कोलकाता के रॉबिन्सन स्ट्रीट पर अपनी बहन और दो कुत्तों के शव के साथ रह रहे पार्थ डे के मामले में नया मोड़ आया है। इस मामले में स्थानीय पुलिस इस बात की छानबीन करने में जुटी है कि क्या पार्थ अपने मृत बहन और दो कुत्तों के शवों का मांस भी खाता था?
संभव है कि यह विचित्र लगे लेकिन पुलिस उसके घर से बरामद हुए डायरी और कागज के पन्नों पर लिखी गई बातों की जांच करने के बाद धीरे धीरे अपना ध्यान इस ओर भी लगा रही है।
एक पुलिस अधिकारी के मुताबकि अगर यह थ्योरी सही साबित हुई तो यह भी पता चल जाएगा कि आखिर शवों के गलने के दौरान उसकी दुर्गंध पड़ोसियों को क्यों नहीं लगी।
कैसे करते थे बदबू बर्दाश्त?
कागज के हिस्से पर पार्थ के पिता अरबिंद ने लिखा था कि 'भूत को भूल जाओ और आगे देखो'। ये लाइनें इस घर में हुए काण्ड का राज और भी गहरा कर दे रही है। पुलिस इस बात को लेकर मुतमइन है कि जरुर ऐसी कोई अनकही घटना घटी है जो पार्थ को दबा रही है।
जांच के दौरान पुलिस को इस बात का भी पता नहीं चल पाया है कि आखिर अरबिंद ने आत्महत्या क्यों की और पार्थ की बहन देबजनी की मौत का कारण क्या था?
पुलिस पार्थ से इस संबंध से पूछताछ करके यह जानने की कोशिश करेगी कि आखिर किस तरह वो और उसकी बहन देबजनी दोनों कुत्तों के शवों की बदबू बर्दाश्त कर लेते थे जिनकी मौत बीते साल सितम्बर में ही हो गई थी।
देबजनी के शरीर पर नहीं है मांस
पुलिस ने पार्थ के घर से बरामद हुए दो चाकुओं को भी सीज कर दिया है जो अन्य बर्तनों की तरह एकदम साफ था। वहीं मामले की जांच करने वाले इस बात से चौंके हुए हैं कि आखिप देबजनी के कंकाल पर कही भी मांस नहीं है और न ही कहीं चमड़े मिले हैं।
यहां तक की उसके कंकाल में नस तक नहीं मिली है। फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स से बात करने पर पता चला है कि यह असंभव है कि देबजनी के कंकाल से मांस पूरी तरह से गायब हो जाए ।
शरीर पर कहीं न कहीं मांस के अंश होने चाहिए थे भले ही मौत के 6 महीने बाद यह शरीर मिला है। देबजनी के कंकाल पर मांस का थोड़ा भी अंश न मिलना इस बात का इशारा कर रहा है कि यह भी संभव है कि पार्थ एक नरभक्षी हो सकता है।
कुत्तों के शव से भी गायब हैं मांस
जो हालत देबजनी के कंकाल की है ठीक उसी तरह से दोनों कुत्तों के शरीर का भी यही हाल है। दोनों के शव से मांस पूरी तरह से गायब है। बताते चले कि बीते 10 जून को इस मामले का खुलासा हुआ था, जब पार्थ के पिता अरबिंद ने खुद को आग लगा कर आत्महत्या कर ली थी।
पुलिस वहां गई तो आत्महत्या के मामले की जांच करने के लिए लेकिन वहां पहुंच कर उसके संज्ञान में यह नया मामला आया। देबजनी की मौत बीते साल दिसंबर में हो गई थी और उन दोनों कुत्तों की मौत सितम्बर में हुई थी।
तब से लेकर अब तक दोनों पिता पुत्र कंकालों के साथ रहते थे, यहां तक कि पार्थ अपनी बहन को खाना भी खिलाता था। पहले दिन जब पुलिस वहां पहुंची थी तो उसे देबजनी के कंकाल के पास से केक और पेस्ट्री मिली थी।