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दर्द से तड़पती चीख 'प्लीज, पीयूष बचा लो'

Thu, 31 Jul 2014 06:57 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, कानपुर
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‘ज्योति के शरीर पर चाकू धंस रहे थे खच-खच-खच और दर्द से तड़पती हुई वह चीख रही थी पीयूष हमें बचा लो, पीयूष हमे बचा लो। पर पीयूष तो उसे इसी हाल में देखना चाहता था। थोड़ी देर बाद चीखें शांत हो गईं।’ कार के अंदर ज्योति की हत्या के बारे में जानकारी देते हुए पुलिस को यह बात अवधेश ने बताई।
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अवधेश ने बताया कि तय साजिश के अनुसार वह, रेनू और सोनू तय समय पर 27 जुलाई की देर शाम पैदल ही सीएसए चौराहा के पास पहुंच गए थे। वहां पीयूष कार लेकर पहले से ही खड़ा था। उसने इशारे से अपनी कार पहचनवा दी।

इसके बाद उसकी और पीयूष की वारांडा रेस्टोरेंट के पास भी मुलाकात हुई। बातचीत के बाद वह साथियों के साथ सीएसए से रावतपुर जाने वाली रोड पर पहुंच गया। रेस्टोरेंट से निकलकर पीयूष ज्योति को लेकर इसी रोड पर पहुंचा। बकौल अवधेश हम लोग पहले से ही वहां खड़े थे।
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अनहोनी की आशंका पर पति से लगाई थी गुहार

हमको देखकर पीयूष ने अपनी कार रोक दी और ड्राइविंग सीट से उतर गया। उसने पीयूष की कार की स्टेयरिंग संभाल ली। कार की पिछली सीट पर रेनू और सोनू बैठ गए। उसने कार रावतपुर रोड पर दौड़ा दी। इस दौरान रेनू और सोनू ने ज्योति को पिछली सीट पर घसीट लिया। ज्योति के शोर मचाने पर उसका मुंह दबा लिया।

रेनू ने ज्योति का सिर झुकाकर पिछली सीट के नीचे घुसेड़कर उसे असहाय कर दिया और सोनू ने चाकू से ताबड़तोड़ प्रहार किए। अवधेश ने बताया कि जब सोनू ज्योति पर चाकू घोंप रहा था तब ज्योति के मुंह से एक ही शब्द निकल रहा था पीयूष हमें बचा लो।

ज्योति जोर-जोर से चीख रही थी। इससे वह, रेनू और सोनू डर गए थे। उन्हें पकड़े जाने का भय सता रहा था। इस वजह से रेनू ने ज्योति का सिर झुकाकर कार की सीट के घुसेड़ दिया था ताकि उसकी आवाज कार से बाहर न जा सके। इस दौरान सोनू ने ज्योति के शरीर पर चाकू के ताबड़तोड़ प्रहार किए।

'पीयूष तुम गलत कर रहे हो'

ज्योति की सांस थमने के बाद ही सोनू के हाथ रुके थे। इस दौरान वह कार जीटी रोड पर दौड़ाता रहा। फिर कल्याणपुर क्रासिंग से पनकी रोड पर कार मोड़ दी। पनकी थाने के पास एक गली में सूनसान जगह पर कार खड़ी की।

कार लॉक करने के बाद चाभी वहीं पर फेंक दी। वारदात में प्रयुक्त चाकू भी वहीं फेंक कर वे लोग पैदल भाटिया तिराहे तक आए और फिर फरार हो गए। हत्यारोपी अवधेश ने बताया कि हत्या में प्रयुक्त चाकू सर्वोंदय नगर स्थित रेव मोती से खरीदे थे। चाकू खरीदने के लिए पैसा भी पीयूष ने ही दिया था। रेनू ने मॉल से 150-150 रुपये में चार चाकू खरीदे थे। वारदात में एक ही चाकू का इस्तेमाल किया गया था। तीन चाकू कार में ही रख दिए थे।

अवधेश के मुताबिक सीएसए से रावतपुर चौराहे को जाने वाली रोड पर जब पीयूष कार से उतरा था। तभी ज्योति को अनहोनी का शक हुआ था। उसने पीयूष से कहा था कि तुम गलत करा रहे हो। पीयूष ने ज्योति की बातों को अनसुना करते हुए कार आगे बढ़ाने का इशारा कर दिया था।

‘रक्षाबंधन से पहले मारना ही था’

पीयूष किसी भी सूरत में रक्षाबंधन से पहले ज्योति को मार डालना चाहता था। ज्योति को पीयूष के कई महिलाओं से संबंध की जानकारी हो गई थी। शुरू में तो उसने बर्दाश्त किया पर बाद में जब मोबाइल छूते ही पीयूष डांट-डपट करने लगता, मैसेज डिलीट कर देता तो ज्योति का शक पक्का हो गया।

ज्योति ने पहली कंपलेन अहमदाबाद में रहने वाली अपनी एक रिलेटिव से की। पीयूष से पूछताछ के बाद आईजी ने यह जानकारी दी। ज्योति ने मां कंचन नागदेव को 15 दिन से रात एक बजे से चार बजे तक बाहर रहने की बात बताई। पीयूष फैक्ट्री में काम बहाना बनाकर कहीं और समय गुजारता था।

रक्षाबंधन में ज्योति को जबलपुर जाना था। पीयूष को लगने लगा कि यदि जबलपुर में इसने पूरी बात बता दी तो बदनामी हो जाएगी। उत्पीड़न का मुकदमा भी लग सकता है। इसी वजह से पीयूष हर हाल में ज्योति को रक्षाबंधन से पहले निपटा देना चाहता था।
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प्रेमिका मनीषा को पांच सिम दे रखे थे पीयूष ने

पुलिस की जांच में यह भी खुला कि पीयूष अपनी फैक्ट्री में कार्यरत एक युवती पर फिदा था। वह उसे इमोशनल ब्लैकमेल करता था। पीयूष ने इसे भी शादी का झांसा दे रखा था। पहले पुलिस ने इसे भी वारदात में सहयोगी की संभावना पर उठाया, घंटों पूछताछ की।

पर, यह खुद शोषण का शिकार थी, इस वजह से पुलिस ने इसे क्लीन चिट दे दी। युवती ने बताया कि 27 को पीयूष ने उसके पास छह घंटे के भीतर 150 मैसेज किए थे। मैसेज में प्यार, शादी कर लेने का वादा और भी कई तरह की बातें थीं। दोनों में सोमवार साथ बिताने का करार भी हुआ था।

पीयूष ने प्रेमिका मनीषा को पांच सिम दे रखे थे। दो सिम उसने फर्जी नाम-पते से लिए थे। इसमें एक सिम खुद और दूसरा मनीषा प्रयोग कर रही थी। दोनों सिम बांदा जिले के फर्जी नाम-पते से लिए गए थे। आईजी ने बताया कि पीयूष ने यह स्वीकार भी किया। बताया कि फैक्ट्री के एक लेबर के भाई की दादा नगर में मोबाइल की दुकान है। यह दोनों सिम वहीं से दो महीने पहले लिए थे
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