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थाने में इंस्पेक्टर की रिवाल्वर से मुल्जिम ने खुद को गोली मारी

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गाजियाबाद से चुराई गई एक बाइक के साथ धरे गए बुलंदशहर के आटोलिफ्टर ने गुरुवार सुबह करीब छह बजे सिविल लाइन थाने में इंस्पेक्टर के सरकारी पिस्टल से खुद को गोली मार ली।
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आटोलिफ्टर धर्मेंद्र उर्फ मनोज को त्वचा संबंधी रोग होने की वजह से लॉकअप के बजाए थाने के दफ्तर में मुंशी के पास बैठाया गया था। मुंशी की निगाह बचते ही बदमाश ने दफ्तर में रखा इंस्पेक्टर का पिस्टल उठाया और खुद को गोली मार ली।

आनन फानन उसे साईं अस्पताल ले जाया गया, जहां से नाजुक हालत में बदमाश को नोएडा रेफर कर दिया गया। मामले में एसएसपी ने इंस्पेक्टर सिविल और मुंशी को सस्पेंड कर दिया गया। बदमाश के खिलाफ भी आत्महत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया गया है।
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बुलंदशहर जिले में थाना बीवी नगर के गांव सैदपुर निवासी मनोज उर्फ धर्मेंद्र पुत्र ओमवीर सिंह को सिविल लाइन पुलिस ने बुधवार को मुखबिर के जरिए मुरादाबाद बुलाया था। पुलिस ने उसे धर दबोचा और थाने ले आई।

धर्मेंद्र उर्फ मनोज को थाने में रखकर पुलिस उससे पूछताछ कर रही थी। बुधवार रात को थाने में उसे टार्चर करने के बाद लॉकअप में बंद कर दिया गया था।

लेकिन तबियत बिगड़ने की शिकायत पर तड़के करीब पांच बजे लॉकअप से निकालकर उसे थाने के दफ्तर में मुंशी के पास पंखे की हवा में बैठा दिया गया। सुबह छह बजे जब थाने का कमोबेश सभी स्टाफ गश्त से लौटकर बैरक और आवासों में नींद में था।

इंस्पेक्टर को किया गया निलंबित

थाने में महज मुंशी और पहरा ड्यूटी मौजूद थे। जाने से पहले इंस्पेक्टर मुकेश मिश्रा ने अपनी पिस्टल मुंशी के पास जमा की थी उसे मुंशी ने अपने पास तख्त पर रख लिया था।

सुबह छह बजे मुंशी प्रवेश कुमार अचानक किसी काम से दफ्तर से बाहर निकला था। इसी मौके का फायदा उठाकर आटोलिफ्टर मनोज ने इंस्पेक्टर की लोडेड पिस्टल उठाई और पेट से सटाकर खुद को गोली मार ली। जिससे थाने में खलबली मच गई।

मुरादबाद के एसएसपी लव कुमार के अनुसार प्रथम दृष्टया लापरवाही उजागर होने पर इंस्पेक्टर सिविल लाइन मुकेश मिश्रा और ड्यूटी पर तैनात मुंशी प्रवेश कुमार को निलंबित कर दिया गया है। एसपी सिटी को मामले की जांच के आदेश दिए गए हैं।

आटोलिफ्टर मनोज के खिलाफ भी आत्महत्या के प्रयास का केस पंजीकृत किया गया है। उसे चोरी की बाइक के साथ गिरफ्तार किया गया था। मेरठ और मुरादाबाद के साथ ही अन्य जनपदों में भी उसका आपराधिक इतिहास है। त्वचा संबंधी बीमारी बताने और लॉकअप में गरमी में शरीर पर छाले पड़ुने की शिकायत के बाद उसे हवालात से निकालकर दफ्तर में बैठाया गया था।
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मेरठ में था मनोज का ठिकाना

मनोज उर्फ धर्मेंद्र इन दिनों मेरठ के बृह्मपुरी में अपना ठिकाना बनाए था। वहां उसने ओमप्रकाश के मकान में अपना ठिकाना बना रखा था। पुलिस के मुताबिक उसकी आपराधिक गतिविधियों की वजह से उसके नाते रिश्तेदार उससे किनारा कर चुके हैं। वह गलशहीद थाने से भी वाहन चोरी में जेल गया था।

ले सकता था पुलिस वालों की भी जान

जिस तरह से मनोज उर्फ धर्मेँद्र ने बड़ी आसानी से सिविल लाइन थाने में इंस्पेक्टर का सरकारी पिस्टल कब्जा लिया उससे पुलिस लापरवाही उजागर होती है।

गनीमत रही कि उसने पुलिस वालों को निशाना नहीं बनाया। यदि वो चाहता तो खुद को गोली मारने के बजाए पुलिस को भी निशाना बना सकता था।
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