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'पाकिस्तान है ढाई लाख आबादी के नशे का जरिया'

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पठान कोट आतंकी वारदात के पोस्टमॉर्टम से सिलसिलेवार सनीखेज बातें सामने आ रही हैं। ताजा खुलासा नशे के अवैध कारोबार का है जिसकी जद में सबसे ज्यादा पंजाब के युवा है और जो सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है। सूबे में करोड़ों की नशे की तस्करी के तार सीधे पाकिस्तान से जुड़े हैं। ये हम नहीं, देश के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज एम्स की रिपोर्ट के आंकड़े बयां कर रहे हैं।
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टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक आतंकी वारदात से हुए ड्रग नशे की तस्करी के रहस्योदघाटन के बाद जारी एम्स की रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब में हर साल पाकिस्तान से साढ़े सात हजार करोड़ की कीमत के नशे के उत्पाद खपाए जाते रहे हैं। नशे के उत्पादों में सबसे ज्यादा मात्रा हेरोइन की रही। करीब साढ़े छह हजार करोड़ की कीमत की हीरोइन पाकिस्तान से पंजाब लाई जाती रही है।

इस खुलासे की सबसे चौंकाने वाली बात ये भी है कि हेरोइन तस्करी को अंजाम देने वाले ज्यादातर तस्करों को पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई सहायता करती रही है। हैरान करने वाली बात ये भी है कि नशे की तस्करी के इस नेटवर्क को ही हाल ही में पठानकोट एयरबेस आंतकी हमले अंजाम देने का जिम्मदार माना जा रहा है।
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सूबे में तैयार हो रही है नशेड़ी सेना!

सुरक्षा एंजेसियां अब तक बताती रही है कि पाकिस्तान की हेरोइन को पंजाब में इस्तेमाल नहीं की गई बल्कि राजधानी दिल्ली समेत देश के दूसरे बड़े शहरों में इसकी सप्लाई की जाती रही है।

लेकिन एम्स के नेशनल ड्रग डिपेंडेंस ट्रीटमेंट सेंटर की रिपोर्ट में बताया गया है कि पंजाब की पौने तीन करोड़ की आबादी में करीब ढाई लाख लोग नशा करते हैं। जिनमें करीब सवा लाख लोग तस्करी की हेरोइन के नशे पर निर्भर हैं।

पहले की अध्ययनों में भी ये जिक्र किया गया है कि पूरी दुनिया के मुकाबले औसतन पंजाब में नशे पर चार गुना ज्यादा निर्भरता है।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में नशा तस्कर केवल जिहादी की नहीं भेज रहे हैं, बल्कि पंजाब में हेरोइन के नशेड़ी सेना बना रहे हैं।

एम्स के सर्वे के अनुसार पंजाब से रोजाना करीब 20 करोड़ रुपए नशे पर खर्च किए जा रहे हैं। एक अनुमान के अनुसार एक आदमी हर रोज 1 हजार 4 सौ रुपए की हेरोइन का नशा कर लेता है।
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