'अब न्याय की परवाह कौन करें जब कातिल ही मुंसिफ है।' ये कहावत यूपी के बागपत के सामूहिक दुष्कर्म के मामले में चरित्रार्थ होते लगती है। जिले के पिलाना इलाके में पंचायत के फरमान के बाद छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म करने वाले कुकर्मियों को महज पांच-पांच जूते मारकर छोड़ दिया गया।
पीड़िता के घरवालों के मुताबिक गांव के कुछ लोगों ने पीड़ित परिवार को बदनामी का डर दिखा कर पुलिस से भी शिकायत नहीं करने दी। शाम को गांव में पंचायत कर आरोपियों से माफी मंगवाई गई और पांच जूते मारकर छोड़ दिया गया।
पीड़ित परिवार के मुताबिक वारदात को उस वक्त अंजाम दिया गया जब उनकी बेटी अपनी सहेली के साथ मंगलवार सुबह कॉलेज जा रही थी। रास्ते में गांव के ही एक कैंटर चालक ने कॉलेज छोड़ने की बात कहते हुए दोनों को लिफ्ट दे दी।
कैंटर में दो अन्य युवक भी सवार थे। कॉलेज के पास पहुंचने पर उसकी सहेली को उतार दिया। यह कहते हुए कि छात्रा (पीड़िता) अभी आ जाएगी। आरोप है कि तीनों उसे एक अज्ञात स्थान पर ले गए, जहां उसके साथ सामूहिक दुष्कर्म किया।