'सीरियल किलर' नाम आते ही आपका दिमाग एक खूंखार दरिंदे की छवि उभार कर चौंका देता है। दरअसल, 'सीरियल किलर्स' होते भी ऐसे ही है, जिनके कारनामें पढ़कर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। हम आपको कुछ ऐसे ही 'सीरियल किलर्स' के बारें में बता रहे है।
इस सीरीज में हम आपको बता रहे है ऐसे ही एक खूंखार सीरियल किलर थियोडेर रॉबर्ट कॉवेल उर्फ टेड बंडी के बारे में। 24 नवंबर, 1946 को अमेरिका के बर्लिंगटन में जन्मे टेड पर 36 हत्याओं के आरोप साबित हुए थे। हालांकि उसने 100 से ज़्यादा हत्याएं की थीं।
24 जनवरी, 1989 को फ्लोरिडा स्टेट जेल में टेड के इलेक्ट्रिक कुर्सी पर बैठाकर मौत की सजा दी गई। नेक्रोफीलिया से ग्रस्त टेड महिलाओं के साथ बलात्कार करने के बाद स्तन काट लेता था और उनकी हत्या भी कर देता था।
अकेला रहना पसंद था टेड बंडी को
टेड बंडी अपनी मां का अवैध संतान था। अविवाहित माताओं के शेल्टर होम से उसकी मां एलिजाबेथ उसे अपने मां-बाप के घर ले गई, जहां उसे विश्वास दिलाया गया कि उसके नाना- नानी उसके माता- पिता हैं और उसकी मां उसकी बड़ी बहन है।
टेड जब चार साल का था तो उसकी मां वाशिंगटन शिफ्ट कर गई, जहां उसे एक मिलिट्री के कुक के साथ प्यार हो गया। बाद में दोनों ने शादी भी कर ली। मई 1951 में जॉनी बंडी के साथ एलिज़ाबेथ की शादी के बाद टेड को अपने सौतले पिता का अंतिम नाम बंडी काफी पसंद आया और उसने तय किया कि अपना नाम वह बंडी ही रखेगा।
टेड के सौतले पिता ने काफी कोशिश की कि भावनात्मक रूप से टेड से उनका जुड़ाव को लेकिन वो इसमें सफल नहीं हुए। टेड का अपने सौतले बाप से बिलकुल नहीं पटती थी और उसे अकेला रहना पसंद था।
पहले प्यार के साथ बनाया शारीरिक संबंध
अपने हाई स्कूल के दिनों में अपने दोस्तों के बीच टेड काफी लोकप्रिय था। उसकी रुझान राजनीति की तरफ थी और उस दिशा में वह अपनी जगह बनाना बनाना चाह रहा था।
यूनिवर्सिटी के दिनों में साल 1967 में उसके जीवन में एक लड़की आये जिसने उसका जीवन बदल दिया। टेड को एक ऐसी लड़की से मुलाकात हो गई जिसकी उसे चाह थी। दिखने में वह सुंदर थी और कैलिफ़ोर्निया के एक समृद्ध परिवार से उसका नाता था। वह टेड का पहला प्यार थी और उसके साथ उसने शारीरिक संबंध भी बनाए।
इसके बावजूद उस लड़की को टेड पसंद नहीं था। उसे लग रहा था कि टेड पति बनने के लायक नहीं है। साल 1968 में उस लड़की ने यूनिवर्सिटी ऑफ वाशिंगटन से ग्रेजुएशन किया और टेड से उसने अपना नाता तोड़ वापस कैलिफ़ोर्निया चली गई। लेकिन टेड उस महिला को भूल नहीं पाया।
जब टेड को पता चल गई हकीकत
साल 1969 में टेड को पता चल गया कि कल तक जिसे वह अपनी बहन समझता था दरअसल में वह उसकी बहन नहीं बल्कि मां थी और जिन्हें वो अपना मां-बाप समझता था वो उसके नाना- नानी थे। इस जानकारी का उसपर गहरा असर पड़ा। उसने कभी सोचा भी नहीं था कि इतनी बड़ी बात उससे छुपाई जाएगी।
इस घटना का टेड पर ऐसा असर पड़ा कि उसका स्वाभाव उग्र हो गया। लेकिन बाद में उसने खुद को संयमित कर लिया। उसने मनोविज्ञान की पढाई करने के लिए एक बार फिर वाशिंगटन यूनिवर्सिटी में एडमिशन लिया। इसी दौरान उसकी मुलाकात एलिज़ाबेथ केंडल से हुई।
एलिज़ाबेथ के साथ उसका अफेयर पांच साल तक चला। वह उसे बहुत प्यार करती थी और उससे अपनी बेटी के परफेक्ट पिता का रूप देखती थी। पेशे से सेक्रेटरी एलिज़ाबेथ तलाकशुदा थी। शादी के नाम पर टेड यह कह कर इंकार कर जाता कि अभी उसे बहुत करना है लेकिन एलिज़ाबेथ को भरोसा था कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा।
पुलिस ने उसकी सराहना भी की थी
एक बार तीन साल के एक बच्चे को डूबने से बचने के लिए सीएटल पुलिस ने उसकी सराहना भी की थी। टेड के अपराधों की फेहरिस्त में कई महिलाओं और बच्चियों के बलात्कार और क्रूर हत्याएं शामिल हैं।
टेड के अपराधों की प्रत्यक्षदर्शी रह चुकी नीटा नेरी के अनुसार वह महिलाओं के साथ बलात्कार कर उनकी नृशंस ढंग से हत्या कर देता था। टेड का शिकार बनी महिलाओं के शरीर पर कई घाव भी पाए गए थे और उनकी शरीर की हड्डियां भी टूटी पाई गईं।
बंडी ने 30 हत्याओं को स्वीकार किया और 24 जनवरी, 1989 को सुबह 7.13 मिनट पर उसे इलेक्ट्रिक कुर्सी पर मौत की सजा दी गई। बताया जाता है कि टेड की मौत के बाद जेल के बाहर मौजूद लोगों ने जश्न मनाया था। कल पढ़िए, टेड बंडी कैसे बनाता था महिलाओं को अपना शिकार