जौनपुर से बसपा सांसद धनंजय सिंह की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं। पुलिस ने अब व्यवसायी की पत्नी से रेप के मामले में उन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर धनंजय के खिलाफ रेप व जान से मारने की धमकी देने के अलावा अप्राकृतिक यौनाचार व मारपीट की भी धाराएं भी जोड़ दी हैं। अदालत ने आरोपी सांसद को एक दिन के पुलिस रिमांड पर सौंप दिया है।
अहम है कि नौकरानी हत्याकांड मामले में धनंजय व उसकी पत्नी जागृति को पटियाला हाउस अदालत ने बुधवार को ही न्यायिक हिरासत में भेज दिया था। अदालत ने उनकी जमानत अर्जी भी खारिज कर दी थी।
इसी के बाद पांडव नगर थाना पुलिस ने कड़कड़डूमा अदालत में धनंजय को रिमांड पर लेने के लिए आवेदन दायर कर दिया। इसी आधार पर उन्हें बृहस्पतिवार को मैट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट बबीता पुनिया के समक्ष पेश किया गया।
सरकारी वकील व जांच अधिकारी ने कहा कि धनंजय का पोटेंसी टेस्ट करवाने के अलावा कई स्थानों पर भी लेकर जाना है। अत: उसका दो दिन का रिमांड प्रदान किया जाए। पुलिस ने अदालत से इजाजत लेकर धनंजय को इस मामले में गिरफ्तार कर लिया।
दूसरी तरफ धनंजय के वकील एसपीएम त्रिपाठी ने रिमांड पर आपत्ति जताते हुए कहा कि उनका मुवक्किल जांच में सहयोग कर रहा है और इस मामले में आगे जांच की जरूरत नहीं है। अदालत ने सभी तथ्यों को देखने के बाद अपने फैसले में कहा कि धनंजय पर गंभीर आरोप है और उससे पूछताछ जरूरी है अत: वे उसका एक दिन का रिमांड स्वीकार करती है।
मामले के अनुसार पीड़ित महिला रेलवे में नौकरी करती है और आरोपी सांसद धनंजय ने उसे धमकाकर जबरन वर्ष 2005 से 2009 तक रेप किया था।
पुलिस के मुताबिक मयूर विहार निवासी 42 वर्षीय उक्त महिला व उसका पति गोरखपुर के रहने वाले हैं। महिला के पति का दिल्ली में व्यवसाय है। वर्ष 2005 में किसी व्यवसायी के जरिए सांसद धनंजय उनके घर लंच पर आया था। इसके बाद वह किसी न किसी बहाने उनके घर आने-जाने लगा।
महिला ने आरोप लगाया है कि जुलाई 2005 को जब वह घर में अकेली थी उसी दौरान धनंजय उनके घर आया व पिस्टल की नोंक पर उससे रेप किया। सांसद ने उसे किसी को भी शिकायत करने पर उसके पति व बच्चों की हत्या की धमकी दी। इसके बाद यह सिलसिला वर्ष 2009 तक जारी रहा।
उन्होंने कहा महिला के धारा 164 के बयान दर्ज हो चुके हैं। महिला ने बताया है कि विरोध करने पर धनंजय ने उसकी पिटाई की और कई बार अप्राकृतिक यौनाचार किया। इसी आधार पर आरोप के खिलाफ धारा 377 व 323 धारा भी जोड़ी गई है।