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इस गैंग ने दुनिया भर में बेची नकली वियाग्रा

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अगर आप कम पैसे में वियाग्रा जैसी दवाइयां खरीदते हैं तो जरा सावधान हो जाइए। लंदन में एक ऐसे गैंग का पर्दाफश हुआ है जो लोगों को कम पैसे का लालच देकर नकली दवाएं बेचता था। इसके जरिए ये लोग हर सप्ताह करीब 60 हजार यूरो भी कमा रहे थे।
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गैंग के सरगना नील गिलबर्ट (41) को कामेच्छा बढ़ाने वाली सस्ती और नकली दवाएं बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। गैंग ने लगभग 11 मिलियन यूरो की नकली दवाएं बाजार में बेची थीं।

इस गैंग ने नामी कंपनियों की आड़ में अपना धंधा शुरू किया और करीब 100 बैंक अकाउंट के जरिए ऑनलाइन पेमेंट लेते थे। ये अकाउंट लंदन के अलावा दुनिया भर में फैले गैंग के सदस्यों या उनके रिश्तेदारों के होते थे, जिनके जरिए धंधा चलाया जा रहा था।
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अदालत में मामले की सुनवाई के दौरान इस बात का पता चला कि इस गैंग की शुरुआत 2004 के आसपास हुई लेकिन वर्ष 2011 में इसका भंडाफोड़ होने के बाद भी गैंग के कुछ सदस्य सक्रिय रहे और इसे आगे बढ़ाते रहे।

कामेच्छा बढ़ाने की ऐसी दवाएं भी बेचीं

डेली मेल के अनुसार, एक बिजनेसमैन सेठ पेनिंगटन समेत करीब सात लोगों ने इस बात को स्वीकार किया है कि वे किसी न किसी रूप में इस गैंग की मदद कर रहे थे।

पेनिंगटन ने पहले बताया था कि उसने सिर्फ वैध दवाइयां और कॉस्मेटिक्स ही बेची हैं, ऐसे में उसे गलत तरी‌के से फंसाया जा रहा है, लेकिन बाद में उसने सच कबूलते हुए स्वीकार किया कि वह सस्ती और नकली वियाग्रा बेचता था।

यही नहीं इसके अलावा भी वह गैरकानूनी तरीके से ऐसे दवाएं भी बेचता था जिन पर बैन लगाया जा चुका है। ये दवाएं कामेच्छा बढ़ाने के लिए इस्तेमाल की जाती है। पेनिंगटन और गिलबर्ट समेत गैंग के सभी सदस्यों को अब इस मामले में सजा सुनाई जानी बाकी है।

इस मामले में वादी वकील ने बताया कि यह एक बहुत बड़ा बिजनेस बन चुका है। इसमें गैंग के लोग वेबसाइट के जरिए वियाग्रा समेत तमाम ऐसी नकली दवाइयों के ऑर्डर लेते थे और उनकी सप्लाई भी करते थे। इसके जरिए इन लोगों ने अब तक 11 मिलियन यूरो से भी अधिक कमाए हैं।

हालांकि यह आंकड़ा अभी और बढ़ सकता है। क्योंकि अभी तक गैंग के सभी बैंक अकाउंट नहीं देखे गए। इसके अलावा बहुत सी दवाइयां नकद पैसे में भी बेची गई हैं।
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ऑडिट जानकर दंग रह जाएंगे

गिलबर्ट की ओर से किए गए एक ऑडिट से पता चला है कि वर्ष 2011 में इस गैंग ने गैरलाइसेंसी दवाइयां बेचकर करीब 60 हजार यूरो कमाए। इसके जरिए इन्होंने लगभग 3 मिलियन यूरो का कारोबार किया।

इन लोगों ने किराए के ऑफिस और दुकानों के जरिए धंधा आगे बढ़ाया और कॉस्मेटिक व ज्वेलरी के पैकेट के अंदर इन दवाइयों की सप्लाई करते थे और ज्यादातर कार्ड पेमेंट ही लेते थे। इनके ग्राहक यूरोप के अलावा जर्मनी, स्वीडन और फ्रांस में भी थे।

गैंग के मुखिया गिलबर्ट के कई खातों में विदेशों से पैसे जमा कराए जा रहे थे और यही नहीं उसने खुद भी लोगों से मिलकर हाथों हाथ उन्हें दवाइयां बेची हैं। इस मामले में गिलबर्ट समेत करीब 10 लोगों को दोषी ठहराया गया है। इन्हें दो दिन बाद सजा सुनाई जा सकती है।
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