हरियाणा के रोहतक जिले के एक गांव से 17 साल की युवती के अपहरण और सामूहिक बलात्कार के मामले में सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई है।
याचिका में कहा गया है कि सामूहिक बलात्कार में कई पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। इस कारण पुलिस बलात्कार का मुकदमा दर्ज नहीं कर रही है। अभियुक्तों को भी गिरफ्तार नहीं किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि तहसील कलानोर के गांव सुनंदा में रहने वाली लड़की का 25 अक्तूबर को अपहरण कर लिया गया था। गांव के दबंग उसे माता-पिता के सामने से उठा कर ले गए। उसे गुड़गांव, दिल्ली तथा हरियाणा कई जगहों पर ले जाया गया।
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पुलिस ने काफी माथापच्ची के बाद एफआईआर दर्ज की। लेकिन एफआईआर में बलात्कार का अपराध दर्ज नहीं किया गया। याचिका में सुप्रीम कोर्ट के पिछले दिनों दिए गए फैसले का हवाला दिया गया है, जिसमें संज्ञेय अपराध को तुरंत दर्ज करने का निर्देश दिया गया है। याचिका में नौ अभियुक्तों को सामूहिक बलात्कार का अभियुक्त बताया गया है।
सुप्रीम कोर्ट से आग्रह किया गया है कि पुलिस को आईपीसी की धारा 376 के तहत मुकदमा दर्ज करने का निर्देश दिया जाए। साथ ही मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का आग्रह भी किया गया है।
मामले को फास्ट ट्रैक कोर्ट में ट्रांस्फर करने तथा बलात्कार की शिकार लड़की और उसके माता-पिता को पुलिस सुरक्षा प्रदान करने का अनुरोध किया गया है। अभियुक्तों में से एक झज्जर पुलिस का सिपाही बताया गया है।
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