किसी को प्रेम करने की इतनी भयानक सजा भी दी जा सकती है क्या? पश्चिम यूपी के बागपत में फिर एक ऐसा ही खौफनाक मामला सामने आया है।
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बड़ौत के निरपुड़ा गांव में रविवार दोपहर प्रेमी युगल को बड़ी बेरहमी के साथ छुरी से काट दिया गया। दोनों की गर्दन और पेट पर ताबड़तोड़ वार किए गए।
दोनों खून में लथपथ प्रेमी के घर में पड़े मिले। प्रेमिका की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि गंभीर रूप से घायल उसका प्रेमी अस्पताल में जिंदगी और मौत के बीच झूल रहा है।
दोनों के परिजन एक-दूसरे पर हमले का आरोप लगा रहे हैं। मामला ऑनर किलिंग का बताया जा रहा है। इस सनसनीखेज वारदात का सच जानने के लिए पुलिस घायल युवक के होश में आने का इंतजार कर रही है।
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युवती की मर्जी के बगैर कर दी गई उसकी शादी
पुलिस के मुताबिक निरपुड़ा के भट्ठा मजदूर खेमचंद के बेटे कपिल (22) का गांव के ही वेदपाल की बेटी पूजा (20) से कई सालों से प्रेम प्रसंग चल रहा था।
दोनों दलित हैं। दोनों परिवार इस प्यार के विरोध में थे। इस बीच डेढ़ महीने पहले पूजा की शादी बदरखा गांव के धर्मेंद्र के साथ कर दी गई, लेकिन पूजा इस शादी को स्वीकार नहीं पाई।
गांव वालों ने बताया कि हाल ही में वह अपने मायके आई तो कपिल से मिलना-जुलना शुरू कर दिया। उसे लेने के लिए चार दिन से उसका पति धर्मेंद्र निरपुड़ा आया हुआ था।
इसी बीच रविवार को पूजा अपने प्रेमी कपिल से मिलने के लिए उसके घर जा पहुंची।
खून से लथपथ छटपटा रहे थे दोनों
दोपहर करीब दो बजे जब खेमचंद घर पहुंचा तो दोनों खून से लथपथ पड़े थे। दोनों को ही मृत समझा गया, लेकिन एक घंटे बाद किसी ने देखा कि कपिल की सांस चल रही है।
उसे बड़ौत के आस्था नर्सिंग होम ले जाया गया, जबकि पूजा ने मौके पर ही दम तोड़ दिया।
मौके पर पहुंचे दोनों के परिवार एक-दूसरे पर वारदात का आरोप लगाने लगे लेकिन किसी ने भी पुलिस को तहरीर नहीं दी। पुलिस ने बताया कि दोनों की गर्दन और पेट पर धारदार हथियार से वार किए गए।
छुरी भी वहीं पर पड़ी थी। इस मामले में एसपी जितेंद्र शाही का कहना है कि मामला ऑनर किलिंग का बताया जा रहा है लेकिन जांच-पड़ताल के बगैर कुछ नहीं कहा जा सकता है।
तीन महीने में पांच प्रेम कहानियों का हो गया खून
03 फरवरी : सोनू-गुनगुन - दोघट के धनोरा सिल्वर नगर में सोनू और गुनगुन की लाशें कमरे से मिलीं। दोनों को छुरी से काटा गया था। गुनगुन की शादी उसकी मर्जी के बगैर बुढ़ाना में तय कर दी गई थी।
12 फरवरी : मीनू-सुंदर - छपरौली के शबगा गांव में मीनू प्रजापति की गला रेतकर हत्या कर दी गई। उसके प्रेमी सुन्दर कश्यप ने जहर खा लिया, वह मरते मरते बचा। मीनू की शादी भी उसकी मर्जी के बगैर तय कर दी गई थी।
28 फरवरी : राकिबा-राहुल -बड़ौत के गुराना रोड पर राकिबा से उसका प्रेमी राहुल अली मिलने के लिए आया। राकिबा के परिवार ने उसकी हत्या कर दी, राहुल को बेरहमी से पीटकर पुलिस को सौंप दिया।
प्रेम करने वालों की कत्लगाह बना बागपत
11 मार्च : मोहसिन-अफसाना- असारा गांव में अफसाना की लाश उसके प्रेमी मोहसिन के घर पर मिली। उसकी हत्या गला दबाकर की गई थी। इस मामले को लेकर कई दिनों तक काफी हंगामा हुआ।
... और अब इसी खूनी श्रंखला में निरपुड़ा की दर्दनाक कड़ी भी जुड़ गई है। तीन महीनों में ही पांच प्रेम कहानियां कत्ल की जा चुकी हैं। इनके अलावा ऐसे भी मामले हैं जिनमें प्यार करने वालों को इतना मजबूर कर दिया कि उन्होंने खुद ही अपनी मौत को गले लगा लिया।
यह कहानी सिर्फ 2014 की नहीं है। बागपत के इतिहास की किताब से कोई से भी साल का पन्ना पलटकर देख लीजिए, प्रेम कहानियां खून से रंगी मिलेंगी।
यह वही जिला है, जहां के असारा गांव में पंचायत ने फरमान सुनाया था कि लड़कियां अकेली घर से बाहर न जाएं। यह भी कहा था कि जो लड़का-लड़की अपनी मर्जी से शादी करेंगे, उन्हें गांव में घुसने नहीं दिया जाएगा।
बड़ा हल्ला मचा था। लेकिन हुआ क्या? हो तो वही रहा है, जो पंचों ने कहा। जो भी लड़का-लड़की अपनी मर्जी से जीवनसाथी चुन रहे हैं, उन्हें या तो मार दिया जा रहा है, या फिर मरने पर मजबूर किया जा रहा है।
शायद इन्हीं हालातों के लिए यह शेर लिखा गया, हाथों में वही पत्थर, गलियों में वही लड़के, क्या लोग मोहब्बत को हर दौर में मारेंगे?