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पुलिस भी खौफ खाती है इस ताऊ गैंग से

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छोटी-मोटी चोरियों से अपने जरायम पेशे की शुरुआत करने वाला अलीगढ़ जिले की बुलंदशहर सीमा पर बसे गांव मीरपुर पिसावा का इंद्रपाल उर्फ गुड्डा उर्फ ताऊ गैंग की कमर तोड़ना पुलिस के लिए बेहद जटिल काम है।
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वजह साफ है कि किसी पेशेवर माफिया गैंग की तर्ज पर उसने अपने गैंग का जाल फैला रखा है और 27 के करीब शातिर बदमाश उसके गैंग के सदस्य हैं। सबसे खास बात है कि यह सभी पश्चिमी यूपी व दिल्ली के विभिन्न जिलों से ताल्लुक रखते हैं।

ताऊ को जब भी किसी की जरूरत पड़ती है तो वह खुद उनसे संपर्क करता है। बाकी समय में कहां रहता है, किसी को इसकी भनक नहीं रहती। पुलिस रिकार्ड पर गौर करें तो उसके गैंग में खुद ताऊ सहित दो लोग मीरपुर पिसावा अलीगढ़ जनपद के हैं।
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इसके अलावा सबसे अधिक 13 सदस्य बुलंदशहर, 4 गाजियाबाद, 3 नोएडा, 1 बागपत, 1 मथुरा, 1 मेरठ व दो दिल्ली के रोहिणी इलाके से ताल्लुक रखते हैं। सभी सदस्यों पर आपराधिक मुकदमे हैं।
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27 सदस्यों का लंबा-चौड़ा कुनबा है गैंग में

अलीगढ़-बुलंदशहर पुलिस रिकार्ड के अनुसार सर्वाधिक ताऊ पर कुल आठ मुकदमे हैं, जिनमें सभी डकैती के हैं। इसके अलावा सभी सदस्य 6, 5, 3, 2 और कम से कम एक मुकदमे का रिकार्ड अपने सिर पर लेकर घूम रहा है।

इसके पीछे वजह है कि या तो पुलिस उन तक पहुंच नहीं पाती या फिर उनका रिकार्ड जुट नहीं पाता। ताऊ गैंग के वर्तमान सक्रिय सदस्यों को कुल चार पुलिसकर्मी ही ऐसे हैं जो पहचानते हैं।

अगर फरारी के समय में बुलंदशहर और अलीगढ़ पुलिस की पीछे लगती तो बिना फोटो के पहचान पाना भी मुश्किल होता। अब तक इस गैंग ने उत्तराखंड, पश्चिमी यूपी, दिल्ली, हरियाणा, गुजरात में संगीन वारदातों को अंजाम दिया है, जिनमें सर्वाधिक सर्राफों के शोरूम पर लूट और डकैती ही शामिल हैं।

हर घटना में ताऊ नेतृत्वकर्ता रहा है। वही प्लानिंग बनाता है, जब जहां, जैसे जरूरत पड़ती है, तभी सदस्यों को जुटाकर घटना करता है। घटना से पहले सदस्यों को कुछ नहीं बताता।
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