फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बुंदेलखंड में आतंक का पर्याय बना बलखड़िया कैसे बना डकैत?

Thu, 16 Jul 2015 08:22 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चित्रकूट
विज्ञापन
विज्ञापन
बुंदेलखंड में आतंक का पर्याय बना दस्यु बलखड़िया उर्फ बाल खड़े उर्फ सुदेश पटेल पुलिस मुठभेड़ में मारा जा चुका है। गोली लगने के बाद उसके साथी जंगल के बीच ले गए।
विज्ञापन


जहां मौत के बाद गिरोह के सदस्यों ने उसके शव का अंतिम संस्कार कर दिया। यह दावा किया है चित्रकूट के पुलिस अधीक्षक पवन कुमार ने। उन्होंने सबूत के तौर पर चिता पर रखे बलखड़िया के शव की फोटो भी दिखाई।

मालूम हो कि दो जुलाई को थाना मारकुंडी के बंधा के पास कोलान ग्राम किहुनिया के जंगल में हुई मुठभेड़ में गैंग के एक सदस्य को गोली लगी थी। फायरिंग में आरक्षी कैलाश सिंह यादव और पुष्पेंद्र कुमार थाना मारकुंडी के अलावा एक अन्य सुंदर यादव घायल हुए थे।
विज्ञापन

कौन है बलखड़िया?

दस्यु बलखड़िया उर्फ स्वदेश पटेल खुद को अलग साबित करने की सनक में ही बीहड़ों का अपराधी बन गया। गांववाले बताते हैं कि शुरू से ही वह उद्दंड स्वभाव का था। बहिलपुरवा थाने के गांव बरुई के रामरतन पटेल का पुत्र स्वदेश पटेल उर्फ सुदेश पटेल छोटी- छोटी वारदातें कर बालखड़े उर्फ बलखड़िया बन गया।

बुंदेलखंड और आसपास के जिलों में आतंक के पर्याय बलखड़िया ने करीब डेढ़ दशक पहले नगयागांव में गुड्डा पटेल के साथ बीहड़ की राह चुनी थी। तब छोटी-मोटी वारदातें कर वह गांव में दहशत कायम करता था। बताया जाता है कि इसके बाद उसका अपराध की दुनिया में मन लगा तो वह ठोकिया गैंग में शामिल हो गया।

ठोकिया की मौत के बाद गिरोह की कमान जब रागिया के हाथ में आई तो उसका रागिया से मनमुटाव हो गया। रागिया की बादशाहत स्वीकार न कर उसने अलग गैंग बना लिया। पुलिस के दस्तावेजों में ये साढ़े छह लाख के इनामी बलखड़िया पुत्र रामरतन एचएस नंबर 45 ए थाना बहिलपुरवा के रूप में दर्ज है।

66 मामले हैं दर्ज
बलखड़िया पर नयागांव (सतना एमपी), बरौंधा (सतना एमपी), कोतवाली कर्वी, बहिलपुरवा, मानिकपुर, मारकुंडी थानों में कुल 66 मामले दर्ज हैं। इनमें धारा 307, 25 बटे 27 आर्म्स एक्ट, 364 ए, धारा 147,148,149, 387, 364, 14डीएए एक्ट, सेवन क्रिमिनल लॉ अमे. एक्ट, आदि विभिन्न धाराओं के मामले हैं।

..क्या खत्म होगा बलखड़िया का गैंग?

बुंदेलखंड के बीहड़ में करीब डेढ़ दशक तक आतंक का पर्याय बने बलखड़िया के मारे जाने की पुष्टि हो गई है। पुलिस अधीक्षक ने दो जुलाई को हुई मुठभेड़ में बलखड़िया के मारे जाने की पुष्टि करते हुए उसके शव की फोटो जारी की है। हालांकि अभी गैंग के तमाम सदस्य बीहड़ में छिपे हुए हैं।

पुलिस उन्हें भी तलाश रही है। ऐसी स्थिति में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि बलखड़िया का गैंग खत्म होगा अथवा कोई दूसरा दस्यु कमान संभालेगा।

फोटो से ही उसकी मौत की पुष्टि की गई। अगर पुलिस को उसकी मौत की पुष्टि करने को कोई अवशेष, राख, हड्डी आदि न मिली तो सात साल का लंबा इंतजार करना पड़ेगा, क्योंकि सात साल के बाद ही इसकी मौत पुलिस रिकार्डों में विधिवत दर्ज होगी।
विज्ञापन

बबुली संभाल सकता गिरोह की कमान

एसपी से जब यह पूछा गया कि बलखड़िया मारा गया, अब गिरोह की कमान किसके हाथ पहुंचने की आशंका है। इस पर एसपी पवन कुमार ने कहा कि इसकी ज्यादा आशंका है कि गैंग की कमान दो लाख का इनामी बबुली कोल संभाले।

उन्होंने कहा कि हालांकि लवलेश पटेल भी गैंग की कमान संभाले तो आश्चर्य नहीं। जब उनसे पूछा गया कि क्या बलखड़िया की जगह लेने को गिरोह में गैंगवार की आशंका है, तो उन्होंने कहा कि फिलहाल ऐसा नहीं दिखता।

पता चला है कि बलखड़िया जो कुंडल पहनता था, वो अब लवलेश पहने है, जबकि उसकी चेन बबुली के गले में है।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें