वाराणसी-बरेली एक्सप्रेस के एस-2 कोच में मंगलवार को उस समय सनसनी मच गई जब वहां रखे एक लावारिस बक्से से अधेड़ की लाश बरामद हुई। ट्रेन के कैंट स्टेशन पहुंचने के बाद जीआरपी और आरपीएफ को लावारिस बक्से के बारे में सूचना मिली थी।
बक्से का ताला तोड़ा गया तो अंदर बोरे में बंधा शव पड़ा था। पेट में गोली लगने के दो निशान के अलावा पीठ पर धारदार हथियार के गहरे जख्म पाए गए। उम्र करीब 50 वर्ष आंकी गई। जीआरपी ने शव को कब्जे में ले लिया। शिनाख्त की कोशिशें की जा रही हैं।
ट्रेन के रूट से संबंधित रेलवे स्टेशनों को सूचना दे दी गई है। पोस्टमार्टम बुधवार को होगा। कैंट जीआरपी के मुताबिक छानबीन में अधेड़ की शर्ट की जेब से मोबाइल का एक कवर बरामद हुआ है। उस पर फैजाबाद लिखा हुआ है। इस आधार पर भी छानबीन और शिनाख्त के प्रयास किए जा रहे हैं।
जेब से मिला ये सामान
वाराणसी-बरेली एक्सप्रेस मंगलवार को दिन में लगभग 11 बजे कैंट रेलवे स्टेशन पहुंची। इसके बाद रेल प्रशासन को ट्रेन के एस-2 कोच में एक बड़ा नया बक्सा लावारिस हाल में पड़े होने की सूचना मिली। इसका मेमो जीआरपी को भेजा गया। जीआरपी और आरपीएफ के पहुंचने तक ट्रेन यार्ड में पहुंच चुकी थी।
बक्से को बोगी का एक गेट बंद कर गैलरी में रखा गया था। जब जीआरपी के जवान बक्से के पास पहुंचे तो उसके किनारों से खून रिसता दिखा। जब बक्से का ताला तोड़कर देखा गया तो सबसे ऊपर रजाई रखी थी। उसके हटाने पर मच्छरदानी और उसके नीचे एक बंधा बोरा रखा था। बोरे में अधेड़ की लाश थी।
वह शर्ट-पैंट और हाफ स्वेटर पहने था। लाश बाहर निकाली गई तो पेट में नाभी के पास गोली लगने के दो निशान और पीठ पर धारदार हथियारों के जख्म थे। हाथ-पैर बंधे हुए थे। जेब से मोबाइल कवर मिला, जिस पर फैजाबाद सिविल लाइंस लिखा था। कैंट जीआरपी के एसएसआई देवेंद्र ने बताया कि जितने भी संबंधित रेलवे स्टेशन हैं उन्हें सूचना दे दी गई है। शव को कब्जे में लेकर शिनाख्त कराने का प्रयास किया जा रहा है।
बागपत: ग्राम प्रधान को गोलियों से भून कर हत्या
सात मार्च को लापता हुए बागपत में खेड़ा इस्लामपुर के ग्राम प्रधान चौधरी राजेंद्र सिंह (52) की गोलियों से भूनकर हत्या कर दी गई। मंगलवार दोपहर उनका शव बावली गांव के ईख के खेत से मिला। उनके हाथ-पांव रस्सी से बंधे थे और मुंह पर टेप चिपका था। शरीर पर धारदार हथियार के निशान भी मिले हैं।
शव के पास ही टूटी हुई चूड़ियां, शराब की खाली बोतलें, नमकीन के पैकेट और कारतूसों के दो खोखे पड़े थे। माना जा रहा है कि ये सब चीजें पुलिस का ध्यान बंटाने के लिए रखी गई। हत्या की वजह अभी तक सामने नहीं आ पाई है।
मृतक के भाई मोहकम ने बताया कि वे सात मार्च को 11 बजे बागपत गए थे। वहां इस्लामपुर के ही जोनी को 40 हजार रुपये उधार देने के बाद बाइक से उसके साथ ही बड़ौत गए। वहां से शाम को चार बजे अकेले चले। इसके बाद उनका कुछ पता नहीं चला।
कमर के निचले हिस्से पर मारा चाकू
मंगलवार को बड़ौत कोतवाली पर उनकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई, तभी सूचना मिली कि बावली गांव में रामप्रकाश के ईख के खेत में एक लाश मिली है। उसे देखने के लिए गांव के कुछ लोग गए तो उसकी शिनाख्त राजेंद्र सिंह के रूप में हुई।
उनकी बाइक भी मंगलवार को ही बड़ौत के कोताना रोड पर लावारिस हालत में मिली। शव पर कई जगह गोलियों के निशान थे। कमर के नीचे की तरफ का हिस्सा धारदार हथियार से गोद रखा था।
सीओ राहुल मिठास ने बताया की हत्या के कारणों का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। जल्द ही मामले का खुलासा हो जाएगा।