आए दिन होती घिनौनी वारदातें इस बात की तस्दीक करती हैं कि यूपी में महिलाएं महफूज नहीं हैं। बेशक, एक महिला गांव के ही दरिंदों का शिकार हुई लेकिन आरोप सरकार, कानून और व्यवस्था पर भी लगना चाहिए क्योंकि सूबे में सरकार का इकबाल इतना है कि अपाराधी बेखौफ हैं और नापाक मंसूबों को धड़ल्ले से अंजाम दे रहे हैं।
ताजा बानगी मुजफ्फरनगर से हैं। पुलिस के मुताबिक स्वास्थ्य महकमे की योजना 'आशा' के तहत ग्रामीण इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं में लगी महिला कर्मचारी को सामूहिक बलात्कार के बाद वीडियो क्लिपिंग से ब्लैकमेलिंग का भी शिकार होना पड़ा, आखिरकार शारीरिक और मानसिक यातनाओं से आजिज आकर उसने मरना पसंद किया और खुदकुशी कर ली।
आशा कर्मचारी की खुदकुशी की घटना इलाके भर को कचोट गई। लोगों ने घंटों सड़क पर शासन-प्रशासन और सीएम अखिलेश के खिलाफ नारे लगाए। छपार इलाके में विरोध प्रदर्शन के चलते दो घंटे तक दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग बंद रहा। जिलेभर की आशा कर्मचारी सड़क पर उतर आईं।
केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉक्टर संजीव बालियान के छपरा गांव में पहुंचने के बाद ही देर शाम शव का अंतिम संस्कार किया गया। इलाके में तनाव को देखते हुए भारी पुलिस फोर्स तैनात रहा। पुलिस ने मुख्य आरोपी को हिरासत में ले लिया है।
आशा कर्मियों का फूटा आक्रोश
गर्भवती महिला की डिलीवरी कराने के लिए बुलाई गई आशा कर्मचारी को वापस गांव छपरा छोड़ने के लिए जाते हुए गांव के ही शाहिब और उसके साथियों ने गैंगरेप किया था। दुष्कर्म के बाद आरोपियों ने महिला की वीडियो क्लिप बनाकर ब्लैकमेलिंग शुरू कर दी।
उत्पीड़न से त्रस्त महिला ने मंगलवार को जहर खाकर जान दे दी थी। घटना पर आक्रोश को देखते हुए पुलिस प्रशासन ने बुधवार सुबह महिला का पोस्टमार्टम कराया। डीएम निखिलचंद्र शुक्ला के निर्देश पर डॉक्टरों के पैनल ने पोस्टमार्टम किया। पोस्टमार्टम पर नेताओं और ग्रामीणों की भीड़ जुटती देख प्रशासन के हाथ-पांव फूल गए।
इसी बीच हाथ में लाठी-डंडे लिए आशा कर्मियों ने छपार में एनएच-58 पर जाम लगा दिया। दिल्ली-देहरादून राष्ट्रीय राजमार्ग पर दोनों और कई किलोमीटर तक वाहनों की लाईनें लग गईं। पोस्टमार्टम के बाद आशा के शव को पुलिस ने बसेड़ा मार्ग से गांव ले जाने की कोशिश की तो ग्रामीण भड़क उठे। छपरा जाने वाली सड़क पर स्वास्थ्य विभाग की आशाओं का जमावड़ा देख पुलिस ने जैसे-तैसे लोगों को मनाया।
पीड़ित परिवार को मुआवजा और बच्चों को नौकरी का वादा
एसपी सिटी प्रदीप गुप्ता और एडीएम प्रशासन मनोज कुमार का आशा कर्मियों ने घेराव कर गैंगरेप के आरोपियों को तत्काल गिरफ्तार करने और परिवार को मुआवजा दिलाने की मांग की।
पूर्व प्रमुख वीरेंद्र सिंह कुतुबपुर की मौजूदगी में ग्रामीणों ने केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री डॉक्टर संजीव बालियान को बुलाने पर ही दाह-संस्कार करने का ऐलान कर दिया। पूरे मामले से अधिकारियों ने डीएम निखिलचंद्र शुक्ला और एसएसपी केबी सिंह को अवगत कराया।
देर शाम केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री बालियान के छपरा गांव पहुंचने पर ही अंतिम संस्कार किया गया। बालियान ने भरोसा दिलाया कि मृतक आशा के बच्चों को दस लाख रुपये का मुआवजा और हाईस्कूल उत्तीर्ण करने के बाद सरकारी नौकरी दिलाई जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के दबाव में प्रशासन काम कर रहा है।
अंतिम संस्कार के समय गांव में भारी पुलिस बल, पीएसी और आरआरएफ मुस्तैद रही। पूर्व चेयरमैन कपिलदेव अग्रवाल, पूर्व विधायक अशोक कंसल, पूर्व विधायक मिथलेश पाल, बसपा जिलाध्यक्ष कमल गौतम आदि ने परिजनों को सांत्वना दी। उधर, पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपी शाहिब को हिरासत में ले लिया है। उससे अज्ञात स्थान पर रखकर पूछताछ की जा रही है। अन्य आरोपियों की तलाश में दबिशें दी जा रही हैं।