उत्तर प्रदेश के हापुड़ जिले में सोमवार शाम चचेरी बहन से छेड़छाड़ के विरोध में मोहित की हत्या कर दी गई। उसके 24 घंटे के भीतर ही हत्या के मुख्य आरोपी के दादा का भी कत्ल कर दिया गया।
पुलिस मामले को देर रात तक छिपाए रही, लेकिन चर्चा के साथ तनाव फैला तो आनन-फानन में दोनों हत्याओं के मुख्य आरोपियों की गिरफ्तारी कर दोनों समुदायों को शांत करने की कोशिश की गई।
एहतियातन गांव में अतिरिक्त पुलिस बल और पीएसी तैनात की गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईजी ने मौके पर पहुंच कर कैंप किया।
गांव परतापुर में सोमवार शाम को मोहित की गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। गोली सिर से तमंचा सटाकर मारी गई थी। इस मामले में पुलिस ने सोमवार देर रात ही गांव के गुलजार, आजाद, कलुवा, जावेद, हनीस, आसिफ, ताहिर, जाहुलहक और दो अज्ञात के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी।
शामली के माजरा अपरा शाहपुर के जंगल में मंगलवार देर शाम आलू के खेत में एक वृद्ध की लाश मिली। हत्या गला दबाकर की गई थी। सूचना पर क्राइम ब्रांच के सीओ अमित कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उसकी शिनाख्त मोहित की हत्या के मुख्य आरोपी गुलजार के दादा जाफर (85) के रूप में की गई।
मामला तूल न पड़के इसलिए पुलिस ने देर रात तक मीडिया से इस बात को छिपाए रखा। लेकिन चर्चा के साथ तनाव फैला तो आनन-फानन में पुलिस ने मोहित हत्याकांड के मुख्य आरोपी गुलजार और उसके दादा की हत्या के मुख्य आरोपी जतनवीर को गिरफ्तार कर लिया।
मामले को गंभीरता से लेते हुए गांव में एक एडिशनल एएसपी, सात एसओ व पुलिस बल के साथ दो कंपनी पीएसी की गांव में तैनात की गई है।
आईजी आशुतोष पांडे ने बताया कि लापरवाही बरतने के आरोप में कोतवाल राघवेंद्र सिंह को तत्काल सस्पेंड कर दिया गया और सीओ सैयद मोहम्मद याकूब का सर्किल से बाहर स्थानांतरण कर दिया गया है। यदि समय रहते कार्रवाई की गई होती तो मामला तूल नहीं पकड़ता। मामला दरअसल प्रेम संबंध से जुड़ा है। पुलिस को विवाद उत्पन्न होते ही आरोपी के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए थी जो नहीं की गई।