मेरठ में खरखौदा कांड की तरह एक और सनसनीखेज मामला सामने आया है। किठौर क्षेत्र की दूसरे समुदाय युवती को आगरा का युवक नौकरी लगवाने के बहाने बहला फुसलाकर साथ ले गया और पांच महीने तक कैद रखा। इस दौरान उसके साथ दुष्कर्म किया।
युवती भागकर किसी तरह अपने घर पहुंची तो आरोपी फोन पर धमकी देने लगा। तीन माह तक चुप रही युवती ने धमकियों से आजिज आकर सोमवार दोपहर एसएसपी दफ्तर पहुंचकर तहरीर दी। एसएसपी ने जांच और कार्रवाई का आश्वासन दिया है।
युवती ने बताया कि उसके परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है, जिसके चलते वह बेगमपुल के पास एक वीडियो एडिटिंग के ऑफिस में नौकरी करती थी।
आठ माह पूर्व गांव के ही अध्यापक ने आगरा निवासी युवक से मुलाकात कराया और बताया कि इनकी कई फैक्ट्री हैं, जहां तुम्हें अच्छी सैलरी पर नौकरी मिल जाएगी। इसके बाद वह युवक के साथ आगरा चली गई।
धर्मपरिवर्तन के बाद भांजे ने भी किया रेप
युवती ने बताया कि आगरा में बलेकेश्वर चौराहा गंगेगोरी बाग के पास स्थित मकान में युवक ने उसे रखा। इसके बाद उसके साथ जबरन बलात्कार किया और कोरे कागज और स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करा लिए। मकान में आरोपी के माता-पिता और भांजा भी रहता था।
आरोपी के भांजे ने भी उसके साथ बलात्कार किया। करीब पांच महीने तक वह मकान में कैद रही। आरोपी ने उससे जबरन पूजा-पाठ कराई। युवती ने बताया कि जिस स्टांप पर हस्ताक्षर कराए गए, उसे धर्म परिवर्तन के लिए इस्तेमाल किया गया। सितंबर माह में एक रात वह मकान की छत से कूदकर भाग निकली।
कुछ लोगों की मदद से मेरठ और अपने घर लौट पहुंची। काफी दिन तक वह लोकलाज के कारण चुप रही, मगर आरोपी उसे तथा उसके परिचितों को कॉल करके धमकियां देने लगा। दो दिन पहले भी उसने उठाकर ले जाने की धमकी दी।
तो इसलिए खामोश रही 3 महीने?
युवती ने एसएसपी से गुहार लगाई कि आरोपी युवक और उसके भांजे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर गिरफ्तारी कराई जाए। एसएसपी ओंकार सिंह ने आश्वासन दिया कि मामले में गंभीरता से जांच के साथ आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
पीड़ित युवती ने बताया कि आरोपी युवक उससे शादी होने की बात कहता है, जबकि उसने युवक के साथ किसी मंदिर, मस्जिद या कोर्ट में शादी नहीं की है। युवती ने बताया कि शादी से संबंधित कोई प्रमाण भी आरोपी युवक के पास नहीं है।
सितंबर में घर पहुंचने के तीन माह बाद युवती ने आरोपी के खिलाफ कार्रवाई के लिए आवाज उठाई। इस पर युवती का कहना है कि उसके पिता मजदूर हैं। दो छोटे भाई हैं। परिवार की आर्थिक हालत कमजोर है, जिस कारण कार्रवाई कराने के लिए पुलिस अफसरों के दफ्तरों तक आने जाने और केस लड़ने की हिम्मत नहीं हो रही थी।
ये भी डर था कि परिवार की बदनामी होगी। इसी वजह से तीन महीने तक चुपचाप अपने घर में रही। युवती ने बताया कि आरोपी की धमकी की वजह से उसका घर से निकलना भी बंद हो गया था।