इत्तफाक नहीं रख पा रही है। उनका कहना है कि कपड़े और अंडरगारमेंट उतरे मिले हैं। ऐसी स्थिति में आकर सुसाइड करने की बात समझ में नहीं आ रही।
सूत्रों के अनुसार हो सकता है कि मेरठ से देर रात लौटने पर वह बदमाशों के चुंगल में फंस गई हो जो उसे सूनसान शौचालय में ले गए हों और रेप के बाद जला दिया हो। नवाबगंज थानाध्यक्ष बृजेश चंद्र यादव ने बताया कि प्रथम दृष्टया खुदकुशी जैसा मामला लग रहा है।
जांच में पता चला है कि लड़की ने पहले कई बार पिता और भाई पर हमला भी किया है। बीमारी के चलते वह हमलावर हो जाती थी। अभी पिता से ज्यादा पूछताछ नहीं हो पाई है। पर लगता है उन्हें इस घटना के बारे में काफी कुछ पता है। तफ्तीश के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।
रात में कुछ आहट मिली थी
घटनास्थल पर एक महिला ने बताया कि उसके पति रात में लगभग डेढ़ बजे ड्यूटी से लौट रहे थे, तब उन्हें शक हुआ कि शौचालय में कोई है। पर नशेबाजों के अक्सर वहां रहने की वजह से उन्होंने रुक कर नहीं देखा।
पुलिस के सामने इलाकाई लोगों ने आरोप लगाया कि यह खंडहरनुमा शौचालय नशेबाजों, अराजकतत्वों का अड्डा बन चुका है। विरोध करने पर कई बार मुहल्ले के लड़कों और ऐसे लोगों में टकराव भी हुआ। बिना नाम बताए लोगों ने कहा कि जिस शौचालय का उपयोग ही नहीं होता, उसे बनाए रखने का क्या मतलब? इसे गिरवा देना चाहिए।
राह चलते लोगों से मांग रही थी पानी
इस घटना में 90 प्रतिशत जली लड़की नग्न हालत में सुबह किसी तरह घिसट-घिसट कर शौचालय से बाहर आ गई और लोगों से पानी मांगती रही तब वारदात का पता चला। पुलिस उसे हैलट ले गई, जहां इलाज न मिलने से दो घंटे बाद उसकी मौत हो गई। उसके बयान भी नहीं कराए गए।
लड़की के साथ रेप की आशंका को इस बात से बल मिल रहा है कि उसके कपड़े उतरे हुए थे और यहां तक कि अंडरगारमेंट भी अलग पड़े मिले। पास ही एक प्लास्टिक की बोतल पड़ी मिली। आशंका है कि इसी में केरोसिन या पेट्रोल लाया गया होगा।
शौचालय की दीवारों पर हथेली रगड़ने के निशान मिले जैसे छटपटाते समय कोई बचने के लिए दीवार पर हाथ रगड़ता है। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि सुबह सैर पर लोग निकले तो इस घटना का पता चला। बुरी तरह जली लड़की घिसट-घिसट कर शौचालय के बाहर नाली तक आ गई थी और आने-जाने वाले लोगों से पानी मांग रही थी।
जिसने भी उसे देखा, सिहर गया। फिर नवाबगंज पुलिस को सूचना दी गई। सवाल यह उठता है कि वह जली, उसकी चीखें गूंजी होंगी, जलने की दुर्गंध आई होगी लेकिन कुछ दूर रहने वालों को कुछ पता ही नहीं चला।
घटनास्थल पर दोपहर में फोरेंसिक टीम पहुंची। खंडहरनुमा शौचालय छोटे-छोटे पांच भाग में बंटा है। हर तरफ कूड़ा और गंदगी थी। तीसरे खंड में काफी कुछ जला पड़ा था। कपड़े और अंडर गारमेंट अधजले पड़े थे। टीम ने उसे कब्जे में लिया। भीतर ही एक जगह जले हुए बाल मिले, टीम ने उसे भी जुटाया।
पुलिस की जांच के बिंदु:
-सुसाइड किया तो घर से दूर यही जगह क्यों चुनी? वह परीक्षा देने मेरठ गई थी या नहीं। गई थी तो कब लौटी। पिता को साथ जाने से क्यों रोका। अकेले जाने पर क्यों जोर दिया। हालांकि पिता का दावा है कि बेटी ने मेरठ में परीक्षा हाल में उपस्थिति दर्ज कराई है।
-आमतौर पर यदि खुद कोई आग लगाता है तो भागदौड़ की वजह से उसके तलवे नहीं जलते। पर मृदुला के तलवे तक जले मिले। वैसे भी कोई अंडर गारमेंट उतार कर आग नहीं लगाता। परिस्थितियां ऐसे कई तरह के सवाल खड़े कर रही हैं।
-फोरेंसिक टीम सुसाइड से इत्तफाक नहीं रख पा रही। उसका कहना है कि यह वारदात हो सकती है। पर यह भी सवाल उठ रहा है कि यदि बदमाश उठा लाते रेप करते तो मारने की क्या जरूरत थी। मारना ही था तो गला दबाकर, गला रेतकर भी मार सकते थे। जिंदा जलाने जैसा वीभत्स काम क्यों किया।
-कहीं युवती के किसी परिचित ने तो वारदात नहीं की। युवती को शौचालय में लाकर बेहोश किया गया। फिर आग के हवाले कर दिया गया हो। जिंदा जलाकर मार डालना ही मकसद रहा हो। यह पारिवारिक या मित्र कोई भी हो सकता है।
-बीमारी के चलते युवती की अपने पिता और भाई से कई बार मारपीट तक हो चुकी है। एक बार तो युवती को तीन दिन अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा था। प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह पता चला है। ऐसे में वह सीधे तौर पर ऑनर किलिंग से भी इंकार नहीं कर पा रही है। हालांकि उसका कहना है कि यह उसकी जांच का आखिरी बिंदु है।
पुलिस की चूक या लीपापोती
मृदुला की मौत का राज जानने में पुलिस ने चूक कर दी। यह सवाल इस बात से उठ खड़ा हुआ है कि पुलिस ने हालात देखने के बावजूद पोस्टमार्टम में स्लाइड बनाने की संस्तुति नहीं की। यह ऐसी स्थिति में हुआ जब घटनास्थल पर पुलिस और फोरेंसिक टीम को युवती के अंडर गारमेंट उतरे मिले थे। पुलिस ने अनजाने में चूक की या फिर लीपापोती के चलते, यह जांच का विषय है।
मृदुला जहां पर मिली, वहां के हालात बहुत कुछ बयां कर रहे थे। वह 90 फीसदी से ज्यादा झुलसी थी। रात से लेकर सुबह लगभग छह बजे तक वह वहां कराहती और घिसटती रही। सुबह पुलिस के पहुंचने पर उसे हैलट में छह बजकर 28 मिनट पर भर्ती कराया गया। करीब दो घंटे बाद मौत हो गई।
ईएमओ डॉ. विनय कटियार ने युवती से बहुत पूछने की कोशिश की लेकिन चेहरे की स्किन भी जली होने से वह कुछ भी साफ नहीं बोल पा रही थी। हालत यह रही कि नाम और पता जानने में आधा घंटा से ज्यादा का वक्त लगा। इधर, घटनास्थल पर फोरेंसिक टीम पहुंची, खुद नवाबगंज थानाध्यक्ष बृजेश चंद्र यादव पहुंचे।
अंडरगारमेंट उतरे पड़े होने के बावजूद पोस्टमार्टम में स्लाइड बनाने की संस्तुति नहीं की गई। इस बारे में जब स्वरूपनगर सीओ ममता कुरील से बात की गई तो उन्होंने कहा कि मुझे एसओ ने बताया कि स्लाइड बनाई गई है। ऐसा हो ही नहीं सकता कि स्लाइड न बनी हो।
दूसरी ओर थानाध्यक्ष बृजेश चंद्र यादव का कहना है कि मेरे सामने डॉक्टर प्रेगनेंसी टेस्ट कर रहे थे। ऐसे में उन्हें खुद ही स्लाइड बनानी चाहिए थी। बता दें कि नियमानुसार स्लाइड बनानी है या नहीं, इसकी संस्तुति पुलिस करती है। पोस्टमार्टम में तब भी स्लाइड बनाई जाती है जब परिजन आपत्ति कर न बनवाने की पैरवी करें।
पिता बोले-ढूंढ रहे थे रिश्ता
पिता अजीत सिंह राठी ने बताया कि डॉक्टर ने सुझाव दिया था कि बेटी की बीमारी शादी से ठीक हो सकती है। इसी वजह से मैं बेटी के लिए रिश्ता ढूंढ रहा था। दिल्ली, गाजियाबाद, मेरठ, सहारनपुर समेत कई जिलों में शादी का विज्ञापन भी छपवाया। जल्द ही शादी कर देने वाले थे। बेटी की बीमारी दिनों दिन बढ़ती जा रही थी। वह रात में चलने लगती, अजीब हरकत करने लगती थी। कई बार संभालने के लिए बल का सहारा भी लेना पड़ जाता था। कुछ दिन पहले तो बेटी ने एक नोट लिखकर छोड़ा था कि अगर तुम लोगों ने यह मकान छोड़ा तो तुम्हारा अहित हो जाएगा।