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NGO संचालिका ने 15 साल की लड़की से की हैवानियत!

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बरेली जंक्शन पर आर्मी के मूवमेंट कंट्रोल ऑफिस (एमसीओ) पर घबराई हुई पहुंची 15 साल की एक किशोरी का आरोप है कि शहर की एक एनजीओ संचालिका और उसका परिवार पांच साल से उसे बंधक बनाए हुए था और जुल्म ढा रहा था।
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वे लोग घर में झाड़ू-पोछे के साथ कपड़े-बर्तन धुलवाते थे। गलती पर डंडे से पीटते थे। मंगलवार सुबह चोरी के आरोप में पीटा तो वह घर से भाग आई। सेना के अफसर ने पीड़ित बच्ची और आरोपी एनजीओ संचालिका को पुलिस के सुपुर्द कर दिया है।

पंजाब के अमृतसर के गांव वरका निवासी किशोरी की बदकिस्मती पांच साल पहले शुरू हुई जब वह 10 साल की थी। धोखे से दूध गिर जाने पर उसकी बुआ ने डांटा तो नादानी में वह घर से निकल गई और स्टेशन जाकर ट्रेन में बैठ गई।
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ट्रेन में उसे बरेली के प्रेमनगर निवासी एक एनजीओ संचालिका मिली जो गीत-नाट्य के माध्यम से दूरदर्शन की ओर से प्रचार-प्रसार करती हैं। वह उसे अपने घर ले गईं।

'पुलिसवालों से बेइज्जत कराने की धमकी दी'

किशोरी का आरोप है कि वह उससे रोज झाड़ू, पोछा लगाने और बर्तन-कपड़े धुलवाने का काम कराने लगीं। गाय की सानी भी करनी पड़ती थी। काम में देर होने पर मम्मी (संचालिका की मां) डंडे से पीटती थीं। सुबह नाश्ते में बासी रोटियां देते थे।

वह घर जाने को कहती तो दीदी (संचालिका) जल्दी छोड़ने का दिलासा दे देती थीं। पुलिस के पास जाने को कहती तो दीदी कहतीं, मैं पुलिस वालों से कह दूंगी इसकी बेइज्जती करो।

किशोरी के अनुसार उसे पड़ोस की दुकान के सामने सौ का नोट पड़ा मिला था। मंगलवार सुबह उसने चॉकलेट खरीद ली। चॉकलेट देख घर वालों ने तलाशी ली तो उसके पास 70 रुपये मिले। उन्होंने चोरी का आरोप लगाकर पीटा।

बाद में वह चुपचाप घर से निकली और जंक्शन जा पहुंची और एमसीओ के सामने मौजूद जवान गौरव प्रताप से शिकायत की। जवान उसे दफ्तर में कर्नल एके दुबे के पास ले गया। इसी बीच एनजीओ संचालिका वहां पहुंच गई। कर्नल ने मामला गंभीर जान एडीएम सिटी और एसपी सिटी को फोन किया।

उनके निर्देश पर महिला थाना एसओ एमसीओ पहुंची। पूछताछ के बाद आरोपी एनजीओ संचालिका और किशोरी को अपने साथ महिला थाना ले गई। हालांकि देर शाम तक इस मामले में महिला पुलिस ने कोई लिखा पढ़ी नहीं की।
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एनजीओ संचालिका ने दी सफाई

एसपी सिटी राजीव मल्होत्रा ने बताया कि एनजीओ संचालिका से विवाद होने पर लड़की एमसीओ पहुंच गई थी। जीआरपी की सूचना पर उसे महिला थाने ले आया गया है। उसके परिवार को सूचना देकर बुलाया है। उनके आने पर उसके बारे में और जानकारी मिल पाएगी। लड़की और परिवार वाले जो लिखकर देंगे कार्रवाई की जाएगी। लड़की का मेडिकल भी कराया जाएगा। बाल श्रम कानून के तहत भी कार्रवाई होगी।

वहीं, महिला थाना एसओ विजय सिरोही ने कहा कि बच्ची के परिवारीजनों को सूचना भेज दी गई है। उनके आने पर सुपुर्द कर दिया जाएगा। वैसे इस मामले में आरोपी पर कोई अपराध नहीं बनता। दूसरे मामला प्रेमनगर पुलिस का है, वहीं कुछ होगा।

एनजीओ संचालिका ने सफाई देते हुए कहा कि वह पंजाब में कार्यक्रम करके घर लौट रही थी। उसी ट्रेन में लड़की बैठी थी, जो अपने घर से भागकर आई थी। उसे ले जाने को कई लोग कह रहे थे। चूंकि मैंने पंजाबी में बात की, जिससे वह उसके साथ चली आई। उसे लेकर वह बरेली जंक्शन स्थित जीआरपी थाने गई थी।

वहां महिला पुलिस न होने की कहकर लड़की को उसके साथ ही भेज दिया गया। लड़की ने अपने माता-पिता न होना बताया। कभी अपने घर का पता नहीं बताया। हालांकि पुलिस को लड़की के बारे में नहीं बताया गया।
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