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महिला कैब ड्राइवरों को है परमिट का इंतजार

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महिला सुरक्षा के मोर्चे पर महाराष्ट्र सरकार की असंवेदनशीलता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि महिला कैब ड्राइवरों द्वारा संचालित होने वाली प्रियदर्शनी कैब सर्विस की गाड़ियां पिछले 18 महीनों से परमिट का इंतजार कर रही है। अमेरिकी कैब सर्विस प्रदाता कंपनी उबर में हुई ताजा घटना के बाद सरकार की तरफ से इस तरह की लापरवाही काफी चौकाने वाली है।
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प्रियदर्शिनी कंपनी ने करीब 200 महिला ड्राइवरों को भर्ती किया है, मगर महिलाओं के सफर को सकूनभरा बनाने के लिए इन ड्राइवरों को परमिट का इंतजार करना पड़ रहा है। पिछले कुछ सालों में तमाम शहरों में कई सारी ऐसी टैक्सी सर्विस शुरू हुई हैं जो महिलाओं के सुरक्षित सफर का दावा करती हैं। लेकिन ऑड ऑवर में महिलाओं के सुरक्षित सफर को ध्यान में रखते हुए सामने लाई गई इसी प्रकार की सेवा को परमिट देने में महाराष्ट्र सरकार विफल रही है।

करीब डेढ़ साल पहले महाराष्ट्र सरकार ने प्रियदर्शनी कैब सर्विस को करीब 200 परमिट अलॉट किए थे। इस कंपनी ने सिर्फ महिला ड्राइवरों को ही नौकरी पर रखा था, लेकिन इन परमिटों को लेकर अब भी उहापोह की स्थिति बनी हुई है। प्रियदर्शिनी टैक्सी सर्विस के संस्थापक सुसीबेन शाह ने बताया, हमें 200 परमिट का टेंडर तो मिल गया है, लेकिन इसकी प्रक्रिया अभी तक किसी निर्णायक नतीजे पर नहीं पहुंच पाई है।
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शाह को इस सरकार से उम्मीद

कांग्रेस-एनसीपी गठबंधन वाली पिछली सरकार में परिवहन मंत्रालय का जिम्मा मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चह्वाण के पास था जो कि हमेशा दुविधा में रहने वाले व्यक्ति के तौर पर जाने जाते थे। लेकिन शाह को उम्मीद है कि नई भाजपा सरकार इस मुद्दे पर कुछ काम करेगी और परमिट की प्रक्रिया में तेजी लाएगी।

ऊबर की सुरक्षा चूक की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि ऊबर को परमिट कैसे मिल गया जबकि उनके पास उनके ड्राइवरों तक का कोई रिकॉर्ड नहीं है। फिलहाल प्रियदर्शिनी कैब सर्विस पर्यटन वाहन परमिट के जरिए अपनी सेवाएं दे रही है। यह कंपनी मुंबई अतर्राष्ट्रीय एअरपोर्ट पर अपनी सेवाएं देती है और जो लोग ऑनलाइन या फोन के जरिए बुकिंग करवाते हैं वो उन्हें अपनी सेवाएं मुहैया करवाती है।

लेकिन प्रियदर्शिनी कैब सर्विस के लिए राहें आसान नहीं थीं। एअरपोर्ट तक अपनी कैब सर्विस को पहुंचाने के लिए उसे पांच साल का लंबा संघर्ष करना पड़ा और बंबई हाईकोर्ट के हस्तक्षेप के बाद ही इस कंपनी की राहें आसान हुईं।
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केवल एक तरफ का सफर तय करती है प्रियदर्शनी कैब

कंपनी के संस्थापक शाह ने दुखी मन से बताया कि हमारी टैक्सियों को पैसेंजरों को छोड़ने के बाद खाली लौटना पड़ता है, क्योंकि हमारे पास सिर्फ एक तरफ का ही परमिट हैं, हम सिर्फ बुकिंग वाले पैसेंजर को छोड़ने ही जा सकते हैं।

उन्होंने बताया कि पर्यटन वाहन परमिट के जरिए कैब सर्विस देना काफी खर्चीला है। इसके संचालन में काफी मुश्किलें आती हैं और हम सिर्फ नियमित किराया ही वसूल करते हैं। लेकिन सामान्य किराए के बावजूद हमने खुद को मुनाफे वाला उद्म साबित किया है। जो महिलाएं अकेले सफर करती हैं वो हमारी कंपनी को ही ज्यादा तवज्जो देती हैं।

शाह ने बताया कि इस सेवा का लाभ पुरूष भी ले सकते हैं। उन्होंने बताया कि फिलहाल प्रियदर्शिनी के पास 25 महिला ड्राइवर हैं। हालांकि उन्होंने यह भी बताया कि उन्होंने 200 अन्य महिला ड्राइवरों को भी प्रशिक्षण दिया है। ये सभी हमारी सेवा के विस्तार का इंतजार कर रही हैं।
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